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अमेरिका द्वारा पुष्ट पोषित इज़राइल,बेंजामिन नेतन्याहू

by Samta Marg
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अमेरिका द्वारा पुष्ट पोषित इज़राइल,बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में

अमेरिका द्वारा पुष्ट पोषित इज़राइल,बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में

 

अमेरिका द्वारा पुष्ट पोषित इज़राइल,बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में, ग़ज़ा में रहने वाले लाखों फिलिस्तीनियों के ऊपर अपने वहशी पागलपन के चलते जो कहर बरपा रहा है, उसके लिए उसे दुनिया की अमनपसंद आबादी और इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।


इस वहशियत के पक्ष में खड़े अमेरिका और यूरोपीय देशों की बदनीयती को तो समझा भी जा सकता है क्योंकि इन्हीं मुल्कों द्वारा1948में फिलिस्तीन से उनके मुल्क का एक भाग छीनकर ही तो एक नए देश के रूप में,इज़राइल का निर्माण किया गया था।
लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का, बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थन में खुलकर सामने आना, नजरिए के किसी भी कोण से, समझ से बाहर है।
दुनिया को युद्ध की बजाय बुद्ध, महावीर और महात्मा गांधी की विचारधारा से रंगने के महान ऐतिहासिक प्रयोग और घोर तपस्या में लीन भारत ने, आजादी मिलते ही अपनी विदेशनीति का आधार भी इसी विचारधारा को बनाया था और नरेन्द्र मोदी के पहले तक भारत इसी नीति के पक्ष में खड़ा रहा है।
इज़रायल की वर्तमान सर्वनाशी हिंसा के समर्थन के लिए प्रचारित तो यही किया जा रहा है कि यह युद्ध इज़राइल बनाम हमास का युद्ध है जो हमास द्वारा इज़राइल पर किये गए ताजा हमले की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है।
लेकिन सच तो ये है कि ये युद्ध, फिलिस्तीन और फिलिस्तीनियों को जड़मूल से तबाह कर देने की, पश्चिमी देशों की साजिश से उपजे यहूदी राष्ट्र इज़राइल की जन्मजात दुर्भावना से,अबतक किये गए कई युद्धों की ही ताजा कड़ी है।हमास तो एक बहाना है।
भारत अपनी उस अहिंसा व युद्ध विरोधी,
परंपरागत विदेशनीति का त्याग ऐसे समय में कर रहा है जब हिंसा के दावानल में जल रही दुनिया, भारत को सिर्फ इसलिए उम्मीदभरी नजरों से देख रही है क्योंकि अकेला एक भारत ही ऐसा मुल्क है जिसे,अहिंसा का विचार, उसकी सदियों से की जा रही तपस्या के परिपाक स्वरूप प्राप्त हुआ है और इस दुनिया के शांतिपूर्ण सहअस्तित्व का एकमात्र समाधान भी, इसी नैतिक शक्ति से सम्पन्न भारत के ही पास है।
बकौल दिनकर:-
दो हृदयों के तार जहाँ भी, जो जन जोड़ रहे हैं।
मित्रभाव की ओर विश्व की गति को मोड़ रहे है।
घोल रहे हैं जो जीवन सरिता में प्रेम रसायन,
खोल रहे हैं देश देश के बीच मुंदे वातायन।
आत्मबन्धु कहकर ऐसे जन जन को नमन करूँ मैं।
मेरे प्यारे देश!देह या मन को नमन करूँ मैं?
किसको नमन करूँ मैं भारत?किसको नमन करूँ मैं?

नरेंद्र मोदी या आरएसएस ,भारत नहीं हैं।भारत एक विचार है, एक तपस्या है।इस महान और दीर्घजीवी तपस्या के मूल स्वरों को नष्ट करने पर, आरएसएस परिवार अपने मोदीमुखी राजनीतिक मुखौटे के जरिये सिर्फ इसलिए आमादा है क्योंकि बेंजामिन नेतन्याहू और इज़राइल के जन्मदाता पश्चिमी मुल्कों की और आरएसएस की मंशा भी इस दुनिया को ही इस्लाम मुक्त या मुस्लिम मुक्त दुनिया बना देने की वहशी मंशा है।
2014से अबतक के मोदीमुखी राजनीतिक भारत के कारनामे इसी मंशा को प्रमाणित करते हैं।

 

विनोद कोचर

विनोद कोचर

विनोद कोचर

 

 

 

 

 

 

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