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चेतना मरेगी नहीं -भारतीय पौरुष की सीधी सहज अभिव्यक्ति!

by Samta Marg
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चेतना मरेगी नहीं

भारतीय पौरुष की
सीधी सहज अभिव्यक्ति!
क्रांतिपूत जीवन का,
सक्षमतम दृष्टि-बिम्ब!
रंग-धर्म-भाषा के भेद-अंधकारों में,
ओजस्वी विचारों का तेजोमय सूर्यपुत्र,
अक्टूबर बारह को,
विजयादशमी की सुबह,
देह से विमुक्त हुआ।
ज्योतिपुंज अक्षर में,
अक्षर विचारों में
विचार आंदोलन में
और आंदोलन क्रांतियों में
हमेशा हमेशा जन्म लेंगे
और डॉ लोहिया
जाग्रत विवेक की
जनवादी चेतना में
सर्वदा सजीव होंगे
गोवा की हरीभरी
धरती का सलोनापन
संसद-भवन दिल्ली की
गूंजी हुई दीवारें
केरल से कश्मीर तक
हिंदी के समर्थक लोग
‘इतिहासचक्र’ वाले को
कभी नहीं भूलेंगे

राजेंद्र अनुरागी

 

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