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मुंबई केवल फिल्मी तमाशा ही नहीं, ज्ञान का चिराग भी वहां जलता है।  

by Samta Marg
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मुंबई केवल फिल्मी तमाशा ही नहीं, ज्ञान का चिराग भी वहां जलता है।

पहले नारा लगाता था,
कांग्रेस हटाओ, देश बचाओ,
अब भाजपा हटाओ देश बचाओ,
नारो पर सियासी दुनिया में बहस, मुबाहसा पहले भी चलता था, अभी भी बदस्तूर जारी है।


केशव गोरे ट्रस्ट तथा साधना प्रकाशन की ओर से स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा, सोशलिस्ट चिंतक, मधुलिमए द्वारा 1988 में  2 भागो में 602 पन्नों में अंग्रेजी में लिखी


किताब “बर्थ ऑफ नॉन कांग्रेसिस्म  का मराठी अनुवाद”  सतीश कामत द्वारा किया गया है। पुस्तकों का विमोचन  मुंबई के मराठी संग्रहालय, नायगाव दादर मुंबई में किया गया।

चमक धमक तथा मूल्क की आर्थिक राजधानी कहीं जाने वाले इस शहर में आजादी की जंग में भाग लेने वाले सत्याग्रहियों, दिल्ली मुंबई से निकलने वाले मराठी और अंग्रेजी के प्रमुख पत्रकार, कलाकार, प्रोफेसर बुद्धिजीवियों ने उसमें शिरकत की।


 3 घंटे से अधिक चले इस बौद्धिक इजलास में वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश बाल की सदारत में नितिन वैद्य जो राष्ट्र सेवा दल के अध्यक्ष के साथ-साथ आर्ट फिल्म निर्माता भी है, ने चर्चा की शुरुआत की। उनके बाद मुझे भी बोलने का मौका मिला।  

प्रकाश बाल ने विस्तार से  सोशलिस्ट तहरीक खास तौर से महाराष्ट्र में समाजवादी आंदोलन के इतिहास को याद करते हुए किताब पर अपनी राय व्यक्त की। मधुलिमए के पुत्र अनिरुद्ध लिमए ने भी अपनी बात कही।

साधना जैसी गंभीर पत्रिका के संपादक विनोद शिरसाट  ने अध्यक्षीय भाषण में कई महत्वपूर्ण बातों को रेखांकित किया। मुख्य वक्ता होने के कारण मुझसे सवाल पूछा गया था कि डॉक्टर लोहिया के गैरकांग्रेसवाद का विरोध तो मधुलिमए ने कोलकाता सम्मेलन में न जाकर, अपने प्रतिनिधि के रूप में जॉर्ज फर्नांडीज को भेजा था।

जिन्होंने लोहिया की मौजूदगी में इस नीति का कड़ा प्रतिवाद किया था।

आप इसका कैसे समर्थन कर रहे हैं?  उसके जवाब में मैने  गैरकांग्रेसवाद की पूरी पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए जवाब दिया, कि राजनीति की कुछ तात्कालिक अनिवार्यता भी होती है।

कांग्रेस के एकाधिकार  को तोड़ने के लिए लोहिया ने समयबद्घ कार्यक्रम के आधार पर गैरकांग्रेसवाद की रणनीति दी थी, यह कोई सिद्धांत  या सदैव का चुनावी गठबंधन नहीं था।

इसी तरह मधुजी ने 1977 में आपातकाल की तानाशाही के विरोध में कांग्रेस विरोधी सभी दलों जिसमें भाजपा  जनसंघ भी शामिल था, न केवल उनसे चुनावी समझौता किया, बल्कि एक दल भी बना लिया।

इसी तरह आज आरएसएस बीजेपी  नरेंद्र मोदी की सरकार के कारनामों से मजबूर होकर “इंडिया गठबंधन” में तमाम भाजपा विरोधी दलो को शामिल करना पड़ा। इंडिया गठबंधन जिसमें शिवसेना जैसी पार्टी भी शामिल है, बनाने की  अनिवार्यता बनी है।


 मधुलिमए  के बाल सखा, स्वतंत्रता सेनानी,  महाराष्ट्र समाजवादी आंदोलन के प्रथम कतार के नेता मरहूम केशव गोरे के नाम पर स्थापित ट्रस्ट के प्रतिनिधि द्वारा समाजवादी सिद्धांतों नीतियों के संबंध में किये जा रहे प्रयासों से सभा को अवगत कराया।

लोक संगीत गायक, अमरेंद्र धनेश्वर ने सभा का संचालन किया।  नौजवान सोशलिस्ट गुड्डी ने बताया की डॉ जी जी पारिख भी  सभा में आना चाहते थे परंतु स्वास्थ्य संबंधी कठिनाई के कारण नहीं आ पाए। उन्होंने अपनी  शुभकामनाएं व्यक्त की हे।

स्वतंत्रता सेनानी डा  पारिख हिंदुस्तान के सीनियर मोस्ट सोशलिस्टों में है। मूल्क के तमाम सोशलिस्ट उनको अदब की निगाह से देखते हैं। 99 वर्ष के हो चुके हैं, मुंबई जाने पर डॉक्टर जीजी पारीक जैसे हमारे पुरखे को बिना मिले एक हिमायत ही होती।

परंतु उनकी अस्वस्थता के कारण  हमारे जाने से उनको असुविधा न हों इसलिए टेलीफोन पर ही उनका हाल-चाल जाना। हमेशा की तरह उन्होंने समाजवादी विचार यात्रा, आंदोलन में सक्रिय भाग लेने की सलाह और आशीर्वाद प्रदान किया।


  व्यक्तिगत तौर पर मुंबई  का यह सफर मेरे लिए बहुत ही आनंददायक, मिठास से भरा रहा। मुंबई पहुंचने तथा वापस होने तक अनिरुद्ध लिमये ने मेरा साथ, खातिरदारी, देखभाल की।

उनकी पत्नी डॉक्टर सुषमा लिमये जो की एक प्रमुख डॉक्टर हैं, जिन्होंने मुंबई के जसलोक अस्पताल से लेकर दिल्ली के अपोलो जैसे  मशहूर अस्पतालों में काम किया है।

उन्होंने जिस शिद्दत अदब, खुलूस के साथ मेरी आवभगत तथा मुंबई की सड़कों पर इन दिनों दीपावली के त्यौहार की रंग बिरंगी,रोशनी फ़ैलाने के लिए कंदील झालर के बाजार में कई दुकानों में छानबीन कर मुझे कंदील देने का उत्साह मेरे मना करने, कैसे दिल्ली ले जाऊंगा के बावजूद, हक और हुकुम की तर्ज पर मुझको लेने को मजबूर किया उसको कैसे भुलाया जा सकता है।


पोपट (अनिरुद्ध) सुषमा और उनके सुपुत्र अपूर्व की संगत से मुझे मधु जी के साथ बरसों बरस बिताए गये पारिवारिक माहौल की खुशनुमा यादो को ताजा कर दिया।  

राजकुमार जैन

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