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श्रद्धांजलि:इतिहासकार नताली जेमान डेविस का निधन

by Samta Marg
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श्रद्धांजलि : इतिहासकार नताली जेमान डेविस का निधन

श्रद्धांजलि : इतिहासकार नताली जेमान डेविस का निधन

इतिहासकार नताली जेमान डेविस

माइक्रो-हिस्ट्री की पुरोधा इतिहासकार नताली जेमान डेविस का 23 अक्टूबर को निधन हो गया।

अपनी क्लासिक किताब ‘द रिटर्न ऑफ़ मार्टिन ग्वेर’ से ख्याति अर्जित करने वाली इतिहासकार नताली जेमान डेविस (1928-2023) ने हाशिए के समुदायों, स्त्रियों और जेंडर के इतिहास पर शानदार काम किया। अगर आप नैरेटिव हिस्ट्री में रुचि रखते हैं, तो आपको ‘द रिटर्न ऑफ़ मार्टिन ग्वेर’ पढ़नी चाहिए।
एक ही घटना या व्यक्ति से जुड़े ऐतिहासिक आख्यानों की बहुलता और उनके विवरण की भिन्नता से कोई इतिहासकार कैसे एक अनूठी कृति रच सकता है। इसकी मिसाल देखनी हो तो नताली डेविस की कृतियों में वह आपको बख़ूबी मिलेगी।
नताली डेविस के कृतित्व से पहली बार परिचय नीलाद्रि भट्टाचार्य की ‘हिस्टॉरिकल मेथड्स’ की कक्षाओं में हुआ था। पहली बार जब नताली की चर्चित किताब ‘द रिटर्न ऑफ़ मार्टिन ग्वेर’ पढ़ी, तो उसने अपने सम्मोहन में बांध लिया।
नताली द्वारा फ़्रांस के गाँव में चले एक मुक़दमे की जटिलताओं का जिस शानदार ढंग से विश्लेषण किया गया है, जिस बारीकी से वे इस मामले के विभिन्न पहलुओं को सामने लाती हैं, विश्लेषण के क्रम में वे इतिहास के जिन औज़ारों का इस्तेमाल करती हैं, वह मेरे जैसे छात्रों के लिए एक सबक़ की तरह था।
वे इस किताब में सोलहवीं सदी के फ्रांस में अस्मिता (किसी दूसरे का रूप और उसका नाम धारण करना), धर्म (कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट के बीच द्वंद्व), सेक्सुअलिटी (नपुंसकता, जायज/नाजायज संबंध), जेंडर (स्त्री और पुरुष की सामाजिक भूमिकाएँ), धार्मिक विश्वास (जादू-टोने में विश्वास), ग्रामीण इलाके और किसानों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी (उनका सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक जीवन), कानून प्रक्रिया (गवाह, दस्तावेज़, साक्ष्य, प्रताड़ना, दंड की प्रकृति, आपराधिक मामले और दंड विधान) आदि से जुड़ी बेहद दिलचस्प तस्वीर हमारे सामने पेश करती हैं।
मार्टिन ग्वेर से जुड़े इस मामले में बर्ट्रान्ड और अर्नाद जैसे सशक्त किरदार के ज़रिए नताली डेविस तत्कालीन फ़्रांस के गाँवों की एक भरा-पूरा इतिहास हमारे सामने रख देती हैं।
मुक़दमे के विवरणों के नए पाठ के ज़रिए नताली इस मामले में बर्ट्रान्ड की एजेंसी को भी स्थापित करती हैं और यह दिखाती हैं कि इस पूरे मामले में बर्ट्रान्ड की केंद्रीय भूमिका थी। और आर्नाद का किरदार तो इस कदर प्रभावी है पूरे आख्यान में कि खुद नताली डेविस अंत में लिखती हैं कि ‘उन्होंने ऐतिहासिक सच को पा लेने की हरसंभव कोशिश की है या कौन जाने शायद इस बार भी आर्नाद ने सबको चकमा दे दिया हो।’
इसके अलावा नताली ने लियो अफ़्रीकानस (हसन अल-वज़न) के जीवन पर ‘ट्रिकस्टर ट्रैवेल्स’ सरीखी किताब लिखी। उन्होंने सोलहवीं सदी के फ़्रांस के सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास, हाशिए की महिलाओं की जीवन पर भी शानदार काम किया। यही नहीं उन्होंने फ़्रांस में उपहारों की संस्कृति का भी इतिहास लिखा।
अपने बेहतरीन अकादमिक जीवन के साथ-साथ वे राजनीतिक मोर्चे पर भी लगातार सक्रिय रहीं। सामाजिक न्याय की लड़ाई हो, सत्ता के दमनकारी रवैये से लड़ने की बात हो, नस्लवाद और रंगभेद के विरुद्ध आवाज़ उठाना हो या फिर समाज-विज्ञान में शोध के लिए संसाधन जुटाने की लड़ाई हो, वे लगातार इन मोर्चों पर सक्रिय रहीं। सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास की इस पुरोधा इतिहासकार को नमन!
शुभनीत कौशिक 

Shubhneet Kaushik

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