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हनुमान पुराण – 18

by Samta Marg
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हनुमान पुराण

हनुमान पुराण – 18

हनुमान पुराण

— विमल कुमार —

हनुमान-  प्रभु! क्या आपको लगता है कि इस बार आप रावण  दहन कर पाएंगे?
राम- क्यों ?तुम आखिर अब इस तरह के सवाल क्यों कर रहे हो? देख नहीं रहे मैं सदियों से रावण का दहन करता रहा हूं ।तब फिर ऐसा प्रश्न क्यों कर रहे हो ?आखिर तुम्हारे मन में यह संशय क्यों है?
 हनुमान- प्रभु! अब जमाना बदल गया है ।रावण भी अब रावण नहीं रहा ।वह बहुत मॉडर्न, हाईटेक तथा बहुत ही शक्तिशाली हो गया है। उसे मारना आसान नहीं है।
राम- हनुमान! तुम आज यह negative बातें ,बहकी बहकी बातें क्यों कर रहे हो?
हनुमान- प्रभु! आज के रावण को पहचानने  की कोशिश कीजिए ।वह आपके युग का रावण नहीं है। अब इस रावण के पीछे पूरी मीडिया है  पूरा तंत्र है चुनाव आयोग है ,अदालत है पुलिस है और कारपोरेट लॉबी है। आखिर आप इस रावण का वध कैसे कर पाएंगे?
राम- मैं तो सीधे रावण की नाभि में तीर मारूंगा और वह सीधे धरती पर धड़ाम से गिर जाएगा।
हनुमान- प्रभु !आप रावण को इतना कमजोर न समझे। अब उसकी जान नाभि  में नहीं बल्कि पूंजीपतियों की नाभि   में है। और आपउनकी  नाभि  को  देख  नहीं सकते । नोटबंदी के बाद सैकड़ो करोड़ के नोट पकड़े जा रहे हैं। ऐसे में आप रावण को कैसे मार पाएंगे ?और अगर आपने ऐसा कुछ किया तो आपके खिलाफ ईडी लग जाएगी ,सीबीआई लग जाएगी और इतना ही नहीं आपके खिलाफ UAPA लगा दिया जाएगा ।इसलिए मुझको लगता नहीं है, आप इस साल रावण का वध कर पाएंगे?
राम- हनुमान !  हिम्मत मत हारो।उम्मीद रखो।हम युद्ध जीतेंगे। क्या तुम इस युद्ध मे मेरा साथ नहीं दोगे?
हनुमान- हे तीनों लोगों के स्वामी! आपके जमाने में रावण चुनाव तो नहीं लड़ता था लेकिन आज के जमाने में रावण जगह-जगह चुनाव लड़ते हैं इसलिए उनका दहन करने  की बजाय चुनाव में हराकर ही उन्हें पराजित किया सकता है।
राम- लेकिन यह तो बहुत मुश्किल काम है आखिर में इतने पैसे कहां से लाऊंगा चुनाव लड़ने के लिए। मेरे पास तो वानरों की फौज है ।क्या चुनाव आयोग उनकी उम्मीदवारी को मान्यता देगा? मुझे तो नहीं लगता कि चुनाव आयोग इन वानरों  को कोई चुनाव चिन्ह भी देगा ।ऐसे में  चुनाव कैसे लड़ सकता हूं ।
हनुमान- यही तो समस्या है महाराज! इस रावण को हराना बहुत मुश्किल है. मुझे लगता है कि आपको लंकापति  के साथ मिलकर  आज के रावण को वध करने के बारे में सोचना होगा ।तभी  संभव है ।
राम-तुमने सही सुझाव दिया है.पवन सुत मैं अब रावण से बात करता हूं।  क्यों न हम दोनों मिलकर आज के इस कलयुगी रावण के खिलाफ लड़ाई लड़े।अच्छा आईडिया दिया तुमने।
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