जेपी व लोहिया की विरासत का वाहक बनता किसान आंदोलन

— डॉ सुनीलम — कल समाजवादी चिंतक और भारतीय समाजवादी आंदोलन के प्रणेता डॉ.राममनोहर लोहिया की 54वीं पुण्यतिथि थी। परसों 11 अक्टूबर को लोकनायक जयप्रकाश...

इस नयी तानाशाही के दौर में जेपी को याद करने के...

— विमल कुमार — आज लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 119वीं जयंती है। अब देश और समाज में उनको लेकर अधिक दिलचस्पी दिखाई नहीं देती, अलबत्ता...

जब राज्य-पोषित हिंसा हो मुकाबिल

— राजू पाण्डेय — लखीमपुर खीरी की घटना एक चेतावनी है- हमारे लोकतंत्र का स्वास्थ्य अच्छा नहीं है। श्री अजय कुमार मिश्र जिनके हिंसा भड़काने...

जी हाँ, हम अंधभक्त हैं, क्योंकि लोहिया की इतिहास दृष्टि कार्ल...

— प्रोफेसर राजकुमार जैन — (तीसरी किस्त) इतिहास चक्र की दुविधा शीर्षक से लोहिया दर्शन की कुछ बुनियादी अवधारणाओं पर सवालिया निशान लगाने का प्रयास भी...

जी हाँ, हम अंधभक्त हैं ; लोहिया और गांधी ; ...

—प्रोफ़ेसर राजकुमार जैन — (दूसरी किस्त) ऐसी ही एक और घटना विश्वयुद्ध के दौरान हुई। गांधीजी का ऑल इंडिया रेडियो पर एक बयान प्रसारित किया गया...

जी हाँ, हम अंधभक्‍त हैं, क्‍योंकि हम वस्‍त्र की तरह विचार...

(पहली किस्त) — प्रोफ़ेसर राजकुमार जैन — फ़िलहाल मुल्‍क की पहली कतार के बुद्धिजीवी किसान नेता, स्‍वराज पार्टी ऑफ इंडिया नामक पार्टी के जन्‍मदाता जिनकी शीरे...

राजनीति निगेटिव चलेगी पर मीडिया पॉजिटिव चाहिए !

— श्रवण गर्ग — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हिंदूवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत के बीच उम्र में एक सप्ताह से...

असम पुलिस फायरिंग : अवैध और अक्षम्य

कानून शायद ही कभी पुलिस को मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए जवाबदेह ठहराता है, लेकिन बल का अत्यधिक उपयोग अभियोजन के लिए दरवाजा खुला...

खबरों का ‘तालिबानीकरण’ यानी प्रतिरोध को नपुंसक बनाने का षड्यंत्र !

— श्रवण गर्ग — देश के नागरिक इस वक्त एक नए प्रकार के ‘ऑक्सीजन’ की कमी के अदृश्य संकट का सामना कर रहे हैं।आश्चर्यजनक यह...

बिहार प्रशासन का एक अनुभव

— अरमान अंसारी — समाजवादी चिंतक किशन पटनायक अपने लेख ‘प्रशासनिक सुधार की चुनौती’ में मध्यकालीन राजा-प्रजा संबंध का उदाहरण देते हुए लिखते हैं :...

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