Home दशा-दिशा राजनीति

राजनीति

today's undeclared emergency

आज का अघोषित आपातकाल – राजकुमार जैन

0
नरेंद्र मोदी सरकार ‌के राज में ‌13 साल से अघोषित‌ आपातकाल चल रहा है, यह कब खत्म होगा‌ इसकी कोई गारंटी नहीं। कांग्रेसी शासन ने आपातकाल लागू किया था परंतु उनका संगठन ‌ ना...
Preparations for the Emergency celebrations

आपातकाल के जश्न की तैयारीयां – प्रोफेसर राजकुमार जैन

0
‌ 25 जून 1975 में ‌ इंदिरा गांधी सरकार ने हिंदुस्तान में आपातकाल घोषित कर नागरिक अधिकारों ‌ पर बंदिश लगा दी थी, 19 महीने में उसको खत्म करने की मुनादी भी । हिंदुस्तान की...
Hindi sahitya

हिंदी साहित्य सम्मान का नाम बदलना साहित्यिक विरासत पर आघात : साहित्यकारों, पत्रकारों और...

0
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार द्वारा हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित सम्मान का नाम बदलकर ‘वीर सावरकर साहित्य सम्मान’ किए जाने के निर्णय को लेकर साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक जगत में तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही...
The brazen slaughter of democracy!

सरेआम‌‌ जम्हूरियत का कत्लेआम! – राजकुमार जैन ‌

0
हर रोज खबरें मिल रही है कि ‌ जत्थे के जत्थे विधायक, लोकसभा के सदस्य अपनी पार्टियों जिसके टिकट पर जीत कर आए थे उसको थता बताकर भाजपा में शामिल हो रहे हैं। बात...
Cockroach Janata Party.

मेरा काक्रोच जनता पार्टी के बारे में कुछ भिन्न मत है – शंभू नाथ

0
1) एक नया, विचित्र और व्यंग्यात्मक चेहरा लेकर उभरी यह पार्टी एक गैर–राजनीतिक उभार है। यह सभी स्थापित राजनीतिक दलों से लोगों की खिन्नता का चिह्न है, खासकर विपक्षी दलों की व्यर्थता और उनका...
CJP

डिजिटल असहमति और युवाओं का ‘कॉकरोच मोर्चा’: जब अपमान ही सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार...

0
— अम्बेदकर कुमार साहु — जब राज्य अपनी नीतिगत विफलताओं को छिपाने के लिए अपने ही नागरिकों के अस्तित्व को कीड़े-मकौड़ों की तरह देखने लगे, तो इतिहास गवाह है कि वही अपमान एक इंकलाब की...
Retired judge's troubles

धर्म और जाति के बीच फँसा न्याय – अमित कोहली

0
आम धारणा है कि अनुसूचित जातियां और जनजातियां कानून, समाज और सरकार की नजर में कमोबेश एक नहीं तो आसपास ही हैं। इसी के चलते बरसों अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग और उनसे जुड़े कानून...

नेहरू के पुण्य स्मरण के बहाने ‘भारतीयता’ की खोज! – श्रवण गर्ग

0
शायद यही सही समय है पूछे जाने का कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आज़ादी के पहले अहमदनगर क़िले के कारावास के दौरान अपनी महान रचना ‘डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’ के ज़रिए...
Failed Experiments in Foreign Policy Through Flattery and Flimflam!

चापलूसी और झूलेबाज़ी के ज़रिए विदेश नीति के असफल प्रयोग ! – श्रवण गर्ग

0
डॉनल्ड ट्रम्प की चीन यात्रा की विफलता के कारणों को लेकर अमेरिकी मीडिया में जो विश्लेषण प्रकाशित हो रहे हैं हमारे लिए इस नज़रिए से चौंकानेवाले हो सकते हैं कि उनके निष्कर्षों को विदेश...

कौन सा विपक्ष, किसका विपक्ष और कैसा विपक्ष?

0
— अरुण कुमार त्रिपाठी — स्वतंत्र भारत के इतिहास में कई बार विपक्ष की स्थिति कमजोर रही है। वह निष्प्रभावी रहा है और वैचारिक और सांगठनिक विखराव का शिकार रहा है। लेकिन जब भी मौका...