भारत में समकालीन युवा आंदोलन: परिवर्तन की राजनीति और राजनीति का परिवर्तन
— Randhir Gautam —
यह संतोष की बात है कि लंबे समय के बाद जन आंदोलनों में युवाओं की भूमिका और महत्त्व को फिर से केंद्रीय स्थान मिला है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1942 के...
बेईमानी में भी ईमानदारी का आभास दिलाने का कुचक्र! – अन्ना दुराई
लगता है आजकल बड़े से बड़े घोटाले भी मात्र हंसी मजाक का विषय बनकर रह गए हैं। जहां देखो, लीपापोती के अलावा कुछ नहीं। कारस्तानियों के पक्ष में तर्क ऐसे ऐसे कि आँख शर्म...
सोनम वांगचुक: सत्य के लिए संघर्ष – डॉ योगेन्द्र
क्या भारत में एक अनशनकारी शहीद हो जायेगा? क्या सरकार अंधी- बहरी हो गई है? क्या शांतिपूर्ण आंदोलन का कोई मतलब नहीं रह जाएगा? बारह- तेरह दिन बीत गये । लद्दाख के सोनम वांगचुक...
शिक्षक और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल!
जाने-माने पर्यावरणविद, शिक्षक और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का आज नवां दिन हैँ। दिल्ली की इस झुलसाने वाली भीषण गर्मी में, लद्दाख के बर्फीले पहाड़ों को छोड़कर आया यह शख्स तड़प रहा...
क्या नेहरू ने सुभाष का साथ छोड़ा था?
— राज गोपाल सिंह बर्मा —
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद और विशेष रूप से बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध से भारतीय सार्वजनिक विमर्श में एक प्रश्न बार-बार उठाया जाता रहा है कि क्या जवाहरलाल नेहरू ने...
धार्मिक आस्थाओं का राजनीतिक अस्थि संचय? – श्रवण गर्ग
जनता इतने आत्मविश्वास के साथ क्यों दावा कर रही है कि रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में हुए चंदे-चढ़ावे के घोटाले में कुछ भी नहीं होगा या कुछ निकलेगा ? असली दोषियों के न कभी नाम...
आज का अघोषित आपातकाल – राजकुमार जैन
नरेंद्र मोदी सरकार के राज में 13 साल से अघोषित आपातकाल चल रहा है, यह कब खत्म होगा इसकी कोई गारंटी नहीं। कांग्रेसी शासन ने आपातकाल लागू किया था परंतु उनका संगठन ना...
आपातकाल के जश्न की तैयारीयां – प्रोफेसर राजकुमार जैन
25 जून 1975 में इंदिरा गांधी सरकार ने हिंदुस्तान में आपातकाल घोषित कर नागरिक अधिकारों पर बंदिश लगा दी थी, 19 महीने में उसको खत्म करने की मुनादी भी । हिंदुस्तान की...
हिंदी साहित्य सम्मान का नाम बदलना साहित्यिक विरासत पर आघात : साहित्यकारों, पत्रकारों और...
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार द्वारा हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित सम्मान का नाम बदलकर ‘वीर सावरकर साहित्य सम्मान’ किए जाने के निर्णय को लेकर साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक जगत में तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही...
सरेआम जम्हूरियत का कत्लेआम! – राजकुमार जैन
हर रोज खबरें मिल रही है कि जत्थे के जत्थे विधायक, लोकसभा के सदस्य अपनी पार्टियों जिसके टिकट पर जीत कर आए थे उसको थता बताकर भाजपा में शामिल हो रहे हैं। बात...
















