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नागरिकों को यह जानने का हक है कि अदालतों में क्या चल रहा है

by Rajendra Rajan
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7 मई। लाइव लॉ की एक खबर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिए अपने एक महत्त्वपूर्ण फैसले में कहा कि अदालती कार्यवाही के दौरान मौखिक टिप्पणियों और जजों तथा वकीलों द्वारा की गई चर्चाओं को रिपोर्ट करने के लिए मीडिया स्वतंत्र है। जस्टिस ‌डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता न्यायिक कार्यवाहियों तक फैली हुई है। पीठ मद्रास उच्च न्यायालय की मौखिक टिप्पणी के खिलाफ चुनाव आयोग द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उस टिप्पणी में कहा गया था कि ‘चुनाव आयोग कोविड की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार है’ और ‘संभवतः हत्या के आरोपों के लिए मामला दर्ज किया जाना चाहिए।’

चुनाव आयोग की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि अदालती सुनवाई के मीडिया कवरेज पर प्रतिबंध लगाने की चुनाव आयोग की प्रार्थना संविधान के तहत गारंटीशुदा दो मूलभूत सिद्धांतों पर प्रहार करती है- खुली अदालती कार्यवाही और बोलने व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार। खुली अदालत की अवधारणा के लिए आवश्यक है कि अदालती कार्यवाही से संबंधित जानकारी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हो।

लाइव लॉ की एक अन्य खबर के मुताबिक चुनाव आयोग के सुप्रीम कोर्ट पैनल के एक वकील मोहित डी. राम ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि उनके मौजूदा मूल्य भारत के चुनाव आयोग की कार्यशैली के अनुरूप नहीं हैं।

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