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उत्तर प्रदेश में ध्रुवीकरण का खतरनाक खेल

by Rajendra Rajan
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— मोहम्मद शोएब, राजीव यादव व संदीप पाण्डेय —

गले साल उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव होने हैं। कोविड के समय कुप्रबंधन, पंचायत चुनावों में करारी हार व राम मंदिर के लिए अयोध्या में भूमि घोटाले से भारतीय जनता पार्टी को अपनी सियासी जमीन खिसकती नजर आ रही थी। अब उसने आंतकवाद के नाम पर राजनीतिक ध्रुवीकरण का पुराना खेल शुरू किया है।

लखनऊ में 11 जुलाई 2021, को आतंकवाद निरोधक दस्ता ने 30 वर्षीय मिनहाज अहमद पुत्र सिराज अहमद को दुबग्गा से व 50 वर्षीय मसीरुद्दीन को मोहिबुल्लापुर से उनके घरों से गिरफ्तार किया। घंटों तलाशी के बाद ऐसा बताया जा रहा है कि दो प्रेशर कुकर बम व एक पिस्तौल मिली। इन्हें अल-कायदा से जुड़े एक संगठन अंसार गजवातुल हिन्द का सदस्य बताया जा रहा है और ऐसी आशंका जतायी गयी है कि स्वतंत्रता दिवस से पहले वे कई शहरों में कुछ बड़ी विस्फोट की घटनाओं को अंजाम देने जा रहे थे। इसी दिन 50 वर्षीय मोहम्मद मुस्तकीम को भी मड़ियांव थाने बुलाकर गिरफ्तार किया गया। 13 जुलाई को न्यू हैदरगंज निवासी 29 वर्षीय मोहम्मद मुईद व जनता नगरी निवासी 27 वर्षीय शकील को भी गिरफ्तार किया गया।

मिनहाज की खदरा में बैटरी की दुकान थी, मसीरुद्दीन व शकील बैटरी रिक्शा चलाते थे, मोहम्मद मुईद जमीन की खरीद-बिक्री का काम करते थे और मोहम्मद मुस्तकीम ठेके पर मजदूर रख छोटे घर बनवाते थे। मसीरुद्दीन, शकील, मोहम्मद मुईद व मोहम्मद मुस्तकीम निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों से हैं।  मसीरुद्दीन व शकील तो रोज कमाने-खाने वाले लोग थे जिन्होंने अपने बैटरी रिक्शों के लिए बैटरी मिनहाज से ली थी।

मोहम्मद मुस्तकीम तो ऐसे फँस गया कि जब आतंकवाद निरोधक दस्ता मसीरुद्दीन को पकड़ने गया तो वह वहां मसीरुद्दीन के घर से सटे उसके भाई का घर बनवा रहा था। पहले सिर्फ उसका मोबाइल फोन व पहचान पत्र लिया गया किंतु बाद में थाने बुलाकर उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया। खास बात यह है कि जबकि बाकी लोगों के घर की तलाशी भी ली गई, मोहम्मद मुस्तकीम के घर की तलाशी नहीं ली गयी।

शकील के भाई इलियास यह पूछते हुए रोने लगते हैं कि पांच-पांच रुपये में सवारियां ढोनेवाला उनका भाई आतंकवादी कैसे हो सकता है? शकील की दो वर्ष पहले शादी हुई है और पत्नी सात माह की गर्भवती है। मोहम्मद मुईद के दो बच्चे हैं, छह  वर्ष का अयान व चार वर्ष का समद और परिवार उनके बड़े भाई के घर में रहता है।

जब हम उनसे बात करने गये तो सारा समय पत्नी उजमा व मां अलीमुन्निसा रोती ही रहीं। मसीरुद्दीन की पत्नी सईदा बताती हैं कि हाल ही में नया कुकर, चूल्हा व प्रेस खरीद कर लायी थीं कि अपनी बेटियों को देने के लिए रखेंगी। आतंकवाद निरोधक दस्ता वाले नया कुकर उठा ले गये। इनका एक अधूरा पड़ा घर है जिसमें टीन की छत है। बैटरी रिक्शा रखने के लिए ठीक से जगह भी नहीं है। इनकी तीन लड़कियां हैं, जैनब, जोया व जेबा, जो लखनऊ इण्टर कालेज, लालबाग में क्रमशः कक्षा 8, 8 व 6 में पढ़ती हैं व एक 4 वर्ष का लड़का मुस्तकीम है।

मसीरुद्दीन रोज सुबह खुद अपनी बच्चियों को विद्यालय पहुंचाते थे और साथ में कुछ और बच्चों को भी अपने रिक्शे पर बैठा लेते थे। हम जब उनके घर पहुंचे तो सईदा ने बताया कि रिक्शा किसी और को किराये पर चलाने के लिए दे दिया है। मोहम्मद मुस्तकीम की पत्नी नसीमा विकलांग हैं व उनके छह बेटियां व एक बेटा है। बेटे की उम्र 6 वर्ष व बेटियों की 8, 10, 15 व 17 वर्ष है। पांचवीं बेटी की शादी हो चुकी है। मिनहाज एक्सॉन इण्टर कालेज, कैम्पबेल रोड से पढ़कर इंटीग्रल विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल में डिप्लोमा किये हुए हैं। उनकी बहन ने लखनऊ विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में एम.एससी की हुई है। पिता सिराज अहमद अपर सांख्यिकी अधिकारी पद से फैजाबाद से सेवानिवृत्त हुए। मिनहाज का डेढ़ वर्ष का एक पुत्र है।

क्या यह सम्भव है कि परिवार में इतने छोटे बच्चों के होते हुए कोई आतंकवाद जैसी गतिविधि में शामिल होने का खतरा उठाएगा?

गिरफ्तारी के बाद मिनहाज व मोहम्मद मुईद के परिवार के लिए आस-पड़ोस से लोग खाना भेज रहे हैं। मोहम्मद मुईद के घर तो आस-पड़ोस के कई हिन्दू-मुस्लिम महिलाएं इकट्ठा हो गयीं और उसके निर्दोष होने की वकालत करने लगीं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि मिनहाज व मोहम्मद मुईद के परिवारों की छवि साफ-सुथरी है। मिनहाज की मां तलत बताती हैं कि उनका लड़का बेटी की तरह उनकी सेवा करता था, जैसे उनके बाल में कंघी करता था और पैरों की मालिश करता था। मोहम्मद मुस्तकीम का परिवार एक किराये के घर में रहता है और उनकी गिरफ्तारी के बाद जिन लोगों के पास उनका बकाया पैसा था वे अब देने से इनकार कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि परिवार आर्थिक तंगी के चलते बकाया पैसे की वापसी का प्रयास कर रहा है।

मसीरुद्दीन व शकील मेहनत करनेवाले इंसान थे और किसी तरह अपने परिवारों का पेट पाल रहे थे। ऐसा नहीं प्रतीत होता कि कोई आतंकवादी संगठन इन परिवारों का आर्थिक पोषण कर रहा है।

कुल मिलाकर ऐसा प्रतीत होता है कि काल्पनिक कहानी के आधार पर कुकर व पिस्तौल की बरामदगी दिखाकर इन उपर्युक्त लोगों को झूठे मामले में फंसा दिया गया है।

इनके खिलाफ मुकदमे में अन्य धाराओं के अलावा विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) की धाराएं भी लगायी गयी हैं जिससे इनकी जमानत मुश्किल से ही होगी।

अंतिम सवाल यह है कि प्रेशर कुकर बम या पिस्तौल से जिस घटना को अंजाम दिया जाना था वह बड़ी आतंकवादी घटना होती या यह है जिसमें पूरे उ.प्र. को आतंकित कर राज्य के ढांचे का इस्तेमाल कर बहुमत न होते हुए भी जिला पंचायत व ब्लॉक पंचायत अध्यक्षों के चुनाव जीते गये हैं? यदि इस देश में इसी तरह से चुनाव होंगे तो बड़ा सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र बचेगा?

सत्तापक्ष के लोग यह कह रहे हैं कि आतंकवादियों का समर्थन करनेवाले लोग सुरक्षा बलों का मनोबल गिरा रहे हैं। सवाल यह है कि अभी जो अभियुक्त हैं उनका आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। आतंकवाद निरोधक दस्ता या संचार माध्यमों द्वारा उनको अभी से आतंकवादी बताना क्या न्यायोचित है?

पिछले कुछ वर्षों में विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमों में मात्र प्रतिशत लोग दोषी पाये गये हैं। यानी आतंकवाद रोकने के लिए बने कानून के तहत ज्यादातर मुकदमे निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज किए जा रहे हैं। यदि शासक दल सुरक्षा बलों का इस्तेमाल राजनीतिक हितों को साधने के लिए करेंगे तो क्या सुरक्षा बलों का मनोबल नहीं गिरेगा?

क्या सुरक्षा बलों से फर्जी गिरफ्तारियां कराकर हम उन्हें भ्रष्ट नहीं बना रहे हैं? यह हमारे लोकतंत्र के संस्थानों व उनमें काम करने वालों की निष्ठा व ईमानदारी के साथ ही खिलवाड़ है।

हाल ही में आतंकवाद निरोधक दस्ता द्वारा लखनऊ में सत्तासीन दल के साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के राजनीतिक एजेण्डे को पूरा करने के लिए निर्दोष लोगों की गिरफ्तारियां की गयी हैं।

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