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जार्ज फर्नांडीज मेरे हीरो से जीरो !

by Samta Marg
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शायद मेरे इस तरह की प्रतिक्रिया से कई समाजवादी साथियों तथा जार्ज साहब को आदर सम्मान करने वाले साथियों की मै सबसे पहले माफी मांगकर मेरी यह बात शुरू करता हूँ !


हालांकि जॉर्ज फर्नाडिस के राजनीतिक पतन का काल 1980 मतलब जनता पार्टी के विघटन के बाद का है ! सबसे हैरानी की बात एक दिन पहलेही मोरारजी देसाई की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ जॉर्ज फर्नाडिस का भाषण जनता पार्टी ने अपने उन्नीस महिने की सरकार मे क्या – क्या उपलब्धियां हासिल की है ! इसका अत्यंत आकड़ों और तथ्यों से भरा हुआ ! और बहुत ही प्रभावशाली भाषण देने वाले जॉर्ज फर्नाडिस !

चौधरी चरण सिंह

चंद मिनटों के भीतर चौधरी चरण सिंह के तरफसे होना ! यही मेरे लिए सबसे पहले जबरदस्त धक्का था !

कभी बडोदा डायनामाईट के समय आपातकाल में ! मै बडोदा में एक बार सानेगुरुजी की भांजी सुधा बोडा के घर पर ठहरा था ! तो उनके पति तुलसीभाई बोडा जो समाजवादी ट्रेडयुनियन का काम बडोदा में करते थे !

तो बातचीत में मुझे बोले कि

कि तुलसीभाई मुझे कोई पंद्रह लाख रुपये (70 के दशक के पहले की बात है !) दे दे तो मैं भारत का प्रधानमंत्री बनकर दिखा दुंगा ! तब मुझे तुलसीभाई बोडा पर मन-ही-मन में बहुत गुस्सा आया था ! और उसके बाद मैं दोबारा उनके घर कभी भी नहीं गया हूँ ! लगा कि समाजवादी लोगों की आपस में ही एक-दुसरे के पैर खिंचने की पुरानी आदत है ! क्योंकि

डॉ. राम मनोहर लोहिया

डॉ. राम मनोहर लोहिया के महिलाओं के साथ संबंधों को लेकर बहुत बडे-बडे समाजवादी लोगों ने मुझे लोहिया के प्रति झुकाव देखकर बताया है ! और मेरे उपर रत्तीभर का परिणाम हुआ नही है ! इसी तरह बडोदा में आपातकाल में तुलसीभाई बोडा की बात को मैंने एक कान से सुना और आज पहली बार किसी सार्वजनिक रूप से उसका उल्लेख करने की एक मात्र वजह की ! अस्सी के बाद जॉर्ज फर्नाडिस के राजनीतिक जीवन का अवलोकन करने से लगता है ! कि तुलसीभाई बोडा को जॉर्ज फर्नाडिस ने कहा होगा !

“कि मेरे पास पंद्रह लाख रुपये हो तो मै भारत का प्रधानमंत्री बन सकता हूँ !”

क्योंकि भारत की राजनीति में कोई भी साधु बनने के लिये नहीं आया है ! कर्नाटक के मुख्यमंत्री के पद को लेकर जो नाटक एक हफ्ते तक चलने का उदाहरण पर्याप्त है !

एस के पाटील


हालांकि मंगलोर के एक धार्मिक ख्रिश्चन घर में 3 जून 1930 को पैदा हुआ लडका उम्र के बीस साल में (1950) मुंबई में नशिब आजमाने के लिए आया ! जॉर्ज फर्नाडिस के शुरू के दिन किसी भी फिल्मों के हिरो से कम कष्टों के नही है ! होटलों में काम करने से लेकर, लेबर यूनियन के अॉफीस के टेबलोपर सोने ! और कुछ दीनो में मुंबई के मज़दूरों के नेता ! और एस के पाटील जैसे कांग्रेस के दिग्गज को 1967 के लोकसभा के चुनाव में जब जॉर्ज फर्नाडिस की उम्र 37 साल की थी ! हराकर लोकसभा में प्रवेश करने की कृती को ! जिसे अंग्रेजी में जॉयंट किलर बोला गया है !


फिर 1974 के मई माह में रेलहडताल के कारण लगभग संपूर्ण भारत ठप्प हो गया था ! और फिर आपातकाल की घोषणा ! और उसमे जॉर्ज फर्नाडिस ने अंडरग्राउंड होकर ! बडोदा डायनामाईट जैसे हरकत से कही कुछ नहीं हुआ ! लेकिन बडोदा डायनामाईट केसमे हमारे जैसे और 25 लोगों को जेल जाने की नौबत आई !

मशहूर अभिनेत्री स्नेहलता रेड्डी

जिसमें कन्नड फिल्म की मशहूर अभिनेत्री स्नेहलता रेड्डी मौत हो गई है ! और जॉर्ज फर्नाडिस को बाद में कलकत्ता में गिरफ्तार कर के पहले फोर्ट विल्यम किले में रखने के बाद ! दिल्ली के तिहाड़ जेल में भयंकर यातनाएं दी गई है ! और उसी कारण मुजफ्फरपुर के लोगों ने जॉर्ज फर्नाडिस जेल में बंद रहते हुए !

सिर्फ उनके हथकडियो के पोस्टरों को बनाकर प्रचार किया और भारी बहुमत से 1977 की लोकसभा में भेजा है ! लेकिन उनके जीवन का आखिरी चुनाव उसी मुजफ्फरपुर से डिपॉजिट जब्त करने की नौबत आना जॉर्ज फर्नाडिस के राजनीतिक जीवन का सबसे पिडादायक दिन है !

बाद में नितिश कुमार को दया आनेपर उन्हें राज्यसभा में भेजना पड़ा लेकिन तबतक उनकी तबीयत खराब होने की शुरुआत हो गई थी ! और जो आदमी हजारों मजदूरों के नाम याद रखता था उसे भुलने की बिमारी से ग्रस्त होते हुए देखना बहुत ही दुखद समय था !

साथियों मै अपनी उम्र के 15 साल पूरे होने के पहले से ही जार्ज साहब को अपने हीरो के रूप में देखना शुरू किया था ! क्योंकि साठ से सत्तर के दशक में मुंबई में उनकी मजदूरों के भीतर चल रही गतिविधियों की खबरें उस समय संपूर्ण महाराष्ट्र के अखबारों में छाई रहती थी ! आज के जैसे हर जीले का संस्करण नहीं था ! मुंबई से छपने वाला अखबार पूरे महाराष्ट्र में जाता था ! अब तो मुंबई की खबर ठाणे के लोगों को पता नहीं चलती है ! यह अखबारों का तथाकथित विकेंद्रीकरण का परिणाम है !

मेरे तथा जार्ज साहब के बीच में लतिफ खाटीक नामके मेरे पुस्तैनी जिले धुलिया के दोस्त थे ! जिन्हें जार्जने मुंबई में पनाह दी थी ! अन्यथा लतिफ धुलिया में एक मराठा दबंग परिवार की लडकी के साथ प्रेम प्रकरण में मारे जाने की संभावना थी ! और इसीलिए वह मुंबई में भागकर आया था ! यह साठ से सत्तर के दशक की बात है ! और वह धुलिया से आने के पहले ही डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों से प्रभावित था ! इसलिए मुंबई आने के बाद उसका जॉर्ज फर्नाडिस के साथ संबंध बन गया था !


लतिफ खाटीक एक हरफनमौला व्यक्तित्व के धनी थे ! ऊसने 70 दशक के शुरूआती दौर में महाराष्ट्र में दलित पैंथर के निर्माण में बहुत अहम भूमिका निभाई थी !

इसलिये वह जार्जके करीबियों में से एक था ! 6 फिट के आस पास की उसकी उँचाई ! ओर कद काठी से मजबूत हस्ता हुआ चेहरा बडाही प्यारा दोस्त था ! जो 20-25 साल पहले से इस दुनिया को छोड़ कर कबका चला गया है !


लेकिन मेरे उम्र के 15-16 साल में ही जार्ज साहब को लतिफ खाटीक के कारण बहुत नजदीक से देखने मीलनेका अवसर मिला था ! उस समय बालासाहब ठाकरे फिनामिना का दूर दूर तक कोई नामों – निशा नहीं था ! जार्ज साहब को मजदूर आंदोलन के मसीहा के रूप में ! और मुंबई के अनभिषिक्त सम्राट !

जिसके एक नारे से पूरी मुंबई में चक्काजाम हो जाता था ! और चक्काजाम शब्द भी जॉर्ज फर्नाडिस की देन थी ! 70-72 की बात है ! लतिफ खाटीक ने वडाला स्थित सिद्धार्थ वसतिगृह पर कब्जा बनाया हुआ था ! और मै दादर स्टेशन पर उतर कर अक्सर वडाला के सिध्दार्थ होस्टल में लतीफ के कमरे में चला जाता था ! वह जगह अनधिकृत दलित पैंथर का अड्डा बना हुआ था ! मेरे लिए रात देर रात कभिभि जाओ ठहरने की खास जगह होती थी ! मेरे अलावा नामदेव ढसाळ तथा रामदास आठवले तथा अन्य पॅंथर के लोगों से पूरा सिध्दार्थ होस्टल खचाखच भरा रहत था !


हालाकि मेरे जानेके बाद अक्सर शुरुआत में ही ! लतिफ खाटीक के मेहमान नवाजी के लिए विशेष रूप से प्रेममयी गालियाँ सुनने के बाद ही वह खातिरदारी करता था ! फिर नामदेव ढसाल,रामदास आठवले तथा अन्य पैंथर भी वही अडडा जमाए रहा करते थे ! अगर मै गलत नहीं हूँ तो लतिफ उनमे उम्र तथा कद काठी से मजबूत था !


72-73 की बात है कि वडाला के होस्टल से चलकर जाने के रास्ते में एक पार्क के मैंदान में जार्ज साहब की एक सभा थी ! लतिफ मुझे वहा पर साथमे लेकर गया ! सभा काफी बडी थी ! और लतिफ हम लोगों को स्टेज की तरफ से उस जगह पर लेकर गया था ! लेकिन इसके बावजूद जार्जने लतिफको देखने के बाद मंच पर से उतर कर आ गये ! इसपर मै समझ गया कि वे लतिफ के काफी करीबी मित्र थे !

लतिफ ने मेरी तरफ इशारा करते हुए मेरा परिचय कराया ! तो जवाब में जार्ज साहब ने मुझे पुछा कितने बार जेल गये हो ? इस सवाल से मैं बहुत नाराज हुआ ! क्या यह एक हायर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थी को क्रांतिकारी हो या नहीं यही परखने के लिए मुझे यह सवाल पूछा गया था ? और मुझे यह सवाल बहुत ही बचकानापन लगा था !


लेकिन दो तीन साल के भीतर ही ! जब आपातकाल में जब मुझे जिंदगी में पहली बार ! जेल की काल कोठरीसे पहले पुलिस हवालातमे दो हप्तेके उपर पुछ-ताछ के लिए बंद कर के रखा था ! वह भी बडौदा डायनामाइट के सिलसिले में रखा था ! और रात को नींद से उठाकर जवाब तलब करते थे ! और कोर्ट में ले जाने के समय हाथों में हथकडिया और दोर पुलिस के हाथ में ! फिर बाथरूम जाने के समय भी वह हथकडिया नही खोलते थे ! और खाना तो हररोज कद्दू की सब्जी और बोरे के बाल मिले हुई रोटीया !

और कस्टडी में अमरावती परिसर के एकसेएक छटे हुए बदमाश ! उस समय जार्ज साहब को ही याद करता था ! सार्वजनिक जीवन में जेल की काल कोठरी से आप का वास्ता नहीं पडा तो आपकी परिक्षा नहीं होगी ! यही उनकी सबसे पहले मुलाकात में मुझे वह सवाल का जवाब मिला !


जॉर्ज फर्नाडिस के साथ दुसरी मुलाकात 1974 के ऐतिहासिक रेल बंद के समय ! दो जगह पर मीले ! पहली मुलाकात दादर के वनमाली हाल की 74 के रेल बंद को सफल करने के लिए एक पूर्व तैयारी बैठक थी ! जिसमें जार्ज साहब की सभी यूनियन के मुख्य नेताओं को विशेष रूप से बुलाया गया था ! और वह बैठक कमसे कम 6 घंटे से भी अधिक समय चली ! जिसमें हर एक व्यक्ता अपने ढंग से तबियत से बोला करते जा रहे थे !

लेकिन जहां तक अध्यक्ष पद पर बैठे हुए जार्ज साहब को मैंने एक बार भी किसी वक्ता को टोका टोकी करते हुए नहीं देखा ! हर वक्ता चाहे उतना बोलता था ! और जार्ज साहब अपने दोनो हाथोंकी कोहनियो को मोडकर उसपर अपनी गर्दन रखकर टेबलपर बाकायदा सो जाते थे ! और सभी वक्ता जब तक आपनी बात पूरी तरह से खत्म नहीं किये तबतक ओ अपनी जगह वैसेही बने रहते थे !


मेरी जिंदगी की यह पहली सभा होगी जिसमें जार्ज साहब को बडे ही सबुरी से हर वक्ता चाहे उतना बोलता था ! और जार्ज साहब अपने दोनो हाथोंकी कोहनीयो को टेबलपर मोडकर आपनी गर्दन रखकर बाकायदा सो जाते थे ! और सभी साथियों को मन माफिक बोलने देते थे ! बादमे जब अध्यक्ष के भाषण को शुरू किया ! तो वह भी 4 घंटे से ज्यादा ही बोले !

मैंने देखा उनका भाषण इतना ओज से ओतप्रोत था ! की पुरी सभा चार्ज हो गई थी ! मुख्य रूप से 1974 के रेल बंद को सफल करने के लिये तोड फोड भी करना पडा तो करेंगे ! मशहूर चक्का जाम यह शब्द पहली बार सुना !

जार्ज साहब ने बहुत जोर जोर से कहा कि कलका बंद को करने के लिए जरूरी पडा तो मै खुद अपने हाथमे दंडा लेकर रोड़ पर जो भी वाहन चलेगा मै खुद अपने हाथ से डंडा लेकर उसके काँच तोडुंगा ! और जरूरत पडी तो बस के पहिए की हवा भी निकाल दूंगा ! लेकिन हर हाल में बंद सफल करने के लिए सभी साथियों को एकजुट होकर बंद को सफल करना है !


सभा के बाद जॉर्ज फर्नाडिस और लतिफ खाटीक के साथ किसी होटल मे चाय के लिए हम लोग बैठे ! तो मै अपने सेवा दलके आदर्श के अनुसार उन्हें पूछा कि

उन्होंने तपाकसे जवाब दिया

मेरी याद दास्त ठीक है तो हम जब बात कर रहे थे ! वे उस समय बिहार से बांका से लोक सभा के लिए चुने गए थे ! तो मैने उनसे पूछा कि आप बिहार में बूथ कैप्चर करते हैं ?

तो उन्होंने तपाकसे जवाब दिया बिलकुल करेंगे ! बिहार में आगर राजनीति करना है ! तो हमारे विरोधी अगर यह सब हथकण्डे अपनाएंगे तो हम टिक नहीं पायेगे !

यह संवाद आपातकाल की घोषणा के एक साल पहले का है ! मतलब आजसे पचास साल पहले और हमारे आजादी पच्चिस साल पुरे होने के बाद का है !


फिर तीसरी भेंट, आपातकाल में माहीम वडाला के रूईया कोलिज के पास प्रोफेसर पुष्पा भावे और उनके पति अनंत भावेके घरमें ! सुबह-सुबह 4-5 बजे से रात के 10-11 बजे तक ! लगभग 16-17 घंटे बडौदा डायनामाइट के षडयंत्र पर लगा-तार बहस चली !


उस बैठक का मै सबसे कम उम्र का सदस्य था ! उम्र 23 साल ! राष्ट्र सेवा दलका पूर्ण समय कार्यकर्ता था ! और मुझे अमरावती से विशेष रूप से बुलाया गया था ! ( 1973-76 ) मै राष्ट्र सेवा दल का होने के बावजूद ! मैं दलित पैंथर से लेकर तरूण शांती सेना,युवक क्रांती दल, मागोवा इ, संघठनोके साथ भी संबंध रखता था ! क्योंकि मैं अपनी तरह से अध्ययन करने के बाद, इस नतीजे पर पहुंचा था !

और इसलिए उदारमन से सभी परिवर्तन कारी समुहो के प्रति मेरी गहरी रुचि थी !


इसीलिए गुरिल्ला युद्ध, मुख्य रूप से साठ से सत्तर के दशक में कुछ हो चुके थे ! और कुछ हो रहे थे ! उदाहरण के लिए लॅटिन अमेरिका कयूबा,चिली,वियतनाम, चीनी क्रांति के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी थी ! इसीलिए पुरी बैठक में शामिल लोगों में से एक मै ही था !

गुरिल्ला वॉरफेअर के बारे मे कुछ जानकारी थी ! इसलिये मै भारत जैसे विशाल देश में यह बहुत असरदार नहीं हो सकता ! यह बात जोर शोर से कर रहा था ! क्योंकि दूसरी क्रांतियाँ हुई उन देशों की सामाजिक – सांस्कृतियोमे और भूगोल में जमिन आसमान का फर्क है !

कही कि भी नकल करना युद्धशास्त्र के विपरित होगी ! मै आपात्काल के खिलाफ हूँ ! पर डायनामाइट की कोशिश करना शुद्ध हाराकिरी होगा ! यही बात मै पूरी बैठक में लगातार कीया था ! और जॉर्ज फर्नाडिस मैंने भारत के सेना में बात की है ! कहा करते थे ! तो मैंने पुछा सेना मतलब एकाध अफसर से ? वह भी कोई मेजर या कर्नल इससे आगे नही !


भारत की सेना पहले से ही तीन दलों में विभाजित है ! और सेना के छ कमांड है ! आप के किसी भी एक अफसर की बातचीत का कोई मतलब नहीं है ! यह बंगला देश नही है ! कि एक कर्नल के आगुआई में शेख मुजबुर रहमान और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या करने से तख्ता पलट हो गया है ! बंगला देश भारत के एक राज्य के जैसा है ! भारत में ऐसे पच्चीस से अधिक बंगला देश है ! आप कहाँ – कहाँ इस तरह की हरकतों से तख्ता पलट कर सकते ?

शेख मुजबुर रहमान


दुसरी तरफ इंदिरा गाँधी ने सेंसरशिप के कारण अखबारों के उपर काफी पाबंदियां लगा रखी है ! इस कारणवश यहा की खबर बगल के केंद्र के पास नहीं जा पाती है ! अपने कारनामों से कुछ भी हंगामा हुआ नहीं है ! इसलिये यह हमारी हाराकिरी के सिवा और कुछ नहीं हो सकता !


और मुख्य बात इतिहास बार – बार दोहराया नहीं जाता 1942 अभी 1976 मे नकल करना हर तरह से गलत है ! एखाद पुलिया या पोस्ट ऑफिस उडाने से कुछ भी नहीं हो सकता है ! इसलिये हम लोग आपात्काल के खिलाफ कुछ और करेंगे ! जिससे आपकी बात जनता तक पहुंचाने के लिए विशेष रूप से गंभीर और पुख्ता प्रयास करना चाहिए !


भारत बहुत बडा देश है ! गुरिल्ला युद्ध के मुख्य देश हमारे किसी राज्य से भी छोटे है ! भारतीय आर्म फोर्स छ कमाण्डो में विभाजित किया है ! इसलिये हम किसी एक मेजर या कर्नल के भरोसे कू करने की कोशिश भी बेकार जायेगी ! हमारी सेना के पहले से ही तीन वायु सेना, जल सेना, और थल सेना पूरे अलग अलग इकाई में बने रहने के कारण !

इनके बीच मेंसे एखाद दुसरा ऑफिसर ने अपने को मदद की तो भी नतिजनबंगाला देश की नकल भारत में करना गलत है ! इस तरह 15-16 घंटे की बातचित करके, मै मुंबई से अमरावती वापस तो आया ! पर पुलिसको कुछ भनक लग गई थी ! इसीलिए मै जल्द ही पकडा गया ! और उधर जॉर्ज फर्नाडिस भी ! पहले दो हप्ता पुलिस कस्टडी में पुछ ताछ के लिए रखा था ! और बाद में जेल की काल कोठरी में ! वह भी जेल की जेल में रखा था !

और आरोप लगाया कि !

“मैं भारत सरकार को गुप्त षडयंत्र करके उखाड़ फेंकने के षडयंत्र में शामिल था ! और जार्ज साहब अपने पादरी के भेष में कलकत्ता के सेंट कॅथेड्रांल चर्च जो विक्टोरिया मेमोरियल के सामने है ! मे पकडे गये थे !
1977 मे जनता पार्टी की सरकार बनने का नजारा नजदीक से देखने मीलनेका अवसर मिला ! उस समय मैं अपने एक दोस्त के साथ खास दिल्ली हप्ता दस दिन रहकर जनता सरकार का निर्माण देखा ! सोशलिस्ट पार्टी के जनता पार्टी में विलय भी ! विठ्ठल भाई पटेल हाऊस के प्रांगण में शामिल होने का मौका आचार्य केलकर जिके साथ ! वैसाही प्रगति मैदान पर जनता पार्टी की स्थापना समारोह का भी साक्षी हूँ ! मई 1977 !


जार्ज साहब नये मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हो रहें थे ! तो लोग उनका घेराओ करा कर बडी मुश्किल से वे मोरारजी देसाई के मंत्रिमंडल में उद्योग मंत्री बने ! लेकिन 19 महीनों के भीतर जेपी की भाषा में चमन मेरा उजड गया ! चमन के समर्थन में जार्ज साहब ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ जबरदस्त भाषण दिया था ! और जार्ज साहब ने दुसरे दिन सुबह सुबह जिस पार्टी की वकालत की थी ! उसके खिलाफ दुसरे दिन जाकर सरकार को गिरा दिया ! यह मेरी जार्ज साहब से मोहभंग होनेकी पहली शुरुआत थी !


दोहरी सदस्यता की बात मधू लिमये उठा रहे थे ! और जॉर्ज फर्नाडिस ने उन्हें समर्थन दिया ! 1982 में मधूजी ने सक्रिय राजनीति से सन्यास ले लिया था ! लेकिन उसके बाद जॉर्ज फर्नाडिस आवारा होकर पहले लालू प्रसाद यादव से ! और अंत में नितिश कुमार से भी ! गैरमामुली बातो पर अलग होने की दोबारा गलती की है ! और एनडीए के संयोजक बनना यह उनके राजनीतिक आत्महत्या की शवपेटी पर एक किला ठोका गया ! और फिर गुजरात दंगे का समर्थन ! और कंधमाल के फादर ग्रॅहम स्टेन्स और उनके दोनों बच्चों की जलाने की घटना को क्लिनचिट देना !

डॉ राम मनोहर लोहिया, मणि राम बागरी, मधु लिमये, एसएम जोशी। 

यह आखिरी किले ठोक ली है ! इसके विपरीत जिस मधू लिमये और जॉर्ज फर्नाडिस की अर्धशतक की मैत्री रहने के बावजूद ! और मधू लिमये का जन्म कोकणस्थ ब्राह्मण जाती में होने के बावजूद ! संघ के एकचालकानुवर्त और बीजेपी संघ की राजनीतिक इकाई है ! और इस कारण बीजेपी कभी भी मध्यममार्गी पार्टी नही बन सकती है ! और संघ की कुंडली फासीस्ट और एकचालकानुवर्त के सिद्धांत पर चलने वाले संघठन होने की बात !

नई दिल्ली में मोरारजी देसाई (बीच में) और जॉर्ज फर्नांडीस (सबसे बाएं) के साथ बीजू पटनायक की 1977 की एक तस्वीर

सरदार पटेल, डॉ. राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण और जॉर्ज फर्नाडिस समझने में भूल कर गए ! (और बीजेपी कभी भी अस्वायत्त मतलब नॉन अॅटोनॉमस कॅरेक्टर – दल नही बन सकता ! कठपुतलियों के जैसे पूर्णतः संघके निर्देशों पर अपनी नितिनिर्धारण और कृति करने वाले दल की स्थिति ) डॉ. राममनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण की समझ में नहीं आया यह मै 1977 के सितम्बर माह में जयप्रकाश नारायण ने पटना में संघ के तत्कालीन प्रमुख बालासाहब देवरस को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को विसर्जित करने की बात कही थी तो उन्होंने कडवा सा मुंह बनाकर जयप्रकाश नारायण की सुचना को तत्काल अस्वीकार कर दिया था !


और मेरा आरोप है कि यह सब कुछ घटनाओं की जानकारी जॉर्ज फर्नाडिस को अच्छी तरह से मालूम रहते हुए ! उन्होंने बीजेपी के साथ अपनी क्षुद्र राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए समझौते किए ! और अपनी राजनीतिक आत्महत्या कर ली ! और मैंने कहा भी था कि संघ ने अब आपको अपने संघठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का बौद्धिक प्रमुख बना देना चाहिए क्योंकि आप उनके घोर सांप्रदायिकता को नजरअंदाज कर के जिस तरह उनके साथ हो गए हो और उनके तरफसे बोल रहे हो !

यह देखकर मै कह रहा हूँ ! नई आर्थिक निति के खिलाफ संघने स्वदेशी जागरण मंच बनाकर विरोध करने का नाटक किया था और यह समझने के लिए जॉर्ज फर्नाडिस जैसे आदमी की भूल होने की बात मुझे स्विकार नहीं है ! क्योंकि कोंकण क्षेत्र में दाभोल नामकी जगह पर एनरॉन के खिलाफ आंदोलन में स्वदेशी जागरण मंच और हम लोग साथ मे ही थे और उसी समय मुझे पार्लमेंट अनेक्स बिल्डिंग में प्रमोद महाजन मिल गए और पुछा की कैसे आना हुआ तो मैंने कहा कि एनरॉन प्रोजेक्ट नहीं होना चाहिए इस संबंध में एक बैठक में आया हूँ !

प्रमोद महाजन

तो प्रमोद महाजन ने धीरे से मेरे कानों में कहा कि एनरॉन जैसी सोने के अंडा देनेवाली परियोजना को कोई भी दल की सरकार बंद नहीं करेगा तो मैंने कहा कि तुम्हारी स्वदेशी जागरण मंच भी तो एनरॉन के खिलाफ आंदोलन में हमारे साथ शामिल है ! तो प्रमोद महाजन ने हसते हुए कहा कि सुरेश राजनीति में सांप और नेवला साथ-साथ रखने पडते है ! मतलब स्वदेशी जागरण मंच कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाने के लिए एक मुखौटा के रूप में तैयार किया गया था ! आज स्वदेशी जागरण मंच का नाम कही सुनने या देखने में आ रहा है ?

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ प्रमोद महाजन


बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव जी का और जार्ज साहब का आपसी मतभेद के कारण ! उन्होनें समता पार्टी का गठन करके अलग राह पर जो चलना शुरू किया ! वह उनके राजनीतिक आत्म हत्या की शुरुआत हुई हैं ! और उत्तर भारत में संघ परिवार तथा उनकेही पेटसे निकली हुई बीजेपी के लिए लानचिग पॅड बनाने का मार्ग उन्होंने प्रशस्त किया ! और बादमे तो एन डी ए के संयोजक बने ! जय्म्मा से लेकर ममताजी को मानमुनौअल करने के लिए वे ही दौड धूप करते थे ! और तो और गुजरात का नरसंहार तथा ओरिसा के कंधमाल की हिँसा का समर्थन भरी लोकसभा में किया था !


आजकल अंधभक यह शब्द बार – बार उछाला जा रहा है ! क्या हमारे मे से कुछ लोग भी अंध भक्त नही है ? जब जॉर्ज फर्नाडिस जैसे सबसे जुझारू समाजवादी एनडीए के चेयरमैन बनते है ! और तो और गुजरात दंगों के समर्थन में लोकसभा में भाषण देते हुए कहें है !

“कि कौन से सरकारो के समय दंगे नही हुए ?” “और कौन-से दंगे में हत्या या बलात्कार नहीं हुए ?”


1980 में मधू लिमये के साथ दोहरी सदस्यता के मुद्दे पर जनता पार्टी से अलग हुए जॉर्ज फर्नाडिस ! और अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में एनडीए के संयोजक बनने की बात हमारे समाजवादी मित्रो के गले कैसी उतर सकती है ?

मेरी यही राय है कि अंध भक्त सिर्फ नरेंद्र मोदीजी के नही है ! हमारे अपने भी लोगों की ऐतिहासिक गलतीयो को देखते हुए ! जिस कारण समाजवादी आंदोलन को खत्म करने जैसे गुनाहगारों में जॉर्ज फर्नाडिस की भूमिका को नजरअंदाज करना भी अंधभक्ती है ! क्योंकि मेरे इस लेख को लेकर हमारे अपने ही मित्रों को बहुत नागवार गुजरेगा इसकी मुझे कल्पना है ! तो भी मैं यह साहस कर रहा हूँ !

इन्द्र कुमार गुजराल


उसी दरम्यान मॅडम खैरनार की केन्द्रीय विद्यालय फोर्ट विलियम कलकत्ता से कलकत्ता के ही बालीगंज के विद्यालय में बदली की गई थी ! उसका मुख्य कारण फोर्ट विलियम विद्यालय की एक बिल्डिंग के निर्माण में कुछ दोष था ! जीसे मॅडम खैरनार ने बिल्डर से लेने के लिए मना कर दिया ! बिल्डर डिफेन्स में काफी पूराना कॉन्ट्रैक्टर होने के कारण, काफी बडा रसूखदारों में से एक था ! और उसने अपने रसूख का इस्तेमाल किया ! और कलकत्ता के ही बालीगंज के विद्यालय में बदली की गई थी !

उसका विरोध करने हेतु मै दिल्ली के लिए मई में 1997 की बात है ! इन्द्र कुमार गुजराल की सरकार थी ! इसलिये मुझे थोड़ा आत्म विश्वास था ! कि एम. एन. राय के भक्त एस. आर. बोम्मइ एच. आर. डी. मिनिस्ट्री देख रहे थे ! शायद कुछ न्याय मीलनेका अवसर है !


उस समय दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षण विभाग के डॉ. अनिल सदगोपाल जी मेरे अजीज मित्र थे !

वे उस समय मुझे बोले

“अरे भई वर्तमान मंत्रिमंडलमे आपके इतने सारे मित्र है ! लेकिन आपके ज्यादा करीबियों मे जॉर्ज फर्नांडीजजी का शुमार होता है !”

वे खुद जॉर्ज फर्नांडीज जी के घर पर ले गये ! उसी दिन मुम्बई के महालक्ष्मी रेसकोर्स पर बीजेपी का महाधिवेशन हो रहा था ! और जार्ज साहब के प्रतिनिधि के बतौर जया जेटली और नीतीश कुमार को भेजा गया था ! मैं मैडम खैरनार की बदलीकी बात छोडकर ! सीधा जया जेटली और नीतीश कुमार को आपने मुम्बई के बीजेपी के महाअधिवेशन में क्यो भेजा ? इस सवाल से अपना वार्तालाप शुरू किया ?

तो वे बोले

“यह राजनैतिक पार्टी यो में एक दूसरे के अधिवेशन के लिए जाना परंपरा है !” “इसलिये जया को और नितीश कुमार को मैने समता पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में भेजा है !”

मैने तपाकसे कहा “राजनैतिक परंपराएं तो मै आपहिसे सीखा हूँ ! सोशलिस्ट इन्टरनेशनल में शामिल होने के लिए, सोशलिस्ट पार्टी के दूनियाँ भरके सोशलिस्ट जाते है ! वैसे ही कमुनिस्ट इंन्टरनेशनल में शामिल होने कमुनिस्ट जाते हैं ! यह बीजेपी इन्टरनेशनल के पार्ट आपकी समता पार्टी कबसे हो गई ?


जॉर्ज साहब आप सोशल डेमोक्रेट है ! लेकिन आपमे डेमोक्रेसी का अंश नहीं है ! इसलिये लालूप्रसाद यादव जो आप सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर थे ! उस समय लालूप्रसाद यादव पटना यूनिवर्सिटी यूनियन के अध्यक्ष थे ! आज समय बदल गया है ! वर्तमान स्थिति में ड़ॉ. राम मनोहर लोहिया के सौमे पावे पिछड़ा साठ वाले सिद्दांत के कारण ! आज वे बिहार के पिछड़े वर्ग के नेता के रूप में उभरकर सामने आये हैं ! जो आपके गले नहीं उतर रहे हैं ! और इसीलिए आप इर्ष्या में समता पार्टी का गठन करने की गलती की है ! जिससे बीजेपी के लिए मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं !

जीस बीजेपी को इतनी रथ यात्राये नीकाल नेके बावजूद देशके लोगों ने स्वीकारा नही है ! जेपीजीने 74 मे “संघ फासिस्ट है ! तो मै भि फासिस्ट हूँ !” यह गांधीजी की हत्या के आरोप के कारण उन्हें जन समर्थन नही मिल रहा था ! लेकिन एक गलती जेपी ने करने के बाद आप दुसरी गलती कर रहे हो ! इसमे आप राजनैतिक आत्महत्या पर तुले हुए हैं !

क्योंकि संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के 1963 के कलकत्ता अधिवेशन में आपही ने शामिल होकर डॉ. राम मनोहर लोहिया के गैरकांग्रेसी सिद्धांत का जमकर विरोध किया था ! और अभी आप भी कांग्रेस मुक्त भारत बोलने वाले बीजेपी के अधिवेशन में जया जेटली तथा नीतीश कुमार को मुम्बई भेजना आपका निर्णय संघ परिवार को उत्तर भारत में बढानेमें मददगार साबित हो सकता है ! इसलिये मै आपका मुरीद हूँ ! मेहरबानी करके इस तरह की राजनीति मत कीजिये !


क्योकी हम लोग आपातकाल के समय जेलों में थे ! तो एस. एम. जोशी जी जेपिके आदेश पर हम सभी साथियों को जनता पार्टी के गठन पर राय जानने हेतू मीलनेका अवसर मिला ! उस समय मैने एस्सेम जीको साफ शब्दों में “जनसंघ जैसे घोर सांमप्रदायीक तथा पूँजीवादी पार्टी के साथ पार्टी बनाने का फैसला आत्मघाती होगा !

बहुत हूआ तो चुनावी गठजोड़ कर सकते ! पर एक पार्टी समाजवादी पार्टी के लिए बहुत घाटेका निर्णय होगा ! तो एस्सेम ने कहा कि ” मै अभि अभि तिहाड जेल में और नरसिंहगढ़ जेल में जार्ज फर्नाडिस और मधु लिमये जी को मिलकर आ रहा हूँ ! और जार्ज, मधू लिमये का भी यही कहना है !

मैंने एस. एम. जोशी जी को कहा ! “कि मुझे खुशी है ! कि मेरेसे डबल उम्र के मेरे मास्टर जॉर्ज फर्नांडीज और मधू लिमये की भी अगर यही राय है ! तो मेरी सोच को मान्यता मिल चुकी है ! इसलिये मुझे बहुत खुशी हो रही है !”


यह सब जनता पार्टी बनने के पहले आपका मत था ! तो अभी आपको क्या हो गया है ? की आप जाने अनजाने बीजेपी के लिए मार्ग प्रशस्त कर करने जा रहे हैं !

यह मै इस मुद्दे को लेकर कुछ काम करने की कोशिश कर रहा हूँ ! लेकिन आपके इस विषयपर जो धाराप्रवाह भाषण को मैंने कितनी बार सुना है ! इसका कोई हिसाब नहीं है ! यह बात 1997 मई के महीने की है !


बादमे 2002 गुजरात दंगों से लेकर कंधमाल ओरिसा के फादर ग्राहम स्टेन और उनके दो बच्चे जलानेका मामला है ! और मेरे कीसी समयके हिरो इन सब सवालो पर एन डी ए के कन्विनर की हैसियत से समर्थन करते हुए देखकर ! लगता है कि यह जॉर्ज फर्नांडीज की राजनीतिक आत्महत्या है !


बादमे वे बाथरूम में गिरनेके कारण अल्जाइमर रोग के शिकार हो गये ! वे अपने आपको भी नहीं पहचान पाते थे ! आखिरी सांस 29 जनवरी 2019 को ली ! और उन्हें पीडा से मुक्ति भी मिली ! मै राष्ट्र सेवा दलके तरफ से विनम्र अभिवादन करता हूँ ! और जार्ज साहब अब एक किव्दंती के रुपमे हमेशा हमेशा याद कीये जायेंगें !


हालाकी वे एक तरह से संघ परिवार के बौद्धिक प्रमुख जैसी भूमिका निभाने के लिए तैयार हो गये थे ! लेकिन राष्ट्र सेवा दलकी अहमियत समझने वाले लोगों में से भि प्रमुख लोगों मेसे एक थे !

विरोधाभास देखीये राष्ट्र सेवा दलका निर्माण संघ को रोकने के लिए सेवा दलके सस्थापकोने 4 जून 1941 मे किया है ! इसलिये मैंने व्यक्तिगत स्तर पर जॉर्ज फर्नांडीज के इस वैचारिक पतन को कभी माफ नहीं किया है ! इसलिये मै 1997 के मई में उनसे डॉ. अनिल सदगोपाल जी के साथ अन्तिम बार मिला था !

उसके बाद उनके लंम्बे समय तक स्वीय सहायक अनिल हेगड़े दिल्ली मे कभी-कभी मिला करते थे ! तो उनका हाल बातया करते थे ! लेकिन मुझे उनसे मिलने का कभी-कभी मन तो करता था ! पर मित्रोसे सुनता था कि “वे खुद जॉर्ज फर्नांडीज है !

यह भी मालुम नहीं है ! तो आपकी हमारी बातही क्या है ?”


वैसे हम समाजवादी नियति वगैरा नही मानते हैं ! पर जॉर्ज जैसे शार्प मेमरी वाले नेताको हजारों-हजार लोगोंके नाम याद रहते थे ! दस भाषाओं में आसानी से बातचीत करते थे ! वे जीवन के आखिरी दस साल से भी अधिक समय गर्दिश की जींदगी जिनेके लिए मजबुर हो जाय कही कालने अपना बदला तो नही लिया ?


डॉ. सुरेश खैरनार

डॉ. सुरेश खैरनार

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