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लोकतंत्र और संविधान विरोधी कुकर्मो

by Samta Marg
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अपने लोकतंत्र और संविधान विरोधी कुकर्मो का ठीकरा कांग्रेस के सर पर फोड़ना, आरएसएस और उसके सिखाए मोदीमुखी हुक्मरानों के चरित्रहीन किरदार की मुख्य पहचान बन चुकी है!

आरएसएस के कट्टर स्वयंसेवक के रूप में, पूर्ण प्रशिक्षित और संस्कारित होकर,प्रधानमंत्री पद की गरिमा को कलंकित करने का विश्व कीर्तिमान रचने वाले हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने अपने दस वर्षीय कार्यकाल में जितने झूठ बोले हैं, उन्हें कोई शोधार्थी अगर संकलित करके प्रकाशित करे तो उसे भी गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में, सबसे ऊपर जगह मिल जाएगी।

   मैं तो उनमें से एक खास नमूने का ही उल्लेख कर रहा हूँ।

आज से पांच साल पहले, अलवर की आम सभा में , मोदीजी ने ये सफेद झूठ बोला था कि, 

      जबकि सच तो, मोदीजी के इस झूठ के सरासर विपरीत, ये है कि,जजों को खुल्लमखुल्ला धमकाने का काम , आरएसएस परिवार से जुड़े बीजेपी, विहिप और अन्य तथाकथित साधु संत ही,ये कहकर कर रहे हैं  कि,

              25 नवंबर 2018 को विश्व हिंदू परिषद ने नागपुर में हुंकार रैली भी की थी जिसे संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने ये कहकर अदालत पर दबाव भी बनाया था कि,’न्यायपूर्ण बात यही है कि अब धैर्य नहीं निर्णायक आंदोलन का वख्त है क्योंकि – मंदिर जल्द बने-यह इच्छा कोर्ट की प्राथमिकता में नहीं है’।

       इसके पहले भी, सबरीमाला मंदिर में हरेक उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले अदालत के फैसले के खिलाफ, अदालत को भागवत ये धमकी दे चुके हैं कि ‘हिंदुओं की आस्थाओं के खिलाफ अदालतों को फैसले नहीं देना चाहिए वरना इसी तरह से अदालत के फैसलों का उल्लंघन तो होगा ही।’

सर्वोच्च अदालत को दी गई ऐसी ही धमकियों और भय दोहन के अन्य तरीकों के परिणामस्वरूप ही, अयोध्या में राममंदिर निर्माण को अवैध रूप से हरी झंडी दिखाने वाला फैसला पारित हो गया, फैसला देने वाले पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, रिटायर होते ही राज्यसभा सांसद के रूप में, राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत कर दिये गए और सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेशाधिकार देने वाले फैसले के विरुद्ध दायर पुनर्विचार याचिका इतने सालों से ठंडे बस्ते में डली हुई है।

     आरएसएस धीरे धीरे तो,शुरू से ही भारत के संविधान और संघात्मक ढांचे को नष्ट करके, अपने ‘हिन्दूराष्ट्र’के सपने को साकार करने के लिए, एकात्मक शासन की स्थापना की दिशा में माहौल बना ही रहा था लेकिन अब, जब मुल्क के अधिकांश राज्यों सहित केंद्र में आरएसएस/बीजेपी की पूर्ण बहुमत वाली सरकारें बन चुकी हैं, संघ इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

      अपने लक्ष्य को पाने के लिए इन्हें झूठ पर झूठ, संगठित रूप से बोलने वाले ‘चरित्र’ के संस्कारों से संस्कारित भी किया जा चुका है।

     चुनावी सभाओं में जनता से किये जाने वाले वादों को, सत्ता मिलते ही, जुमलेबाजी बताकर जनता से विश्वासघात करने में , इन्हें जरा सी भी लाज नहीं आती।

     भारत के लोकतांत्रिक संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेकर संविधान के जीवनमूल्यों की ही हत्या करने वाले इन हुक्मरानों के लिए याद आ रहा है दुष्यंत का ये शेर कि:-

तुम्हीं से प्यार जताएं, तुम्हीं को खा जाएं!
अदीब, यूँ तो सियासी हैं मगर कमीन नहीं!

विनोद कोचर

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