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ट्रम्पनामा-USA की चुनाव पद्धति को भी PR में  बदलने की जरूरत है०

by Samta Marg
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 बहुत सारे प्रबुद्ध लोग भारत के लोकतन्त्र मे कई कमजोरियों और खराबियों के अब उजागर होने के वजह से चिंतित हैं० भारत द्वारा आनुपातिक चुनाव प्रणाली (Proportional Representation System) अपना लेने से आधी प्रमुख कमजोरियाँ और आसन्न खतरे दूर हो जाएंगे० ऐसा विश्वास उन नब्बे (90) देशों के प्रदर्शन से मिलता है, जिन्होंने PR अपना लिया है- अपनी पुरानी चुनाव प्रणाली को बदल कर० इन देशों की लिस्ट नीचे reference मे देखें० दो बड़े ताकतवर देशों USA और UK ने PR नहीं अपनाया है० उनकी वजह से भारत मे PR का आकर्षण नहीं है० 

USA के संवैधानिक इतिहास को देखें० 
साल 1775-80  मे  UK से लड़कर  USA आजाद हुआ था और उसका संविधान लिखा गया था० उस समय USA की आबादी केवल 25 लाख थी- आज के एक बड़े शहर के बराबर०
वैसी हालत मे USA के संविधान ने हरेक नागरिक के वोट से सीधे चुने राष्ट्रपति- (एक व्यक्ति मात्र)  को शासन चलाने के सारे अधिकार दिए थे०  
अब USA की आबादी 33 (तैंतीस) करोड़ है ० अब राष्ट्रपति शासन को रखना गलत और अलोकतान्त्रिक है०  उसी संवैधानिक कमजोरी की वजह से USA मे लोकतन्त्र खत्म होने का खतरा गहरा रहा है० डोनाल्ड ट्रम्प के मामले को ऐसे समझना चाहिए०
USA को अविलंब Proportional Representation (PR) द्वारा चुनी  गई  संसदीय प्रणाली (Parliamentary System) अपना लेना चाहिए०  तभी वहाँ स्थायी और अच्छा लोकतन्त्र बना रहेगा०
USA के राज्यों के गवर्नर की प्रणाली को भी PR मे बदलना जरूरी है०

डॉ. चन्द्र भूषण चौधरी

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