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राजनीति अल्पकालिक धर्म है ! और धर्म दिर्घकाल की राजनीति !

by Samta Marg
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राजनीति अल्पकालिक धर्म है ! और धर्म दिर्घकाल की राजनीति !


यह डॉ. राममनोहर लोहिया के वचन के जैसा ही, आज पिछले चालीस सालों से भी अधिक समय से, भारत की समस्त राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बिंदु सिर्फ धर्म ही बना हुआ है ! हालांकि वर्तमान सरकारने ऐसा कोई भी काम हमारे देश के 140 करोड़ लोगों के लिए नहीं किया है ! कि लोग इन्हें चुनाव में वोट दे ! हाँ कुछ मुठ्ठीभर पूंजीपतियों के लिए, अवश्य सभी नियमों और कानूनों को ताक पर रखकर दिल खोलकर उन्हें संपूर्ण देश की संपत्ति सौंप दे रहे हैं ! और आए दिन, धर्म की आड़ में अधर्म किए जा रहे हैं !


आज स्वामी विवेकानंद की 161 वी जयंती है ! और आज मुझे लगता है कि भारत में पिछले कुछ सालों से धर्म को लेकर जो राजनीतिक गतिविधिया चल रही है ! उन्हें देखकर, तो ऐसे समय उनके शिकागो की विश्व धर्म सभा का ऐतिहासिक भाषण बरबस याद आ रहा है ! उन्होंने अपने पांच मिनट के संक्षिप्त भाषण कि शुरुआत ही “मेरे अमेरिका के भाईयों और बहनों” इन छह शब्दों से करने के बाद ही, संपूर्ण संमेलन तालियों की गडगडाट से गुंजना शुरु हुआ ! जो उनके हरेक वाक्य पर गुंजता ही रहा ! और उसके बाद उन्होंने कहा कि ” धर्म, पंथ और संप्रदायो के आपसी अहंकारो की वजह से, यह दुनिया अनेकों बार खुन से लथपथ हुई है ! और इस वजह से मानवीय सभ्यता का विनाश हुआ है ! कई समृद्ध देश नष्ट हो गए !

आप लोग गौर किजिए कि विश्व की सबसे समृद्ध भाषा संस्कृत में ‘EXCLUSION’ शब्द का मतलब संपूर्ण रूप से अलग करना नहीं है ! और संसार की किसी भी भाषा या संस्कृति तथा धर्म में नही रहना चाहिए ! सुबह इस संमेलन के उद्घाटन समारोह की शुरुआत करते हुए, विश्व के प्रमुख दस धर्मों की याद में जो घंटानाद हुआ है ! उसका अर्थ समझ लिजिए, कि यह सर्वधर्म संमेलन, धर्मों के पागलपन की मृत्युघंटा है ! तलवार तथा कलम की मदद से, मनुष्यों के साथ किए जा रहे, सभी तरह के अत्याचारों का, अंतिम क्षण नजदीक आ चुका है !” और सिर्फ अपने पांच मिनट के भाषण को समाप्त करने के पस्चात, संपूर्ण हॉल खडे होकर दो मिनट तक तालियों से हॉल गुंज रहा था ! और उस एक, भाषण के बाद, स्वामी विवेकानंद, अमेरिका और संपूर्ण भारत में मशहूर हुए ! बल्कि उनके व्यक्तित्व के चारों ओर एक अद्भुत प्रकाश की आभा फैली ! और दिन-प्रतिदिन उसमे वृद्धि ही हुई है ! जो आज उनके जन्म के 161 सालों पस्चात भी कायम है !


हालांकि उनके नाम पर, कुछ लोगों ने अदृश्य रूप से, पेटेंट कर के रखा हुआ है ! उन्होंने शिकागो के भाषण के मुल सुत्र को अनदेखा करते हुए ! उल्टा उन्होंने जो चेतावनी दी थी कि “सर्वधर्म संमेलन के शुरुआत में जो घंटानाद हुआ है ! उसका मतलब आप लोग समझ लिजिए, की यह सर्वधर्म संमेलन धर्मों के पागलपन की मृत्युघंटा है ! तलवार और कलम के माध्यम से मनुष्यों के साथ किए जा रहे, हर प्रकार के अत्याचार का अंतिम समय आ चुका है !” आज इस भाषण को 131 साल पूरे होने जा रहे हैं !

जिन्होंने उन्हें हायजाक करके रख लिया है ! वह आज एकदम स्वामी विवेकानंद के इस भाषण के विपरीत, धर्म का, अपनी टुच्ची राजनीतिक भुक के लिए, सिर्फ कलम और तलवार ही नहीं ? आजकल तो विज्ञान के शोधकर्ताओं की कृपा से संचारक्रांती हो चुकी है ! तो उसका पूरा – पूरा दुरूउपयोग करते हुए संपूर्ण देश में धर्म के नाम पर पाखंड करते जा रहे हैं !
आपको तो बहुत पहले ही उन्होंने अपने सुविधा के अनुसार काट-छांट करते हुए इस्तेमाल करने की शुरूआत कर दिया है ! लेकिन अब पिछले चालीस सालों से, उन्होंने त्रेतायुगीन भगवान श्रीराम के आड में ! सत्ताधारी बनने के बाद, किए हुए पापों से ध्यान भटकाने के लिए ! 32 साल पहले अयोध्या स्थित मस्जिद को ध्वस्त करने के बाद ! अब उस जगह पर भगवान श्रीराम के आधे-अधूरे मंदिर में उनकी मूर्ति को

प्रतिष्ठित करने का ऐलान किया है ! और इस ऐलान में की शत – प्रतिशत राजनीतिक वासना को देखते हुए !

हिंदू धर्म के चारों प्रमुख शंकराचार्यो ने बहिष्कार करने की घोषणा की है ! यह घोषणा इन पाखंडीओ के मुंहपर एक झन्नाटेदार तमाचा है ! लेकिन सत्ता के मद में यह लोग इतने पागलपन के शिकार हो चुके हैं ! कि प्रभूश्रीराम से लेकर, रामकृष्ण परमहंस तथा आपके भी आदर्शों की अवहेलना करते हुए ! इस देश में पिछले चालीस सालों से अधिक समय से ! सिर्फ धार्मिक ध्रुवीकरण करते हुए ! संपूर्ण देश में भय पैदा करते हुए ! लोगों को आपस में लडने के लिए भ्रमित कर रहे हैं ! और इस वजह से, देश में जगह – जगह धर्म के नाम पर, दंगे, तथा आतंकवादी घटनाओं के साथ – साथ, अब इनके द्वारा फैलाएं गए, धार्मिक उन्माद के वजह से ! किसी के पहनावे तो किसी के खान – पान को देखते हुए ! लोगों को घेरकर मारना शुरू किया है ! जिसे अंग्रेजी में ‘MOBLYNCHING’ कहा जाता है !


आपने अपने शिकागो के भाषण में कहा था “कि धर्म, पंथ और संप्रदाय के दुराभिमान के वजह से, बहुत बार यह दुनिया मनुष्य के खुन से नहा चुकी है ! और इसी कारण मानवीय संस्कृति का विनाश हुआ है ! और बहुत ही समृद्ध राष्ट्र विलुप्तप्राय हो गए हैं ! इसलिए आप लोग ध्यान दिजिए की विश्व की सबसे समृद्ध भाषा संस्कृत में किसी को भी पूरी तरह से हटाने ‘EXCLUSION’ जैसे शब्द का समावेश नही है ! और वह शब्द दुनिया की किसी भी सभ्य भाषाओं, संस्कृतियों , तथा धर्मों में रहना भी नहीं चाहिए !

सुबह इस संमेलन की शुरुआत करने के पहले विश्व के दस प्रमुख धर्मों की याद में जबरदस्त घंटानाद हुआ है ! उसका अर्थ समझ लिजिए, यह सर्वधर्मसंमेलन धर्म के पागलपन की मृत्युघंटा है ! तलवार और कलम के मदद से मनुष्यों पर किए जा रहे सभी प्रकार के अत्याचारों का अंतिम क्षण नजदीक आ गया है ! और धर्म के नाम पर कोई किसी मनुष्य की हत्या करने का प्रयास करेंगे तो मैं उन्हें रोकते हुए धर्म की जगह पर, उस मनुष्य के प्राणों की रक्षा करुंगा ! “कहा यह कहने वाले स्वामी विवेकानंद और कहा उनके नाम पर अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने वाले वर्तमान पाखंडी ?


यह बात, आज भारत से लेकर विश्व के सभी जगहों पर धर्मों को लेकर चल रही राजनीति को लागू है ! वैसे भी डॉक्टर राममनोहर लोहिया ने कहा था कि “राजनीति अल्पकालिक धर्म है ! और धर्म दिर्घकाल की राजनीति ! ” जो आज कम-से-कम, भारत के बारे में, शत – प्रतिशत दिखाई दे रही है ! और कुछ भटके हुए लोगों को, तात्कालिक रूप से, भले ही इस बात का अपनी राजनीतिक वासना को तृप्त करने का शार्टकट मिल गया, ऐसा लगता है !

वह हिंदू धर्म को भी बहुत बडा नुकसान पहुंचा रहे हैं ! और डॉ राममनोहर लोहिया ने अपनी ‘हिंदू बनाम हिंदू ‘शिर्षक की पुस्तिका में बहुत ही अच्छी तरह से लिखा है !
स्वामी विवेकानंद जी के प्रति सच्चा आदर रखना है ! तो उन्होंने दि हुई चेतावनी को अनदेखा करना मतलब हिंदू धर्म को विनाश की खाई में ढकेलना का गुनाह करना होगा ! डाक्टर राममनोहर लोहिया की भाषा में ‘हिंदू बनाम हिंदू’को ही, आपस में लडा कर, खत्म करने की साजिश, वर्तमान समय में चल रही है !
डॉ. सुरेश खैरनार

डॉ. सुरेश खैरनार

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