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लागत और कीमत का रिश्ता

(यह लेख अगस्त 1977 में लिखा गया है। इसमें कई जगहों पर विभिन्न चीजों की कीमतों और सरकार या सत्तारूढ़ दल आदि का जो...

महँगाई कैसे रोकें

— किशन पटनायक — (यह लेख अगस्त 1977 में लिखा गया था। इसमें कई जगहों पर विभिन्न चीजों की कीमतों और सरकार या सत्तारूढ़ दल...

जन आंदोलनों को अपनी राजनीति घोषित करनी होगी

— किशन पटनायक — चुनाव होता है राजनीतिक सत्ता-केंद्रों के लिए। संसद, विधानसभा, पंचायत– ये सब राजनीतिक सत्ता-केंद्र हैं। उनके समानान्तर समाज के अंदर बहुत...

चुनाव परिवर्तन का माध्यम कैसे बने

— किशन पटनायक — (यह लेख अप्रैल 1996 में लिखा गया था) चुनाव के अध्ययन का एक शास्त्र बना हुआ है। मतदान का आकार-प्रकार किस तरह...

सेकुलर कौन है? – किशन पटनायक

राजनीति में जब कोई अपने को सेकुलर कहता है तो उसका अर्थ है ‘धर्मनिरपेक्ष’। मतलब है कि हमारी राजनीति से धर्म का कोई वास्ता...

सांप्रदायिकता के विरुद्ध एक कार्यक्रम – किशन पटनायक

( दूसरी किस्त ) संघ परिवार की हाल की गतिविधियों से उसका जनाधार निश्चित रूप से बढ़ा है। लेकिन भारतीय समाज और हिन्दू धर्म के...

धर्मनिरपेक्षता का घोषणा-पत्र – किशन पटनायक

(अयोध्या आंदोलन के बहाने संघ परिवार की सांप्रदायिकता के उभार के दिनों में स्व किशन जी ने यह लेख लिखा था, जो कि उनके...

युवा-संगठन ट्रेड यूनियन से अधिक क्रांतिकारी साबित हो सकते हैं

— किशन पटनायक — आर्थिक दृष्टि से युवा-विद्यार्थियों की हालत औद्योगिक मजदूरों से बेहतर नहीं है। औद्योगिक मजदूरों में कम-से-कम रोजगार की सुरक्षा आ गयी...

युवा वर्ग दूसरा सर्वहारा

— किशन पटनायक — (यह लेख अगस्त 1981 में लिखा गया था। लेख की शुरुआत से ही जाहिर है कि उन्नीस सौ चौहत्तर में उठे...

विषमता विरोधी आंदोलन की एकता एक ऐतिहासिक जरूरत

— किशन पटनायक — हमारे समाज में कई तरह की विषमताएँ हैं। इनके खिलाफ असंतोष बढ़ता जा रहा है और वह अलग-अलग आंदोलनों या राजनैतिक...

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