भगत सिंह: जो व्यक्ति से विचार बन गए
— वेदव्यास —
आज जब मैं अपने भारत के इतिहास को दोहराते हुए देखता हूं तो मुझे बचपन की वे सभी आवाजें सुनाई पड़ती हैं...
अपने-अपने ‘एपस्टीन’ – प्रेरणा
इस साल की शुरुआत में उछली ‘ज्येफ्री एपस्टीन फाइल्स’ ने साबित कर दिया है कि असीमत पूंजी इंसान की अंतर्निहित गंदगी को कई-कई गुना...
जलवायु-परिवर्तन से जीत सकती हैं महिलाएं! – अपूर्वा श्रीवास्तव
(प्राकृतिक आपदाओं के अनुभव बताते हैं कि यदि दुनिया की आधी, महिलाओं की आबादी को अवसर मुहैय्या करवाए जाएं तो जलवायु-परिवर्तन से निपटा जा...
धरती की तरह स्त्री! – परिचय दास
मानव सभ्यता की स्मृतियों में कुछ क्षण ऐसे आते हैं जब समय अपने ही कंधों पर ठहरकर पीछे देखता है। उन क्षणों में पृथ्वी...
होली : जहाँ रंग उतरते हैं, वहाँ स्मृति ठहरती है
— परिचय दास —
।। एक ।।
होली ऋतु का वह क्षण है जहाँ समय अपने अनुशासन से फिसलकर रस में बदल जाता है। यह केवल...
बिहार की अस्मिता के शिल्पकार : डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा
— परिचय दास —
इतिहास का एक अद्भुत स्वभाव है। वह कभी–कभी ऐसे व्यक्तियों को जन्म देता है, जिनकी उपस्थिति किसी प्रदेश की नियति को...
संस्थानों की दीवारों में छिपी ईर्ष्या – परिचय दास
संस्थानों की दीवारें केवल ईंट और पत्थर से नहीं बनी होतीं; वे महत्त्वाकांक्षाओं, आशंकाओं और अनकहे प्रतिस्पर्धात्मक भावों से भी निर्मित होती हैं। जहाँ...
डॉ. रामचंद्र प्रधान का अनंत में महाप्रस्थान – प्रोफेसर राजकुमार जैन
तकरीबन साठ वर्षों तक प्रधान जी से मेरे आत्मीय संबंध बने रहे। समाजवादी विचारधारा में गहरी आस्था रखने वाले डॉ. प्रधान ताउम्र समाजवादी तवारीख...
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस : जेंडर और नस्ल के सवाल
— डॉ. शुभनीत कौशिक —
एआई आधारित सॉफ्टवेयर और एल्गोरिद्म में अंतर्निहित जेंडर और नस्ल सम्बन्धी पूर्वाग्रह की विस्तृत पड़ताल करते हुए टिमनिट गेब्रू और...
भारत की लोकसंस्कृति में शिव — राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी
भारत की लोकसंस्कृति शिवमय है। पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक प्रत्येक जनपद में शिव की कीर्ति है। प्रत्येक जनजाति के गीतों...

















