महात्मा गांधी के जन्मदिन पर!
धर्म की तीन मंज़िलें-मैं धर्म को अक्सर एक तीन-मंज़िला इमारत की तरह देखती हूँ। इस इमारत का सबसे निचला हिस्सा—बेसमेंट—अंधकार में है। वहाँ हिंसा...
राकेश रफ़ीक़ के बहाने कुछ शब्द – डॉ योगेन्द्र
राकेश रफ़ीक़ को जब मल्टी ऑर्गन फेल्योर के कारण मैक्स हॉस्पिटल से बेलारी ले जाने के लिए एम्बुलेंस पर चढ़ाया जा रहा था, तो...
कृष्ण : जीवन के सबसे सुंदर अर्थ की तरह
— परिचय दास —
कृष्ण को याद करते ही सबसे पहले कोई मंदिर नहीं खुलता, कोई शास्त्र नहीं खुलता, कोई दार्शनिक सूत्र सामने नहीं आता।...
भारत छोड़ो आंदोलन के आखिरी क्रांतिकारी कृष्ण कुमार खन्ना
— कौशल किशोर —
शनिवार 8 अगस्त 2026 को भारत छोड़ो आंदोलन की आखिरी निशानी रहे कृष्ण कुमार खन्ना चले गए। पिछले साल समाजवादी नेता...
दिल्ली समाजवादी बिरादरी का एक खंभा ढह गया
— राजकुमार जैन —
साथी श्याम गंभीर को दिल्ली के सोशलिस्ट दिल्ली नगर निगम बोध घाट पर आज जब अंतिम विदाई दे रहे थे, ...
सबसे बड़ा जन आंदोलन था बयालीस का भारत छोड़ो आंदोलन
— अरविंद मोहन —
डॉ. लोहिया मानते थे कि बयालीस के आंदोलन की वर्षगांठ स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस से भी ज्यादा धूमधाम से मनाई...
देशज पसमांदा: यथार्थ और वर्तमान स्थिति – डॉ फैयाज अहमद फैज़ी
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय में दायर एक याचिका में ‘पसमांदा’ मुसलमानों के लिए आरक्षण की मांग उठाई गई है। यद्यपि भारतीय संविधान सामान्यतः...
एक भूख हड़ताल ऐसी भी थी! – राजकुमार जैन
जंगे -आजादी के सिपहसालार सोशलिस्ट तहरीक के जन्मदाताओं में से एक जयप्रकाश जी की पहचान एक मजदूर नेता के रूप में भी इतिहास में...
नामवर सिंह के आलोचना-संसार की नई संदर्भों में पड़ताल
नव नालंदा महाविहार में जन्म-शताब्दी समारोह के दौरान नामवर सिंह के साहित्य, आलोचना और वैचारिकी पर विमर्श
हिंदी आलोचना के अप्रतिम व्यक्तित्व नामवर सिंह की...
चंद्रशेखर जी की पुण्यतिथि पर आंखों देखे संस्मरण! – प्रोफेसर राजकुमार...
चंद्रशेखर जी के राजनीतिक जीवन की लंबी दास्तान है। समाजवादी चंद्रशेखर, युवा तुर्क चंद्रशेखर, प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, भोंडसी आश्रम के चंद्रशेखर वगैरा-वगैरा। इस दौरान...

















