तीसरी प्रकृति से डरी बेचारी मर्दानगी – योगेन्द्र यादव
चलिए, ट्रांसजेंडर कानून में हुए संशोधन की बात “कामसूत्र” से शुरू करते हैं। संस्कृत साहित्य के इस कालजयी ग्रंथ (अधिकरण 2, अध्याय 9) में...
पेरिस पालोमा के गीत ‘लेबर’ का नारीवादी विश्लेषण – मोनिका वर्मा
पेरिस पालोमा का गीत ‘श्रम’ समकालीन नारीवादी विमर्श में एक महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक पाठ के रूप में उभरकर सामने आया है। यह गीत महिलाओं के...
लोहिया का स्त्री-विमर्श – प्रेम सिंह
(यह लेख करीब 25 साल पहले लिखा गया था। लेख का संपादित अंश पहले ‘जनसत्ता’ और उसके बाद पूरा लेख ‘सामयिक वार्ता’ और ‘वसुधा’...
भगत सिंह: जो व्यक्ति से विचार बन गए
— वेदव्यास —
आज जब मैं अपने भारत के इतिहास को दोहराते हुए देखता हूं तो मुझे बचपन की वे सभी आवाजें सुनाई पड़ती हैं...
अपने-अपने ‘एपस्टीन’ – प्रेरणा
इस साल की शुरुआत में उछली ‘ज्येफ्री एपस्टीन फाइल्स’ ने साबित कर दिया है कि असीमत पूंजी इंसान की अंतर्निहित गंदगी को कई-कई गुना...
जलवायु-परिवर्तन से जीत सकती हैं महिलाएं! – अपूर्वा श्रीवास्तव
(प्राकृतिक आपदाओं के अनुभव बताते हैं कि यदि दुनिया की आधी, महिलाओं की आबादी को अवसर मुहैय्या करवाए जाएं तो जलवायु-परिवर्तन से निपटा जा...
धरती की तरह स्त्री! – परिचय दास
मानव सभ्यता की स्मृतियों में कुछ क्षण ऐसे आते हैं जब समय अपने ही कंधों पर ठहरकर पीछे देखता है। उन क्षणों में पृथ्वी...
होली : जहाँ रंग उतरते हैं, वहाँ स्मृति ठहरती है
— परिचय दास —
।। एक ।।
होली ऋतु का वह क्षण है जहाँ समय अपने अनुशासन से फिसलकर रस में बदल जाता है। यह केवल...
बिहार की अस्मिता के शिल्पकार : डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा
— परिचय दास —
इतिहास का एक अद्भुत स्वभाव है। वह कभी–कभी ऐसे व्यक्तियों को जन्म देता है, जिनकी उपस्थिति किसी प्रदेश की नियति को...
संस्थानों की दीवारों में छिपी ईर्ष्या – परिचय दास
संस्थानों की दीवारें केवल ईंट और पत्थर से नहीं बनी होतीं; वे महत्त्वाकांक्षाओं, आशंकाओं और अनकहे प्रतिस्पर्धात्मक भावों से भी निर्मित होती हैं। जहाँ...

















