वेलेंटाइन डे: भारतीय संदर्भ में एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण

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— अम्बेदकर कुमार साहु — प्रस्तुत आलेख में ‘वेलेंटाइन डे’ का समाजशास्त्रीय नजरिए से विश्लेषण किया गया है। लेख यह तर्क देता है कि वेलेंटाइन...

श्रद्धांजलि : समाजशास्त्री आंद्रे बेते की याद में

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— डॉ. शुभनीत कौशिक — भारत में सामाजिक विषमता और जातिगत संरचना का गहन अध्ययन करने वाले समाजशास्त्री आंद्रे बेते का आज 91 वर्ष की...

आज के लंपट दौर में भूपेंद्र नारायण मंडल के बारे में...

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जनतंत्र में अगर कोई पार्टी या व्यक्ति यह समझे कि वही जब तक शासन में रहेगा तब तक संसार में उजाला रहेगा, वह गया...

गुरु रैदास और उनका बेगमपुरा – प्रेमकुमार मणि

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बैशाख, जेठ और माघ पूर्णिमा भारत के तीन संतों के जन्मदिन हैं. बैशाख और जेठ की पूर्णिमा बुद्ध और कबीर के तथा माघ-पूर्णिमा रैदास...

प्रेमचंद और ईश्वर – जगदीश्वर चतुर्वेदी

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हमारे कई फेसबुक मित्रों ने कहा है कि प्रेमचंद तो ईश्वर को मानते थे। हम विनम्रतापूर्वक कहना चाहते हैं कि वे ईश्वर या ऐसे...

विचारों से नेताजी सुभाष चंद्र बोस समाजवादी थे

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— उदय प्रताप सिंह — नेताजी स्वतंत्रता सेनानी थे, लेकिन हजारों स्वतंत्रता सेनानियों में वह एकमात्र ऐसे आजादी के पुरोधा थे, जो हर देशभक्त हिंदुस्तानी...

सुभाषचन्द्र बोस के नाम पर संघी खेल!

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— प्रोफेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी — कुछ समय पहले सुभाषचन्द्र बोस की 100 गोपनीय फाइल मोदी सरकार ने सार्वजनिक कीं। इसके पहले कुछ फाइल ममता सरकार...

स्मृति : राममनोहर लोहिया

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— परिचय दास — डॉ. राममनोहर लोहिया को प्रायः असुविधाजनक प्रश्नकर्ता और सत्ता से निरंतर टकराने वाले राजनेता के रूप में याद किया जाता है...

तकनीक की राजनीति – शुभनीत कौशिक

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वर्ष 1980 में राजनीति विज्ञानी लैंगडन विनर ने प्रभावशाली पत्रिका डैडलस में ‘तकनीक की राजनीति’ पर केंद्रित पर एक विचारोत्तेजक लेख लिखा था। दिलचस्प...

पुस्तक मेले का नायाब तोहफा! – राजकुमार जैन

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दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे पुस्तक मेले में पहले दिन ही दो मकसद ध्यान में रख कर गया था। एक तो नयी...