– डॉक्टर राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी —
कोई बालबुद्धि व्यक्ति भारत ब्रांड की टॉफी चूस लेता है, फिर उसे अपनी जेब में रख लेता है, फिर निकालकर दोबारा चूसता है और फिर जेब में रख देता है। वह मन ही मन...
— परिचय दास —
आवेला असाढ़ मास,
लागेला अधिक आस,
बरखा में पिया घरे
रहितन बटोहिया।
पिया अइतन बुनियाँ में
राखि लिहतन दुनियाँ में
अखरेला अधिका
सवनवाँ बटोहिया।
आई जब मास भादो,
सभे खेली दही-कादो,
कृस्न के जनम बीती
असहीं बटोहिया।
लोकजीवन व प्रवासन पर आधारित भिखारी ठाकुर का 'बिदेसिया नाच' (...
— परिचय दास —
'बुद्धिजीवी' शब्द अपने भीतर जितनी गरिमा रखता है, व्यवहार में उतना ही विवादास्पद हो चुका है। वह व्यक्ति जो अपने विवेक, अध्ययन, संवेदना और तर्क के आधार पर समाज, संस्कृति, राजनीति और सत्ता का विश्लेषण करता है,...
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर संसार भर में योग की चर्चा होती है। विशाल मैदानों में हजारों लोग एक साथ आसन करते दिखाई देते हैं। समाचार माध्यम योग के लाभों का वर्णन करते हैं। सरकारें आँकड़े प्रस्तुत करती...
— परिचय दास —
कभी विश्वविद्यालयों की पहचान केवल उनकी इमारतों, विभागों और परीक्षाओं से नहीं होती थी। उनकी पहचान उन आवाज़ों से होती थी जो पेड़ों की छाया के नीचे, छात्रावासों के बरामदों में, पुस्तकालय की सीढ़ियों पर और...
पिछले दस- बारह वर्षों से ‘ संविदा ‘ और ‘अतिथि शिक्षक’ जैसी शब्दावली बहुप्रचारित हो गई है । कंपनियों द्वारा कर्मचारियों की सप्लाई का भी तंत्र विकसित हो गया है । ऐसा इसलिए किया गया कि कर्मचारियों और शिक्षकों...
— परिचय दास —
।। एक ।।
मानविकी विषयों में विद्यार्थियों के घटते प्रवेश को अगर आप केवल अपने आसपास के कॉलेज या विश्वविद्यालय की समस्या मान रहे हैं, तो यह थोड़ा वैसा ही है जैसे कोई किसान अपने खेत की...
— परिचय दास —
ज्येष्ठ की कठोर धूप में जब पृथ्वी की देह तपकर लगभग धातु जैसी हो जाती है, तब भारतीय स्त्रियाँ वट वृक्ष की छाया के नीचे एक ऐसे अनुष्ठान का निर्वाह करती हैं जिसे आधुनिक समय अक्सर...
— अम्बेदकर कुमार साहु —
गौरी और दीपक की पहली मुलाकात किसी कैफे या लाइब्रेरी में नहीं, बल्कि मुनिरका की एक बदबूदार गली के उस कोने पर हुई थी जहाँ एक पुराना फोटोकॉपी वाला बैठता था। दीपक वहाँ अपनी बगल...
— चंद्रभूषण —
एक पूरी तरह गेय ग्रंथ में- न केवल गाने योग्य, बल्कि पूरा का पूरा व्यवस्थित रागों ही में गाने के निर्देश के साथ संकलित-संपादित गुरु ग्रंथ साहिब में- उतनी अमूर्त दार्शनिक बहसें मौजूद होने की अपेक्षा नहीं...

















