— रणधीर कुमार गौतम —
सबसे पहले, डॉ. भीमराव अंबेडकर जी का भारतीय संविधान के निर्माता के रूप में राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका से सभी परिचित हैं। "India will have a society in which there will be togetherness of...
— दिवेश रंजन —
आज देश में दो तरह की शिक्षा व्यवस्था है। एक, पैसेवालों और सक्षम लोगों के लिए, जो अच्छे से अच्छे इंग्लिश मीडियम के स्कूल में पढ़कर देश के उच्च संस्थानों में जाकर अपना भविष्य संवार सकें।...
— केयूर पाठक —
उत्तर-आधुनिकता का दौर है- अबूझ और अपरिभाषित वास्तविकताओं का दौर. कला, धरम-करम, समाज, संस्कृति, ज्ञान, विज्ञान सब संदिग्ध और सशंकित. अनगिनत अर्थ और ढेर सारी व्याख्याएं. Deconstruction और Destruction दोनों का सह अस्तित्व- कई बार समानार्थी....
— अरमान अंसारी —
बेतिया से दिल्ली आते समय ट्रेन में शाहिल और उसके अब्बा से मुलाकात हुई। शाहिल की उम्र तेरह-चौदह साल की है।कोविड की तालाबंदी के पहले, शाहिल पूर्वी चंपारण, मोतिहारी के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई कर...
— बी. के. नागला —
जर्मन दार्शनिक और सामाजिक सिद्धांतकार युर्गेन हाबर्मास (Jürgen Habermas) बीसवीं और इक्कीसवीं शताब्दी के सबसे प्रभावशाली विचारकों में से एक रहे हैं। उनके कार्यों ने लोकतंत्र, सार्वजनिक विमर्श, संचार और आधुनिकता की आलोचनात्मक समझ को...
— शुभनीत कौशिक —
आज इटली के क्रांतिकारी विचारक अंतोनियो ग्राम्शी (1891-1937) का शहादत दिवस है। दुनिया भर में जिन विचारकों ने विषम परिस्थितियों में भी अपने चिंतन से दमनकारी सत्ता के प्रतिरोध का साहस दिखाया और क्रांति की राह...
1946 से 1950
1. संविधान सभा में
संविधान सभा ने 9 दिसंबर 1946 से अपना कार्य आरंभ किया और 1948 में पहला मसौदा प्रस्तुत किया गया। इस मसौदे में देश में लोक सभा (House of People) का चुनाव कैसे होगा इसकी...
— अरमान —
प्रेमचंद ने अपने उपन्यास 'कर्मभूमि' में लिखा है कि यह शिक्षालय है या जुर्मानालय, जहाँ फीस न देने पर नाम काट दिए जाते हैं। शिक्षा के सवाल को प्रेमचंद तब उठा रहे थे, जब देश गुलाम था। वे...
— प्रेम सिंह —
दिल्ली विश्वविद्यालय में छह महीने के इंतजार के बाद नए कुलपति की नियुक्ति हो गयी है। प्रो. योगेश सिंह कुलपति कार्यालय से अगले पांच साल तक दिल्ली विश्वविद्यालय का संचालन करेंगे। उनके पहले के कुलपति प्रो....
— अरुण कुमार गोंड —
बचपन में खेले जाने वाले खेल न केवल शारीरिक विकास को प्रोत्साहित करते है, बल्कि मानसिक और सामाजिक कौशल को भी मजबूत बनाते हैं। परंपरागत रूप से, भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में कबड्डी, गिल्ली-डंडा, छुपन-छुपाई, खो-खो,...

















