— परिचय दास — विश्वविद्यालय की इमारतें दूर से जितनी भव्य दिखती हैं, भीतर से उतनी ही खामोश होती जाती हैं। यह खामोशी किसी ध्यानस्थ ऋषि की नहीं, बल्कि धीरे-धीरे थकते हुए मनुष्यों की है। गलियारों में चलते हुए कदमों...
— बी. के. नागला — जर्मन दार्शनिक और सामाजिक सिद्धांतकार युर्गेन हाबर्मास (Jürgen Habermas) बीसवीं और इक्कीसवीं शताब्दी के सबसे प्रभावशाली विचारकों में से एक रहे हैं। उनके कार्यों ने लोकतंत्र, सार्वजनिक विमर्श, संचार और आधुनिकता की आलोचनात्मक समझ को...
भारत गणराज्य के स्वधर्म की इस शृंखला के पहले लेख में हमने सर्वधर्मसमभाव यानी सेकुलरवाद की चर्चा की थी। अब हम स्वधर्म के दूसरे सूत्र यानी समता या समाजवाद की चर्चा करेंगे। समता एक आधुनिक विचार है। सभी इंसान...
मैं कोई कवि नहीं हूँ। कवि सम्मेलनों का श्रोता भी नहीं। काव्य की साहित्यिक आलोचना सी मेरा दूर-दराज़ का भी रिश्ता नहीं है। बस एक पाठक हूँ, और वह भी कभी-कभार। सच कहूँ तो कवियों के दायरे से थोड़ा...
एक ओर भारत सरकार देश में भारतीय ज्ञान प्रणाली कायम करने का दावा कर रही है तो दूसरी ओर भारतीय विश्वविद्यालयों में विद्वता का वातावरण निरंतर पतित होता जा रहा है। अभी हाल में विलासपुर के घासीराम केंद्रीय विश्वविद्यालय...
— परिचय दास — हिंदी कोई एक भाषा नहीं, वह एक चलता हुआ समय है~जिसमें स्मृति है, स्वप्न ; सत्ता और प्रतिरोध भी। वह केवल व्याकरण की अनुशासित पंक्तियों में नहीं रहती बल्कि गली के मोड़ पर, खेत की मेड़...
प्रकृति कितनी रहस्यमय है! एक छिपकली है - जीला मान्स्टर। वह साल भर में मात्र एक या दो बार खाती है। वैज्ञानिकों ने उसकी आदतों को देखा- परखा और उन्होंने वजन घटाने वाली दवाओं का आविष्कार करना प्रारंभ किया।...
— डॉ योगेन्द्र — मेरी आंखों के सामने नरेंद्र मोदी की एक चमकती तस्वीर तैर रही है। लंबे बाल, आत्मविश्वास से भरा चेहरा और आवाज में खनक। वे सार्वजनिक मंच से तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से पूछ रहे हैं -”...
राष्ट्रीय प्रेस दिवस भारतीय लोकतांत्रिक चेतना के उस उजले क्षण की याद दिलाता है, जब शब्दों को स्वतंत्रता मिली और समाज को अपनी आवाज़। इस दिन का अर्थ केवल किसी तिथि का स्मरण नहीं बल्कि उस जिम्मेदारी की पुनर्स्मृति...
— परिचय दास — बिरसा मुंडा की स्मृति में कोई भी दिन साधारण नहीं रह सकता। जंगलों की नमी, पत्तों की सरसराहट, पहाड़ों की ढलानों पर बिखरी हुई सुबह की रोशनी—सब मिलकर जैसे एक अदृश्य ढोलक की थाप में बदल...