हलचल
मत देने के अधिकार की रक्षा करें। विरोध के अधिकार की...
सिटिज़न्स फॉर डेमोक्रेसी उन सभी नागरिकों, छात्रों, नागरिक समाज संगठनों और लोकतांत्रिक समूहों के साथ खड़ा है जो भारत निर्वाचन आयोग से जवाबदेही की...
विचार
सनातन : पुराने से चिरंतन तक
— परिचय दास —
‘सनातन’ शब्द से हमारा परिचय इतना पुराना है कि कभी-कभी हम उसके अर्थ को जानने की आवश्यकता ही नहीं समझते। जैसे घर...
स्वैच्छिक दासता, चुनाव और आंदोलन – अरुण कुमार त्रिपाठी
विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर पूरे देश में चल रही वोट चोरी (नहीं डकैती) के समक्ष देश के पास तीन विकल्प हैं। पहला...
वीडियो
महात्मा गांधी और भारत की लोकचेतना – राजेन्द्र रंजन चतुर्वेदी
महात्मा गांधी अर्थात् भारत की सामान्यजन-चेतना, समष्टिजन-चेतना, सर्वजन-चेतना और भारत के सामाजिक जीवन की अविच्छिन्न-निरंतरता। यह ठीक है कि गांधी एक व्यक्ति थे, किन्तु...
अन्य स्तम्भ
नाना पाटेकर : आवाज के पीछे का आदमी
— परिचय दास —
कुछ आवाजें कान से सुनाई देती हैं और कुछ सीधे स्मृति में उतर जाती हैं। नाना पाटेकर की आवाज ऐसी ही...
संवाद
“दादा धर्माधिकारी के जीवन-दर्शन में भारतीयता का बोध एवं गांधी-दर्शन”
— प्रिया कुमारी —
भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात गांधीवादी चिंतक एवं गांधी-विचार के प्रमुख व्याख्याकार दादा धर्माधिकारी की जयंती के अवसर पर विश्वनिधन...
अन्य लेख पढ़ें
विचारों का स्वराज : रवींद्रनाथ टैगोर और शांतिनिकेतन
रवींद्रनाथ टैगोर के चिंतन, उनके साहित्य-कर्म और विश्व-भारती के संस्थागत इतिहास को लेकर जिन विद्वानों ने उल्लेखनीय काम किया है, उनमें इतिहासकार उमा दास...
एक स्त्री के पुरुषार्थ की दास्तान
— डॉ. भोला प्रसाद सिंह —
यह डायरी शैली में लिखी एक औपन्यासिक कृति लगती है जिसमें स्थान, पात्र, घटनाएँ सब वास्तविक हैं, लेकिन रचनात्मक...
सीजेआई क्या हाइड्रोजन बम फोडेंगे जाने से पहले – राकेश अचल
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई आगामी 23 नवंबर को सेवानिवृत हो रहे हैं लेकिन सरकार उन्हे मानसिक रुप से दबाव में लेने...
Lohia’s realization of a vibrant and active Gandhi
— Prem Singh —
"The greatest revolution of our time is, therefore, a procedural revolution, removal of injustice through a mode of action characterised by...
साप्ताहिकी
शहीदे आज़म भगत सिंह
मुझे यकीन है
कुछ लोगों के जाने के बाद भी
दुनिया में रह जाएगी
अन्याय और
अत्याचार के विरुद्ध
उनकी बुलंद आवाज़
मज़बूत हाथ
तनी हुई मुट्ठियाँ
अदम्य साहस
मानवीय संवेदनाएँ
संघर्ष की कहानियाँ
उम्मीदों...
“यह देश सभी का है” : मधु लिमये
— राजगोपाल सिंह वर्मा —
मधु लिमये भारतीय जनतंत्र के उन गिने-चुने वैचारिक योद्धाओं में थे, जिन्होंने विचारधारा के साथ नीति, और राजनीति के साथ...























































































