हलचल
पत्रकार हृदयेश जोशी और श्याम मीरा सिंह कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान...
नई दिल्ली। कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान के लिए देश के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार टीवी समाचार एंकर हृदयेश जोशी और श्याम मीरा सिंह चुने गए...
विचार
मनुष्यता के बीहड़ों में जयप्रकाश
— परिचय दास —
1. अमेरिका में अंगूर तोड़ने वाला विद्यार्थी
जयप्रकाश नारायण की कहानी की शुरुआत किसी राजभवन, राजनीतिक मंच या प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के दीक्षांत...
सनातन : पुराने से चिरंतन तक
— परिचय दास —
‘सनातन’ शब्द से हमारा परिचय इतना पुराना है कि कभी-कभी हम उसके अर्थ को जानने की आवश्यकता ही नहीं समझते। जैसे घर...
वीडियो
सत्ता, ज्ञान और समाज के हाशिये : मिशेल फूको की जन्मशती
— Dr. Shubhneet kaushik —
आज प्रसिद्ध इतिहासकार और दार्शनिक मिशेल फूको का 100वाँ जन्मदिन है। बीसवीं सदी के उत्तरार्ध के सबसे प्रभावशाली विचारकों में...
अन्य स्तम्भ
नवनीतम पिल्लै को शांति का नोबल ( 2026)
—परिचय दास —
।। एक।।
मनुष्य होने की जगह
इतिहास समुद्रों को नापता है, मनुष्य की स्मृति उन्हें पार करती है। समुद्र के इस पार कोई घर...
संवाद
“दादा धर्माधिकारी के जीवन-दर्शन में भारतीयता का बोध एवं गांधी-दर्शन”
— प्रिया कुमारी —
भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात गांधीवादी चिंतक एवं गांधी-विचार के प्रमुख व्याख्याकार दादा धर्माधिकारी की जयंती के अवसर पर विश्वनिधन...
अन्य लेख पढ़ें
अपने-अपने हिस्से का समाजवाद
— जयराम शुक्ल —
गांधी और समाजवाद ये दो ऐसे मसले हैं कि हर राजनीतिक दल अपने ब्रांडिंग के रैपर में चिपकाए रखना चाहता है।...
समाजवाद : दृष्टि परीक्षा
— कृष्णाथ —
"क्यों जिन्दगी चलते-चलते
यकायक मौत की तरह लगने लगती है?"
- विजयदेव नारायण साही
नदी के उद्गम की तरह, शब्द का उद्गम भी धुन्ध...
Shashi Tharoor using terror is a figleaf?
— N R Mohanty —
Is Shashi Tharoor using terror as a figleaf to switch loyalty to PM Modi whom he called crass, communal and...
Lohia’s realization of a vibrant and active Gandhi
— Prem Singh —
"The greatest revolution of our time is, therefore, a procedural revolution, removal of injustice through a mode of action characterised by...
साप्ताहिकी
शहीदे आज़म भगत सिंह
मुझे यकीन है
कुछ लोगों के जाने के बाद भी
दुनिया में रह जाएगी
अन्याय और
अत्याचार के विरुद्ध
उनकी बुलंद आवाज़
मज़बूत हाथ
तनी हुई मुट्ठियाँ
अदम्य साहस
मानवीय संवेदनाएँ
संघर्ष की कहानियाँ
उम्मीदों...
“यह देश सभी का है” : मधु लिमये
— राजगोपाल सिंह वर्मा —
मधु लिमये भारतीय जनतंत्र के उन गिने-चुने वैचारिक योद्धाओं में थे, जिन्होंने विचारधारा के साथ नीति, और राजनीति के साथ...

























































































