हलचल
भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जन्मशताब्दी कार्यक्रम में विचार से जुड़े साथियों का...
— प्रोफेसर राजकुमार जैन —
आम लोगों की निगाह में आज सियासत एक पेशा बनकर रह गई है। विचारधारा और नेता कपड़े बदलने की तरह...
विचार
स्वैच्छिक दासता, चुनाव और आंदोलन – अरुण कुमार त्रिपाठी
विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर पूरे देश में चल रही वोट चोरी (नहीं डकैती) के समक्ष देश के पास तीन विकल्प हैं। पहला...
गांधी आज लौटे थे!
— परिचय दास —
सुबह मैंने गांधी को देखा। वे लौटे थे। न कोई जुलूस था, न कोई घोषणा। न आकाश से कोई दिव्य प्रकाश...
वीडियो
महात्मा गांधी और भारत की लोकचेतना – राजेन्द्र रंजन चतुर्वेदी
महात्मा गांधी अर्थात् भारत की सामान्यजन-चेतना, समष्टिजन-चेतना, सर्वजन-चेतना और भारत के सामाजिक जीवन की अविच्छिन्न-निरंतरता। यह ठीक है कि गांधी एक व्यक्ति थे, किन्तु...
अन्य स्तम्भ
किशन पटनायक : विकल्पहीन नहीं है दुनिया
— परिचय दास —
।। एक।।
कभी-कभी दुनिया इतनी भरी हुई दिखाई देती है कि उसमें किसी विकल्प के लिए जगह ही नहीं बचती। चारों ओर...
संवाद
“दादा धर्माधिकारी के जीवन-दर्शन में भारतीयता का बोध एवं गांधी-दर्शन”
— प्रिया कुमारी —
भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात गांधीवादी चिंतक एवं गांधी-विचार के प्रमुख व्याख्याकार दादा धर्माधिकारी की जयंती के अवसर पर विश्वनिधन...
अन्य लेख पढ़ें
बिन ईंधन कैसे चलेगा कृषि का इंजन?
— योगेन्द्र यादव —
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल का बजट पेश करते हुए कृषि को अर्थव्यवस्था का पहला इंजन बताने से किसानों...
द्वारका एक्सप्रेस-वे पर सीएजी की रिपोर्ट, सबसे बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा
15 अगस्त। मोदी सरकार पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। हाल ही में भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने 29.06...
सत्ता से संघर्ष और समाज से संवाद करना होगा – योगेन्द्र यादव
10 मार्च। पांच राज्यों के चुनाव नतीजों ने उन सभी लोगों को आहत और मायूस किया है जो कानून के शासन, संविधान तथा समता...
Lohia’s realization of a vibrant and active Gandhi
— Prem Singh —
"The greatest revolution of our time is, therefore, a procedural revolution, removal of injustice through a mode of action characterised by...
साप्ताहिकी
शहीदे आज़म भगत सिंह
मुझे यकीन है
कुछ लोगों के जाने के बाद भी
दुनिया में रह जाएगी
अन्याय और
अत्याचार के विरुद्ध
उनकी बुलंद आवाज़
मज़बूत हाथ
तनी हुई मुट्ठियाँ
अदम्य साहस
मानवीय संवेदनाएँ
संघर्ष की कहानियाँ
उम्मीदों...
“यह देश सभी का है” : मधु लिमये
— राजगोपाल सिंह वर्मा —
मधु लिमये भारतीय जनतंत्र के उन गिने-चुने वैचारिक योद्धाओं में थे, जिन्होंने विचारधारा के साथ नीति, और राजनीति के साथ...



























































































