हलचल
महिला दिवस के मौके पर धर्मसत्ता और पितृसत्ता से मुक्ति पर...
16 मार्च को महिला दिवस के उपलक्ष्य में एक संवाद एचआरडीसी रांची में सम्पन्न हुआ। यह आयोजन झारखंड जनाधिकार महासभा की पहल तथा आदिवासी...
विचार
ईरान पर चुप्पी हमें शर्मसार करेगी – योगेन्द्र यादव
‘आप सुनिए मेरी बात। नैतिकता, आदर्श, सिद्धांत ये सब अपने घर-समाज के नियम हैं। विदेश नीति इनसे नहीं चलती है। वहां हर कोई अपना...
तिब्बत जन विद्रोह दिवस – परिचय दास
इतिहास की कुछ तिथियाँ ऐसी होती हैं जो कैलेंडर में दर्ज होकर भी केवल तिथि नहीं रहतीं। वे धीरे-धीरे स्मृति का प्रदेश बन जाती...
वीडियो
बहुत याद आओगे – चंचल
अमरीका ने ईरान के ख़िलाफ़ जंग का ऐलान करके भारी भूल की , इसका ख़ामियाज़ा उसे भुगतना पड़ेगा / पड़ना शुरू हो गया है...
अन्य स्तम्भ
Remembering Prof. Naresh Kumar Bhargava : A Life Devoted to Sociology,...
— B. K. Nagla —
Prof. Naresh Kumar Bhargava passed away on 30 January 2026 at his residence in Udaipur after a prolonged illness. With...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
सद्भाव संवाद यात्रा का दूसरा दिन
24 जनवरी. साम्प्रदायिक सद्भावना समाज की पहल से आयोजित तथा लोकशक्ति अभियान एवं लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान द्वारा समर्थित सद्भाव संवाद यात्रा मंगलवार को 11...
भारत को प्रेमचंद के नजरिए से देखो – प्रोफेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी
"हमारे नबी का हुक्म है कि शादी-ब्याह में अमीर-गरीब का विचार न होना चाहिए, पर उनके हुक्म को कौन मानता है नाम के मुसलमान,...
देशभक्ति के प्रमाणपत्र की बार-बार माँग क्यों?
— श्रवण गर्ग —
सत्ताएँ जब जनता को उसके सपनों की समृद्धि हासिल करवाने में नाकाम हो जाती हैं तो वे बजाय अपनी विफलताओं को...
A TRIBUTE TO CHANDRASHEKHAR – Mohan Guruswamy
I wrote this on the late Chandrashekhar's 75th birthday. He would have been 100 now. I think of him often. He has sunk from...
साप्ताहिकी
महेन्द्र ममहेन्द्र मद्धेशिया की कविताएँ!
मंज़िल की ओर
कविता— 01
खुली आँखों के सपनों को
साकार किया जाए
घर से निकले हैं, तो बस
घर का मान बढ़ाया जाए।
माता-पिता की आशाओं को
बहन-भाइयों की अभिलाषाओं...
गणराज्य का स्वधर्म: देश की नब्ज़ पर हाथ
— अच्युदानंद किशोर नवीन —
परसों से पहले के दिन योगेंद्र यादव जी की किताब मिली और आज उसका आद्यंत अवलोकन भी कर डाला। स्वधर्म...




























































































