हलचल
The role of Constitutional Institutions in Democracy and Access to Justice...
Distinguished dignitaries and fellow citizens, It is both an honour and a responsibility to speak today on the theme The role of Constitutional Institutions...
विचार
ओस्लो विमर्श और प्राच्यवादी चश्मा: एक समाजशास्त्रीय विवेचना
— अम्बेदकर कुमार साहु —
प्रस्तुत आलेख हालिया अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक घटनाक्रमों के माध्यम से उत्तर-औपनिवेशिक वैश्विक व्यवस्था में निर्मित होने वाले विमर्शों को एडवर्ड सईद...
भाषा में संयम बनाम आचरण की भाषा – अरुण कुमार त्रिपाठी
अच्छा हुआ कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ने तुच्छ याचिकाएं डालने और सोशल मीडिया पर न्यायपालिका की आलोचना करने वालों को अंग्रेजी में ‘काकरोच...
वीडियो
चापलूसी और झूलेबाज़ी के ज़रिए विदेश नीति के असफल प्रयोग !...
डॉनल्ड ट्रम्प की चीन यात्रा की विफलता के कारणों को लेकर अमेरिकी मीडिया में जो विश्लेषण प्रकाशित हो रहे हैं हमारे लिए इस नज़रिए...
अन्य स्तम्भ
मिथक, इतिहास और मनुष्य का द्वंद्व: गिरीश कर्नाड का साहित्य
— परिचय दास —
भारतीय साहित्य और रंगमंच की परंपरा में गिरीश कर्नाड एक ऐसे रचनाकार के रूप में उभरते हैं, जिनके भीतर अतीत और वर्तमान...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
असम के झारखंडी आदिवासियों की स्थिति दयनीय
असम के झारखंडी आदिवासियों की स्थिति दयनीय, लेकिन हिमंत बिस्व सरमा झारखंड में आदिवासियों के हितैषी बनने की कोशिश में असम में झारखंडी आदिवासियों...
मैं सोशलिस्ट कैसे बना – राजकुमार जैन
सन 1957 के आम चुनाव में चाँदनी चौक लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस की ओर से राधारमण, भारतीय जनसंघ (अब भाजपा) के वसंतराव ओक तथा समाजवादी...
The Misunderstanding of Secularism by Hindus and Muslims.
— MOHAN GURUSWAMY —
Pakistan, the land of the pure, was carved out of India as a homeland for Muslims, a fact that was doubly...
साप्ताहिकी
प्रख्यात समाजशास्त्री प्रोफेसर Paramjit Judge की पुस्तक Culture and Popular Music...
— Randhir Gautam –
मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. Swaraj Raj ने पुस्तक पर एक विचारोत्तेजक व्याख्यान दिया। उन्होंने पंजाबी संस्कृति और लोकप्रिय संगीत...
मधु लिमये को समझना क्यों ज़रूरी है?
1977 का बजट सेशन चल रहा था। मोरारजी देसाई की सरकार थी। लिम्का और गोल्ड स्पॉट बनाने वाली कंपनी पार्ले के एक प्रतिनिधि ने...



























































































