हलचल
जांबाज साथी बृजेंद्र तिवारी चला गया!
साथी बृजेंद्र तिवारी के असामयिक निधन की खबर से बेहद तकलीफ हुई। कुछ दिन पहले ही मैं और साथी रमाशंकर सिंह उनसे मिलने के...
विचार
गालियां मोहब्बत की, गालियां नफरत की और गालियां गुस्से की
— अरुण कुमार त्रिपाठी —
जंतर मंतर प्रदर्शन और अनशन के दौरान जेन-जी के बयानों और पोस्टरों में सरकार और उसके पदाधिकारियों के लिए गालियां...
डूबते लोकतंत्र को जेन जी का किनारा – अरुण कुमार त्रिपाठी
अचानक पुरानी हिंदी फिल्मों के गाने याद आने लगे। 1954 में ‘जागृति’ फिल्म आई थी। उसका एक गाना लोगों की जुबान पर लंबे समय...
वीडियो
देशज पसमांदा: यथार्थ और वर्तमान स्थिति – डॉ फैयाज अहमद फैज़ी
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय में दायर एक याचिका में ‘पसमांदा’ मुसलमानों के लिए आरक्षण की मांग उठाई गई है। यद्यपि भारतीय संविधान सामान्यतः...
अन्य स्तम्भ
लोकतंत्र : तंत्र और लोक तथा प्रेमचंद
— RAJIV Ranjan chaturvedi —
यों तो साधारण से साधारण आदमी अपनी-अपनी शब्दावली में कह देता है कि, "लोकतंत्र है जरूर, किन्तु तंत्र लोक की...
संवाद
“दादा धर्माधिकारी के जीवन-दर्शन में भारतीयता का बोध एवं गांधी-दर्शन”
— प्रिया कुमारी —
भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात गांधीवादी चिंतक एवं गांधी-विचार के प्रमुख व्याख्याकार दादा धर्माधिकारी की जयंती के अवसर पर विश्वनिधन...
अन्य लेख पढ़ें
स्वराज इंडिया से जुड़े रेहड़ीपटरी मोर्चा का 11 अप्रैल से धरना
9 अप्रैल। दिल्ली में लाल किला इलाके से रेहड़ी पटरी वालों को उजाड़ दिया गया है जिसकी वजह से हजारों लोग बेरोजगार हो गए...
क्या ग़ुलामी भी स्वतंत्रता जैसी लगने लगती है?
— ध्रुव शुक्ल —
हम भारत के लोग आज उस कठिन मोड़ पर खड़े हैं जहां से शायद कोई रास्ता हमें नहीं दीख रहा। हमें...
बुजदिल और गुलाम दिमाग की देशभक्ति
— प्रेम सिंह —
(यह विशेष लेख फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षा बलों पर हुए आतंकवादी हमले के संदर्भ में लिखा गया...
THE BOTTLING PLANT SYNDROME
THE BOTTLING PLANT SYNDROME: Looking for the Lost Space for Freedom and Creative Imagination in Educational Institutions.
— Dr. Jernail S. Anand —
Is everything well...
साप्ताहिकी
चन्द्रशेखर : यादें बेतरतीब (असंपादित किश्त-1)
— अनिल अत्री —
आज चन्द्रशेखर जी का जन्मदिन है. सुबह से मन उदास है. उसके अपने कारण हैं. परसों ही चन्द्रशेखर जी के सचिव...
मैं वापस आऊँगा: घर की ओर लौटती स्मृतियाँ और विभाजन का...
— परिचय दास —
भारतीय सिनेमा में विभाजन पर अनेक फिल्में बनी हैं। अधिकांश फिल्मों ने उसे इतिहास की एक विराट राजनीतिक घटना के रूप में...




























































































