हलचल
वेनेजुएला की संप्रभुता के खिलाफ अमेरिकी आक्रमण का जमशेदपुर के नागरिकों...
आज बिरसा चौक साकची गोलचक्कर पर साझा नागरिक मंच द्वारा साम्राज्यवादी सरगना संयुक्त राज्य अमेरिका के आक्रमणकारी कार्रवाई के खिलाफ प्रतिवाद सभा की गयी।...
विचार
इक्कसवीं सदी में निराशा के नए कर्तव्य – अरुण कुमार त्रिपाठी
आज के चौंसठ साल पहले डॉ राम मनोहर लोहिया ने नैनीताल में 23 जून 1962 को एक व्याख्यान दिया था, जिसका शीर्षक था ‘निराशा...
राजनीतिक विमर्श में जनता का “अदृश्य” हो जाना – परिचय दास
लोकतंत्र में सबसे पहले जिस चीज़ के लुप्त होने की खबर आती है, वह अक्सर आख़िर में समझ में आती है। जनता का अदृश्य...
वीडियो
तकनीक की राजनीति – शुभनीत कौशिक
वर्ष 1980 में राजनीति विज्ञानी लैंगडन विनर ने प्रभावशाली पत्रिका डैडलस में ‘तकनीक की राजनीति’ पर केंद्रित पर एक विचारोत्तेजक लेख लिखा था। दिलचस्प...
अन्य स्तम्भ
जब गांधी ने अपनी ही जाति से कहा – “इन बाड़ों...
24 जनवरी, 1928: मोरबी की वह ऐतिहासिक घटना, जिसने जाति-व्यवस्था की जड़ों को हिला दिया। आज जब हम सामाजिक समरसता और जातिवाद पर बहस...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
नरेन्द्र कुमार मौर्य की चार ग़ज़लें
1.
मीडिया जिसको बहुत कमज़ोर कहता है,
इक वही है चोर को जो चोर कहता है।
है सवालों से उसे नाराज़गी इतनी,
वो हमारे हौसलों को शोर कहता...
देवेन्द्र सत्यार्थी और राहुल सांकृत्यायन
— पंकज मोहन —
देवेन्द्र सत्यार्थी और राहुल सांकृत्यायन: जनपदीय भारत के दो महान पुरोधाओं के मिलन की कहानी
एक सुरुज अकेल सरगवा विचवा रे!
दोसर हम...
राष्ट्र प्रेरणा स्थल और हमारा राष्ट्रीय चरित्र – अरुण कुमार त्रिपाठी
लखनऊ के लोगों ने उद्घाटन के दिन ही राष्ट्र प्रेरणा स्थल से 7000 गमले चुरा कर यह साबित कर दिया कि राष्ट्रीय चरित्र न...
Decongest: The smart way to smart cities!
— MOHAN GURUSWAMY —
The smart way to smart cities is to the shift state capitals out of overcrowded Mumbai, Kolkata, Chennai. Delhi too, as...
साप्ताहिकी
शिवदयाल की कविता!
'नागरिकता'
अपने इस देश में
मैं एक नागरिक की तरह
नहीं सोच पाता
नहीं, मुझे एक नागरिक की तरह
सोचने-विचारने नहीं दिया जाता
- यह कहना ज्यादा सही होगा
मैं जैसे...
सावित्रीबाई फुले जयंती के विशेष अवसर पर कविता
सावित्रीबाई फुले
एक युग था
जब अक्षर थे अपराध,
तब बनीं सावित्री
ज्ञान की स्पष्ट आवाज़,
भूमि पुस्तिका,
वृक्ष की डाल प्रथम कलम बनी,
जब वह पढ़ना सीख गईं,
जब वह लिखना...




























































































