हलचल
उमंग और उल्लास के चंद्रशेखर जन्म शताब्दी समारोह का शुभारंभ
— ऋषिकेश रजोरिया —
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का जन्म शताब्दी समारोह 17 अप्रैल को बड़े पैमाने पर मनाया गया। एक कार्यक्रम भारत यात्रा केंद्र, भोंडसी,...
विचार
डॉ. अंबेडकर: अंधेरे में रोशनी की तलाश
— वेदव्यास —
भारत इस दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है इसीलिए यहां लोक की अपनी अलग कहानी है और तंत्र की अपनी कहानी है।...
क्या महिला आरक्षण में धार्मिक कोटा संभव है? – परिचय दास
भारतीय लोकतंत्र की खासियत यह है कि यहाँ हर नीति अपने साथ एक नई उलझन मुफ्त में लेकर आती है। महिला आरक्षण भी इससे...
वीडियो
जनगणना में जरूरी प्रवासी मजदूर – अरविन्द मोहन
करीब डेढ़ दशक बाद होने जा रही 'जनगणना 2027' में जातियों की बहुप्रचारित मर्दुमशुमारी के अलावा उन असंख्य प्रवासी-मजदूरों का भी महत्व होना चाहिए...
अन्य स्तम्भ
चन्द्रशेखर : एक विलक्षण व्यक्तित्व
— सूर्यकुमार —
चन्द्रशेखर मानवीय संबंधों के आधार पर नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के मध्य स्वाभाविक, जीवंत संबंध स्थापित करने वाली भारतीय राजनीति की समृद्ध परंपरा...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
गरीबी दूर करने के लिए रोजगार के अधिकार की जरूरत है, आरक्षण की नहीं
— आनंद कुमार —
सोमवार को अपने आदेश में सर्वोच्च अदालत ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने संबंधी कार्यपालिका के आदेश की वैधानिकता तय कर...
91st Amendment: The Limit of Good Governance.
— MOHAN GURUSWAMY —
Government formation in India is generally unrelated to abilities but more of a loaves and fishes exercise when ministries are distributed...
मेरे संस्मरण – आचार्य नरेंद्रदेव : दूसरी किस्त
हमारे स्कूल में एक बड़े योग्य शिक्षक थे। उनका नाम था– श्री दत्तात्रेय भीखा जी रानाडे। उनका मुझ पर बड़ा प्रभाव पड़ा। उनके पढ़ाने...
A Charter for a New India! – MOHAN GURUSWAMY
The Indian Union of States has reached a critical impasse. Its diversity bound together by the Constitution that was meant to make us a...
साप्ताहिकी
पुस्तक का नाम : संस्कृति
— नीरज कुमार पाण्डेय —
मानव अपने जीवन में प्रायः अनेक प्रश्नों तथा समस्याओं से टक राता है और उसका समाधान तलाशता है। यद्यपि इस...
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है…
— डॉ. शुभीत कौशिक —
अरुंधति रॉय द्वारा उनकी माँ मैरी रॉय और उनके इर्द-गिर्द फैले हुए जीवन-संसार के बारे में लिखी गई भावपूर्ण पुस्तक...
























































































