हलचल
आज देश में बड़ा तमाशा चल रहा है: आखिर थमेगा कहां
वास्तविकता है कि जब से (2014) भाजपा संघ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बनी है तब से देश की पूरी...
विचार
आखिर नक्सली दिमागी क्यों होते हैं – अरुण कुमार त्रिपाठी
नक्सली दिमागदार होते हैं यह धारणा पुलिसिया सोच से उत्पन्न हुई है। इसलिए प्रधानमंत्री जब इस साल पंद्रह अगस्त को लाल किले के प्राचीर...
राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं की विफलता से युवाओं...
— प्रिया कुमारी —
समता मार्ग एवं न्यूज़ लेंस इंडिया के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय गोष्ठी में प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रोफेसर अरुण कुमार, वरिष्ठ पत्रकार प्रोफेसर...
वीडियो
रचनात्मक कार्य : पूर्ण स्वराज्य की अहिंसक राह
— रमेश चंद शर्मा —
‘सत्य ही ईश्वर है’, ‘मेरा जीवन ही मेरा संदेश है’, ‘सेवक की प्रार्थना’, ‘एकादश व्रत’ और ‘अचूक ताबीज का मंत्र’...
अन्य स्तम्भ
राही मासूम रज़ा : इतिहास के शोर में मनुष्य की बची...
— परिचय दास —
।। एक।।
आपातकाल के विरोधी रहे राही मासूम रज़ा को पढ़ते हुए सबसे पहले जो चीज़ सामने आती है, वह उनकी कथा...
संवाद
“दादा धर्माधिकारी के जीवन-दर्शन में भारतीयता का बोध एवं गांधी-दर्शन”
— प्रिया कुमारी —
भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात गांधीवादी चिंतक एवं गांधी-विचार के प्रमुख व्याख्याकार दादा धर्माधिकारी की जयंती के अवसर पर विश्वनिधन...
अन्य लेख पढ़ें
एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रन सिंह परमार का निधन
दिल्ली/रायपुर/ग्वालियर/भोपाल। वरिष्ठ गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता एवं एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रन सिंह परमार (72) का आज तिल्दा (छत्तीसगढ़) में आकस्मिक निधन हो...
दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति में अनियमितताएं – स्वराज इंडिया
25 अगस्त। दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति में धांधली के मामले में 17 तारीख को मनीष सिसोदिया सहित 15 व्यक्तियों के खिलाफ केस...
दिल्ली में सरकारी स्कूल : ढोल के भीतर पोल
— अरमान अंसारी —
आम आदमी पार्टी, आंदोलन से आयी हुई पार्टी है। अपने शुरुआती दौर में इस पार्टी ने जनहित के बहुत सारे मुद्दों...
Privacy and the Aadhaar of the Times Ahead.
— MOHAN GURUSWAMY —
By ruling that the Right to Privacy is a fundamental right the nine judge bench of the Supreme Court has set...
साप्ताहिकी
राखी की डोरी और मनुष्य की स्वतंत्रता
— परिचय दास —
रक्षाबंधन आते ही घर के भीतर एक बहुत पुरानी ध्वनि लौट आती है। कहीं थाली में रोली सजती है, कहीं अक्षत की...
परंपरा से परे नहीं, समय के भीतर : तुलसी की कविता...
— परिचय दास —
“नाना पुराण निगमागम सम्मतं यद् रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।
स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति॥”
और इसी विनम्र आत्मस्वीकार को तुलसी एक दूसरी जगह और अधिक...



























































































