हलचल
‘सामाजिक क्रांति के प्रणेता’ जोतिबा फुले को अपने भीतर खोजते हुए...
समाज के निर्माताओं,नीति निर्धारकों और महानायकों को कैसे याद किया जाए! उनकी फोटो पर हार चढ़ा कर,परिचर्चा आयोजित कर या परिचर्चा में भाषण ठोक...
विचार
विश्व युद्ध की तबाही से बचना है तो जिद छोड़ें और...
— रामबाबू अग्रवाल —
अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच जारी युद्ध की आग पश्चिमी एशिया तक फैल चुकी है। यदि यह युद्ध जल्दी नहीं...
ईरान–अमेरिका–इज़राइल तनाव : भविष्य की दिशा और गहन परिप्रेक्ष्य
— परिचय दास —
समकालीन वैश्विक राजनीति में ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच चल रहा तनाव केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं बल्कि एक जटिल...
वीडियो
डॉ अम्बेडकर को याद करते हुए – डॉ योगेन्द्र
आज डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती है। वे लोग जो मन ही मन डॉ अम्बेडकर से नफ़रत करते हैं, वे भी उन्हें पुष्प अर्पित...
अन्य स्तम्भ
जलियांवाला बाग के शहीदों की शहादत का दिन!
ब्रिटिश शासन की बर्बरता के निर्दोष भारतीय शिकार हुए थे। 13 अप्रैल 1919 की घटना को समझने के लिये हमें, उस दिन इतिहास में...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
विधवाओं के सशक्तीकरण के लिए चलेगा अभियान; कई संगठनों की साझा पहल
24 जून। विधवा महिलाओं को किसी की मोहताज नहीं होना चाहिए उन्हें अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने की कोशिश करनी चाहिए यह बात बीते...
खेती को लाभकारी बना दिया जाए तो वह पूरी अर्थव्यवस्था के लिए संकटमोचक हो...
— देविंदर शर्मा —
कोरोना महामारी के दौरान जिस तरह देश ने प्रवासी मजदूरों का घर-वापसी पलायन देखा, उसके बाद आयी आवधिक श्रम-बल सर्वे की...
चुनाव सुधार की कई अपेक्षाएँ अभी लंबित हैं
— राजेन्द्र राजन —
सर्वोच्च न्यायालय के पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने बीते गुरुवार को निर्वाचन आयोग के मुख्य आयुक्त और अन्य आयुक्तों के चयन...
The Economics of Farmer Suicides – MOHAN GURUSWAMY
The National Mental Health Association of the USA states that “No matter the race or age of the person; how rich or poor they...
साप्ताहिकी
पुस्तक का नाम : संस्कृति
— नीरज कुमार पाण्डेय —
मानव अपने जीवन में प्रायः अनेक प्रश्नों तथा समस्याओं से टक राता है और उसका समाधान तलाशता है। यद्यपि इस...
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है…
— डॉ. शुभीत कौशिक —
अरुंधति रॉय द्वारा उनकी माँ मैरी रॉय और उनके इर्द-गिर्द फैले हुए जीवन-संसार के बारे में लिखी गई भावपूर्ण पुस्तक...


























































































