हलचल
भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जन्मशताब्दी कार्यक्रम में विचार से जुड़े साथियों का...
— प्रोफेसर राजकुमार जैन —
आम लोगों की निगाह में आज सियासत एक पेशा बनकर रह गई है। विचारधारा और नेता कपड़े बदलने की तरह...
विचार
गांधी आज लौटे थे!
— परिचय दास —
सुबह मैंने गांधी को देखा। वे लौटे थे। न कोई जुलूस था, न कोई घोषणा। न आकाश से कोई दिव्य प्रकाश...
उच्च शिक्षा की दशा और दिशा पर विचारोत्तेजक परिचर्चा
— मनीषा कुमारी —
NEWS LENS INDIA एवं समता मार्ग के तत्वावधान में आयोजित वैचारिक गोष्ठी में उच्च शिक्षा की वर्तमान स्थिति, उसकी गुणवत्ता, समानता...
वीडियो
गाँधी, लोहिया और समाजवाद! – दीपक मिश्र
महात्मा गाँधी और उनके क्रांतिधर्मी शिष्य राममनोहर लोहिया के सम्बन्ध, वैचारिक साम्य व साझा विरासत पर नए सिरे से उनकी सामयिक प्रासंगिता की कसौटी...
अन्य स्तम्भ
किशन पटनायक : विकल्पहीन नहीं है दुनिया
— परिचय दास —
।। एक।।
कभी-कभी दुनिया इतनी भरी हुई दिखाई देती है कि उसमें किसी विकल्प के लिए जगह ही नहीं बचती। चारों ओर...
संवाद
“दादा धर्माधिकारी के जीवन-दर्शन में भारतीयता का बोध एवं गांधी-दर्शन”
— प्रिया कुमारी —
भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात गांधीवादी चिंतक एवं गांधी-विचार के प्रमुख व्याख्याकार दादा धर्माधिकारी की जयंती के अवसर पर विश्वनिधन...
अन्य लेख पढ़ें
विपक्ष को नष्ट करने का मोदी का नया हथियार
— प्रेमशंकर झा —
मोदी सरकार के आठ साल बाद भारत के बहु-सामुदायिक, बहु-धार्मिक लोकतंत्र के बहुत गंभीर खतरे में होने की हकीकत को झुठला...
सोनम वांगचुक का जंतर मंतर पर आमरण अनशन या युवाओं तथा विद्यार्थियों का विरोध...
— शंभू नाथ —
सोनम वांगचुक का जंतर मंतर पर आमरण अनशन या युवाओं तथा विद्यार्थियों का विरोध एक बड़ा साहस है और हम इसे...
सरेआम जम्हूरियत का कत्लेआम! – राजकुमार जैन
हर रोज खबरें मिल रही है कि जत्थे के जत्थे विधायक, लोकसभा के सदस्य अपनी पार्टियों जिसके टिकट पर जीत कर आए थे...
Observation: Sociology, Democracy and Diversity in India
— Prof.B K Nagla —
The four books by Prof. Anand Kumar—India’s Quest for Unity in Diversity, Essays in Political Sociology, Globalisation: An Indian Perspective,...
साप्ताहिकी
शहीदे आज़म भगत सिंह
मुझे यकीन है
कुछ लोगों के जाने के बाद भी
दुनिया में रह जाएगी
अन्याय और
अत्याचार के विरुद्ध
उनकी बुलंद आवाज़
मज़बूत हाथ
तनी हुई मुट्ठियाँ
अदम्य साहस
मानवीय संवेदनाएँ
संघर्ष की कहानियाँ
उम्मीदों...
“यह देश सभी का है” : मधु लिमये
— राजगोपाल सिंह वर्मा —
मधु लिमये भारतीय जनतंत्र के उन गिने-चुने वैचारिक योद्धाओं में थे, जिन्होंने विचारधारा के साथ नीति, और राजनीति के साथ...


























































































