हलचल
लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान की मालवन सहचिन्तन की रपट!
24 से 26 जनवरी 2026 तक लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान का तीसरा तीन-दिवसीय सहचिन्तन सम्पन्न हुआ। यह सहचिन्तन महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में सिंधुदुर्ग जिले...
विचार
क्या निहत्थे पैगंबर से डर गए थे कट्टरपंथी? – अरुण कुमार...
चिंतक और लेखक सच्चिदानंद सिन्हा अपनी पुस्तक ‘द अनआर्मड प्राफेट’ ( निहत्था पैगंबर) के आखिरी अध्याय में एक महत्त्वपूर्ण सवाल उठाते हैः—क्या गांधी कामयाब...
भारत गणराज्य के स्वधर्म का मूल सूत्र है सेकुलरवाद – योगेन्द्र...
भारत गणराज्य की स्थापना छिहत्तर वर्ष पहले हुई थी, लेकिन उसके स्वधर्म की बुनियाद कोई तीन हज़ार साल पहले पड़ चुकी थी। आज का...
वीडियो
आज के लंपट दौर में भूपेंद्र नारायण मंडल के बारे में...
जनतंत्र में अगर कोई पार्टी या व्यक्ति यह समझे कि वही जब तक शासन में रहेगा तब तक संसार में उजाला रहेगा, वह गया...
अन्य स्तम्भ
समाजवादी चिंतक बाबू भूपेंद्र नारायण मंडल – आशीष रंजन
जनतंत्र में कोई शासक या पार्टी जब यह समझे कि जब तक वह शासन में है तब तक उजाला रहेगा, वह गया तो फिर...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
लोकनायक जयप्रकाश नारायण : भारत की नैतिक आत्मा
श्रद्धा के साथ संकोच का जुड़ा होना स्वाभाविक है। जयप्रकाशजी मेरे श्रद्धा-पात्र हैं और उनके बारे में कुछ कहते संकोच होता है, उस परिस्थिति...
गांधीजी के बारे में कुछ गलतफहमियाँ – नारायण देसाई – दूसरी किस्त
(महात्मा गांधी सार्वजनिक जीवन में शुचिता, अन्याय के विरुद्ध अहिंसक संघर्ष और सत्यनिष्ठा के प्रतीक हैं। उनकी महानता को दुनिया मानती है। फिर भी...
भाजपा को चुनाव जिताने वाले नेताओं की जरूरत है?
— श्रवण गर्ग —
गुजरात और हिमाचल की विधानसभाओं, दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (एमसीडी) और मैनपुरी (यूपी) की लोकसभा सीट सहित कुछ राज्यों (राजस्थान, ओड़िशा,...
Misplaced worry on Brahmaputra waters! – MOHAN GURUSWAMY
The Brahmaputra River (approx. 2,900 km) originates from the Chemayungdung glacier in Tibet (as Yarlung Tsangpo), flows east, breaks through the Himalayas into Arunachal...
साप्ताहिकी
गांधी की ज़रूरत क्या है? – परिचय दास
गांधी की ज़रूरत किसी मूर्ति के लिए नहीं है। न चौराहे के लिए, न साल में दो दिन के पुष्पांजलि-अनुष्ठान के लिए। गांधी की...
मुक्तिबोध की आलोचना दृष्टि और काव्य रचनाएँ – डॉ अवधेशकुमार राय ...
आलोचक का प्रथम कर्तव्य है कि वह किसी भी कलाकृति के अंतर्तत्वों को - उसके प्राण तत्वों की भावना - कल्पना को ग्रहण करें...



























































































