हलचल
लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान ने ईरान पर किये गये हमले का...
लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान गत शनिवार को अमेरिका और इज़राएल द्वारा ईरान पर किये गये ज़बरदस्त हमले का सख़्त विरोध करता है। यह लड़ाई...
विचार
कहां गया भारत का वह अहिंसक स्वाभिमान? – अरुण कुमार त्रिपाठी
पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध में भारत की भूमिका ने यह दर्शा दिया है कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान बहुत कमजोर हो चुका है। ऐसा...
ईरान व अमरीका: विश्व राजनीति में ध्रुवीकरण का अध्याय
— परिचय दास —
इतिहास को कभी-कभी दो व्यक्तियों के नाम से याद किया जाता है लेकिन सच यह है कि उनके निर्णयों का भार...
वीडियो
धरती की तरह स्त्री! – परिचय दास
मानव सभ्यता की स्मृतियों में कुछ क्षण ऐसे आते हैं जब समय अपने ही कंधों पर ठहरकर पीछे देखता है। उन क्षणों में पृथ्वी...
अन्य स्तम्भ
जिस मौन में अज्ञेय रहते थे – परिचय दास
सुबह का एक ऐसा क्षण होता है जब हवा अभी पूरी तरह जागी नहीं होती। पेड़ों की पत्तियाँ हल्की-सी खनक के साथ हिलती हैं...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
शिव बिना जन्म और बिना अंत के हैं – राममनोहर लोहिया
ईश्वर की तरह अनंत हैं लेकिन ईश्वर के विपरीत उनके जीवन की घटनाएँ समय क्रम में चलती हैं और विशेषताओं के साथ इसलिए वे...
गोवा मुक्ति आंदोलन का एक अध्याय – चंपा लिमये : चौथी किस्त
(यह गोवा की आजादी की आजादी का साठवां साल है और गोवा क्रांति दिवस का पचहत्तरवां साल। एक और महत्त्वपूर्ण संयोग यह है कि...
सुमित्रानंदन पंत की कविता
यह धरती कितना देती है
मैंने छुटपन में छिपकर पैसे बोये थे,
सोचा था, पैसों के प्यारे पेड़ उगेंगे,
रुपयों की कलदार मधुर फसलें खनकेंगी
और फूल-फूलकर मैं मोटा...
Dr Ram Manohar Lohia: The feminist
He dreamt of a coalition of the backward castes, Adivasis, minorities, working class and women which would unitedly oppose all the different axes of...
साप्ताहिकी
गणराज्य का स्वधर्म: देश की नब्ज़ पर हाथ
— अच्युदानंद किशोर नवीन —
परसों से पहले के दिन योगेंद्र यादव जी की किताब मिली और आज उसका आद्यंत अवलोकन भी कर डाला। स्वधर्म...
गांधी की ज़रूरत क्या है? – परिचय दास
गांधी की ज़रूरत किसी मूर्ति के लिए नहीं है। न चौराहे के लिए, न साल में दो दिन के पुष्पांजलि-अनुष्ठान के लिए। गांधी की...





























































































