हलचल
राज्य सम्मेलन के दूसरे दिन संगठनात्मक मजबूती और जनसंघर्षों को तेज...
लुगू बुरु घंटाबाड़ी धोरोम गढ़, ललपनिया (गोमिया, बोकारो) में 13–14 अप्रैल 2026 को आयोजित झारखंड जनाधिकार महासभा राज्य सम्मेलन के दूसरे दिन के विमर्श...
विचार
चंद्रशेखर : प्रेरणादायक समाजवादी नेता
— Randhir Gautam —
महान व्यक्तित्व की खासियत होती है कि वह एक प्रतीक बन जाता है, और उस प्रतीक में उच्च मानवीय मूल्य, विचार...
राष्ट्रीय राजनीति में चंद्रशेखर जी का अनूठा स्थान — प्रो. आनन्द...
1) श्री चंद्रशेखर (१७ अप्रैल १९२७८ जुलाई २००७) भारत के समाजवादियों की अगली कतार के आकर्षक नेता थे. उनकी उपलब्धियों में भारत का प्रधानमंत्री...
वीडियो
सामाजिक इंजीनियरिंग की अग्निपरीक्षा: बीजेपी के सामने बिहार का सवाल
— परिचय दास —
।।एक ।।
सत्ता का गणित कभी सीधा नहीं होता। लोग हर बार उम्मीद करते हैं कि राजनीति कोई स्कूल की जोड़-घटाव है।...
अन्य स्तम्भ
तोड़ने नहीं जोड़ने के लिए जाने जाएंगे चंद्रशेखर – अरुण कुमार...
चंद्रशेखर(पूर्व प्रधानमंत्री) जब सन 1964 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी छोड़कर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो रहे थे तो इंदिरा गांधी ने उनसे पूछा कि...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
महात्मा गांधी और फिलिस्तीन
— कुमार कलानंद मणी —
ब्रिटेन ने फिलिस्तीन को फिर से यहूदियों का घर बनाने का आंदोलन करने वाले यहूदीवादियों (जिआनिस्टो) से वादे कर रखे...
सरकारी बैंकों पर मंडरा रहा है निजीकरण का खतरा – एआईबीओसी
21 जुलाई। 55वें बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस के अवसर पर बैंक अधिकारियों की यूनियन ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कनफेडरेशन(एआईबीओसी) ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के...
गौतम बुद्ध, आत्मा और AI : चेतना की नयी बहस में भारत की पुरानी...
— संजय जोठे —
भारत की सबसे बड़ी और पुरानी समस्या पर एक नयी रोशनी पड़ने लगी है। तकनीकी विकास की मदद से अब...
A conversation about secularism, conversion and the nature of religion.
— MOHAN GURUSWAMY —
Modern religions are akin to great commercial enterprises like Coke and Pepsi, or even TCS, constantly seeking greater market share while...
साप्ताहिकी
पुस्तक का नाम : संस्कृति
— नीरज कुमार पाण्डेय —
मानव अपने जीवन में प्रायः अनेक प्रश्नों तथा समस्याओं से टक राता है और उसका समाधान तलाशता है। यद्यपि इस...
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है…
— डॉ. शुभीत कौशिक —
अरुंधति रॉय द्वारा उनकी माँ मैरी रॉय और उनके इर्द-गिर्द फैले हुए जीवन-संसार के बारे में लिखी गई भावपूर्ण पुस्तक...



























































































