हलचल
असमानता अब व्यवस्था की संरचना बन चुकी है’ पी साईनाथ –...
दून लाइब्रेरी में हुए व्याख्यान में वरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ ने मौजूदा व्यवस्था और पत्रकारिता की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए.
अपनी अब तक...
विचार
गांधी और समाजवादी: संबंध की सच्चाई
— प्रेम सिंह —
(यह लेख 18-20 मार्च 2010 को साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित ‘साहित्योत्सव’ (वार्षिक राष्ट्रीय संगोष्ठी) मैं पढ़ा गया था। डॉ राममनोहर लोहिया...
भारत-अमरीका डील से किसानी का संकट और गहरा हो जाएगा –...
इन पंक्तियों का लेखक पिछले कुछ समय से बार-बार यह आगाह करता रहा है कि चाहे मोदी सरकार कुछ भी कहे, ट्रम्प इसमें कामयाब...
वीडियो
गलगोटिया की अपसंस्कृति अचानक नहीं आयी – डॉ योगेन्द्र
भारत में लोगों को काम मिल नहीं रहा है और एआई से काम के घंटे आधे रह जायेंगे और काम पहले से दोगुना होगा।...
अन्य स्तम्भ
आज नामवर सिंह की पुण्यतिथि है – नामवर सिंह के मायने!
बुद्धिजीवी और कलाकार के लिए मुख्य चीज है उसके आदर्श। वह उनके साथ कोई समझौता नहीं करना चाहता। सवाल यह है नामवर सिंह के...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
भारतीय समाज को कैसे देखें
— किशन पटनायक —
यह लेख देवीप्रसाद मौर्य की पुस्तक ‘क्रांति के पहले' (प्रकाशक- गंगा प्रसाद तिवारी, चौखंभा प्रकाशन, 9/5 जवाहर मार्ग, इंदौर, मध्यप्रदेश) के प्राक्कथन के...
Badshah Khan played crucial role in freedom movement’s consensus on interfaith harmony
— Bharat Dogra —
A legacy of the freedom movement of India which remains extremely important not just for India but for all of South...
हमारे डा. रवि चोपड़ा जी – इस्लाम हुसैन
दो दिन पहले मशहूर इन्वायरमेंटलिस्ट और साइंसदां डा. रवि चोपड़ा जी ने अपने आने के प्रोग्राम के बारे में बताया था, और आज वो...
Report of the ‘PUCL Delhi Lawyers’ Roundtable on Legal Responses to...
At a time when constitutional values are increasingly strained by rising communal polarisation, hate speech, and targeted violence, the People's Union for Civil Liberties...
साप्ताहिकी
गणराज्य का स्वधर्म: देश की नब्ज़ पर हाथ
— अच्युदानंद किशोर नवीन —
परसों से पहले के दिन योगेंद्र यादव जी की किताब मिली और आज उसका आद्यंत अवलोकन भी कर डाला। स्वधर्म...
गांधी की ज़रूरत क्या है? – परिचय दास
गांधी की ज़रूरत किसी मूर्ति के लिए नहीं है। न चौराहे के लिए, न साल में दो दिन के पुष्पांजलि-अनुष्ठान के लिए। गांधी की...
























































































