हलचल
भारत की विदेश एवं व्यापार नीति तथा ऊर्जा-कृषि-खाद्यान्न संकट
दुनिया आज गहरे संकट के दौर से गुजर रही है। यूक्रेन और ईरान से जुड़े युद्धों में बड़ी शक्तियों की भागीदारी ने वैश्विक अस्थिरता...
विचार
मधु लिमये : आनंद के लिए शास्त्रीय संगीत, सिद्धांत के लिए संघर्ष!
— प्रो. राजकुमार जैन —
मधु जी के अति निकट जाने का एक महत्त्वपूर्ण कारण, भारतीय शास्त्रीय संगीत था। दिल्ली में हमारे समाजवादी साथी रवींद्र...
डॉ. अंबेडकर: अंधेरे में रोशनी की तलाश
— वेदव्यास —
भारत इस दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है इसीलिए यहां लोक की अपनी अलग कहानी है और तंत्र की अपनी कहानी है।...
वीडियो
कंधे पर बहन की हड्डियां और फ़ुटबॉल के ठहाके – डॉ...
सुबह- सुबह बूँदों से लदे बादल आकाश में मँडरा रहे हैं । हवा में फ़िलहाल ठंडक बस गयी है । अप्रैल का आख़िरी समय...
अन्य स्तम्भ
अमल खलील की पत्रकारिता से हम क्या सीखें! – अरुण कुमार...
हिंदी पत्रकारिता जब अपने उद्भव के दो सौ वर्ष पूरा करके विकास की ऐसी अवस्था में पहुंच गई है जब उसके चीखने और उछलने...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
सरकार को अपनी हिंसा पर भी काबू रखना सीखना होगा – जयप्रकाश नारायण
यदि सरकार चाहती है कि समाज में हिंसा न हो, तो कुछ बातें उसे खासतौर पर अपने ध्यान में रखनी पड़ेंगी। सबसे पहले तो...
स्मृतियों के कैमरे में क़ैद रघु रॉय! – श्रवण गर्ग
रघु राय को लेकर मन में कई तरह की स्मृतियाँ हैं। शुरुआत अनुपम मिश्र से करते हैं। साल 1971 में इंदौर छोड़कर प्रभाष जोशीजी...
साप्ताहिकी
पुस्तक का नाम : संस्कृति
— नीरज कुमार पाण्डेय —
मानव अपने जीवन में प्रायः अनेक प्रश्नों तथा समस्याओं से टक राता है और उसका समाधान तलाशता है। यद्यपि इस...
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है…
— डॉ. शुभीत कौशिक —
अरुंधति रॉय द्वारा उनकी माँ मैरी रॉय और उनके इर्द-गिर्द फैले हुए जीवन-संसार के बारे में लिखी गई भावपूर्ण पुस्तक...




























































































