हलचल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को पत्र!
प्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी,
आज के पत्र में हम आपकी विदेश नीति के बारे में चर्चा करेंगे और बताएंगे कि आप कितने असफल...
विचार
जब शब्द गिरफ्तार हुए और कविता मुक्त रही!
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आपातकाल केवल एक राजनीतिक घटना नहीं था बल्कि वह भारतीय भाषाओं की आत्मा की परीक्षा का समय भी था।...
हिंदू नैतिकता, संघ और भारतीय समाज – अरुण कुमार त्रिपाठी
पिछले दिनों स्वयं सेवी संगठनों के कुछ मित्रों के आमंत्रण पर जयपुर में था। वह गोष्ठी सामाजिक नागरिक संस्थाओं के आत्मावलोकन की एक कोशिश...
वीडियो
कान भरने वाले लोग!
— परिचय दास —
।। एक ।।
कान भरने वाले लोग संसार की सबसे पुरानी और सबसे टिकाऊ प्रजातियों में से हैं। वे किसी खेत में नहीं...
अन्य स्तम्भ
भारतीय क्रान्ति के मौलिक प्रश्न – पंडित रामनंदन मिश्र
क्रान्ति-कार्य की शिक्षा
क्रान्ति का मुख्य प्रश्न व्यवहार का है, सिद्धान्त का नहीं। लेनिन ने ही कहा है -
"इस युग में विद्यार्थी मार्क्स में दिलचस्पी...
संवाद
“दादा धर्माधिकारी के जीवन-दर्शन में भारतीयता का बोध एवं गांधी-दर्शन”
— प्रिया कुमारी —
भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात गांधीवादी चिंतक एवं गांधी-विचार के प्रमुख व्याख्याकार दादा धर्माधिकारी की जयंती के अवसर पर विश्वनिधन...
अन्य लेख पढ़ें
मधु लिमये : लोक स्मृति में
— रामचंद्र प्रधान —
मुझे पता नहीं कि मधु जी इतिहास में स्वयं किस रूप में प्रतिष्ठित होना चाहते थे। इस बात को जानने योग्य...
धर्म पर कुछ विचार : तीसरी किस्त
— राममनोहर लोहिया —
अब रह गया दूसरा अंग जो ब्रह्मज्ञान वाला, कर्मकाण्ड के अलावा। आत्मा, परमात्मा पर मैं क्या कहूँ, क्योंकि परमात्मा को तो...
भीषण गर्मी में एयर वॉशर न चलाए जाने से मजदूरों में आक्रोश
17 अप्रैल। हरियाणा के आईएमटी मानेसर स्थित मारुति सुजुकी की कंपोनेंट मेकर कंपनी बेलसोनिका प्रा. लि. में शुक्रवार की सुबह मजदूरों ने प्लांट के...
Back to Bhagalpur Blinding to lynching! – À.J. Philip
There is something I have in common with Manoj Menon, Bureau Chief of Mathrubhumi in Delhi. My connection with that position began long before...
साप्ताहिकी
विष्णु नागर जी की कविता
मोदी - मोदी : कितना अकेला है मोदी
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मोदी के घर में उसके कई सेवक हैं
उसका वहाँ कोई भाई, कोई बहन नहीं
उसके आँगन में...
‘सब मज़ेदारी है! कथा नीलगढ़’
— डॉ संजय जोठे —
कोई तीस बरस पहले की बात है। चौबीस साल का एक उत्साही नवयुवक दिल्ली से चलकर भोपाल से 36 किलोमीटर...

























































































