हलचल
आज देश में बड़ा तमाशा चल रहा है: आखिर थमेगा कहां
वास्तविकता है कि जब से (2014) भाजपा संघ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बनी है तब से देश की पूरी...
विचार
राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं की विफलता से युवाओं...
— प्रिया कुमारी —
समता मार्ग एवं न्यूज़ लेंस इंडिया के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय गोष्ठी में प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रोफेसर अरुण कुमार, वरिष्ठ पत्रकार प्रोफेसर...
संवाद और संग्राम के बीच हमारी सभ्यता – अरुण कुमार त्रिपाठी
वैसे तो पूरी मानव सभ्यता ही संवाद और संग्राम के बीच उलझी हुई है लेकिन भारत विशेष तौर पर इसका शिकार है। जंतर मंतर...
वीडियो
कर्ज किसका, नुकसान किसका? : सुभाष चंद्रा के बहाने दिवाला व्यवस्था...
— अनिल अत्रि —
देश में कर्ज केवल रकम का सवाल नहीं है, उसके साथ व्यवस्था का रवैया भी जुड़ा है। एक किसान कुछ लाख...
अन्य स्तम्भ
Golap Barbora: असम के समाजवादी आंदोलन, सामाजिक न्याय और राष्ट्र-निर्माण की...
असम के समाजवादी आंदोलन के इतिहास में Barbora का नाम एक ऐसे नेता के रूप में सामने आता है, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में नैतिकता,...
संवाद
“दादा धर्माधिकारी के जीवन-दर्शन में भारतीयता का बोध एवं गांधी-दर्शन”
— प्रिया कुमारी —
भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात गांधीवादी चिंतक एवं गांधी-विचार के प्रमुख व्याख्याकार दादा धर्माधिकारी की जयंती के अवसर पर विश्वनिधन...
अन्य लेख पढ़ें
मोदी राज में बैंकों को किन लोगों ने किस तरह लूटा
— जवाहर सरकार —
प्रस्तुत लेख 4 अगस्त 2023 को 'द वायर' (अंग्रेजी) में प्रकाशित हुआ था। मोदी-राज में बैंक-ऋणों के बट्टे खाते में डालने...
धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव की कविता!
खुशियों से भर दे
भूखे को रोटी दे,
बेघर को घर दे।
माँ दुर्गे ! नया वर्ष
खुशियों से भर दे।
गीतों को, छंदों को,
नतमस्तक वन्दों को,
नन्हे परिंदों को,
एक...
Privacy and the Aadhaar of the Times Ahead.
— MOHAN GURUSWAMY —
By ruling that the Right to Privacy is a fundamental right the nine judge bench of the Supreme Court has set...
साप्ताहिकी
राखी की डोरी और मनुष्य की स्वतंत्रता
— परिचय दास —
रक्षाबंधन आते ही घर के भीतर एक बहुत पुरानी ध्वनि लौट आती है। कहीं थाली में रोली सजती है, कहीं अक्षत की...
परंपरा से परे नहीं, समय के भीतर : तुलसी की कविता...
— परिचय दास —
“नाना पुराण निगमागम सम्मतं यद् रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।
स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति॥”
और इसी विनम्र आत्मस्वीकार को तुलसी एक दूसरी जगह और अधिक...




























































































