हलचल
असंवैधानिक और शोषणकारी ‘खान एवं खनिज (विकास और नियमन) संशोधन अधिनियम...
— राजेश रामकृष्णन —
केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी की पूंजीवादियों की मित्र सरकार ने कॉर्पोरेट्स के पक्ष में और देश के प्रकृति पर निर्भर...
विचार
आखिर नक्सली दिमागी क्यों होते हैं – अरुण कुमार त्रिपाठी
नक्सली दिमागदार होते हैं यह धारणा पुलिसिया सोच से उत्पन्न हुई है। इसलिए प्रधानमंत्री जब इस साल पंद्रह अगस्त को लाल किले के प्राचीर...
राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं की विफलता से युवाओं...
— प्रिया कुमारी —
समता मार्ग एवं न्यूज़ लेंस इंडिया के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय गोष्ठी में प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रोफेसर अरुण कुमार, वरिष्ठ पत्रकार प्रोफेसर...
वीडियो
अमेरिकन राष्ट्रवाद के बहाने! – डॉ. सुरेश खैरनार
सत्ता की नशा की बिमारी जो गलिसे लेकर विश्व स्तर पर सदियों पुरानी है. पहले कबीले एक दूसरे पर अधिपत्य बनाने शुरू किए, फिर...
अन्य स्तम्भ
सत्यप्रकाश मिश्र: आलोचना में असहमति का विवेक
— परिचय दास —
।। एक।।
हिंदी आलोचना के इतिहास में कुछ आलोचक ऐसे हैं जिनकी अनुपस्थिति से अधिक उनकी उपस्थिति का ढंग ध्यान खींचता है।...
संवाद
“दादा धर्माधिकारी के जीवन-दर्शन में भारतीयता का बोध एवं गांधी-दर्शन”
— प्रिया कुमारी —
भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात गांधीवादी चिंतक एवं गांधी-विचार के प्रमुख व्याख्याकार दादा धर्माधिकारी की जयंती के अवसर पर विश्वनिधन...
अन्य लेख पढ़ें
ओड़िशा में कारपोरेट की चॉंदी और जनता की बरबादी
— प्रफुल्ल सामंतरा —
1. ओड़िशा में पोस्को के खिलाफ 2005 से 2016 तक लंबा संघर्ष चला था। सरकार ने 2700 एकड़ वनभूमि जबरदस्ती अधिग्रहीत कर...
अंकिता भंडारी हत्याकांड पर राष्ट्रीय तथ्यान्वेषी दल ने जारी की रिपोर्ट
7 फरवरी. उत्तराखंड के ऋषिकेश में सितंबर 2022 में पौड़ी गढ़वाल के श्रीकोट की निवासी अंकिता भंडारी के गायब होने का मामला सामने आया....
तीसरी प्रकृति से डरी बेचारी मर्दानगी – योगेन्द्र यादव
चलिए, ट्रांसजेंडर कानून में हुए संशोधन की बात “कामसूत्र” से शुरू करते हैं। संस्कृत साहित्य के इस कालजयी ग्रंथ (अधिकरण 2, अध्याय 9) में...
Gen Z Couldn’t Be Crushed
Swatantra Bharadwaj is reportedly booked under the POCSO Act. But another disturbing question deserves an answer. The Indian Express reported that police claimed CCTV...
साप्ताहिकी
राखी की डोरी और मनुष्य की स्वतंत्रता
— परिचय दास —
रक्षाबंधन आते ही घर के भीतर एक बहुत पुरानी ध्वनि लौट आती है। कहीं थाली में रोली सजती है, कहीं अक्षत की...
परंपरा से परे नहीं, समय के भीतर : तुलसी की कविता...
— परिचय दास —
“नाना पुराण निगमागम सम्मतं यद् रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।
स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति॥”
और इसी विनम्र आत्मस्वीकार को तुलसी एक दूसरी जगह और अधिक...





























































































