हलचल
भारत की विदेश एवं व्यापार नीति तथा ऊर्जा-कृषि-खाद्यान्न संकट
दुनिया आज गहरे संकट के दौर से गुजर रही है। यूक्रेन और ईरान से जुड़े युद्धों में बड़ी शक्तियों की भागीदारी ने वैश्विक अस्थिरता...
विचार
मजदूर आंदोलन में सोशलिस्ट तहरीक की भूमिका!
— प्रोफेसर राजकुमार जैन —
भाग (1)
सोशलिस्ट तहरीक में मजदूर किसान आंदोलन की अहमियत, अहम मुकाम रखती है। बरतानिया हुकूमत के खिलाफ जंगे-आजादी की लड़ाई...
मधु लिमये : आनंद के लिए शास्त्रीय संगीत, सिद्धांत के लिए संघर्ष!
— प्रो. राजकुमार जैन —
मधु जी के अति निकट जाने का एक महत्त्वपूर्ण कारण, भारतीय शास्त्रीय संगीत था। दिल्ली में हमारे समाजवादी साथी रवींद्र...
वीडियो
“अमृतकाल में जर्जर शिक्षा और असमानता की हकीकत: नागार्जुन की पंक्तियों...
— पंकज मोहन —
आजादी के कुछ वर्ष बाद बाबा नागार्जुन ने एक कविता लिखी थी:
"घुन खाये शहतीरों पर की बारहखड़ी विधाता बांचे
फटी भीत है,...
अन्य स्तम्भ
लोहिया के शिष्य मधु लिमये पर विशेष — रामबाबू अग्रवाल
मधु लिमये (1 मई 1922 – 8 जनवरी 1995) भारत के प्रमुख समाजवादी चिंतक, निबंधकार और सक्रिय कार्यकर्ता थे, जिन्होंने विशेष रूप से 1970...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
सच्चिदा जी और उनकी रचनावली
— अरविन्द मोहन —
सच्चिदानन्द सिन्हा रचनावली का प्रकाशन हिन्दी जगत के लिए एक स्वागतयोग्य खबर होनी चाहिए। और इस उपक्रम में एक बड़ी भूमिका...
स्त्री मुगल बनाम इस्लामी नारीवाद
— अरुण कुमार त्रिपाठी —
जाने माने कवि और नारी संवेदना को अपने लेखन का विषय बनाने वाले पवन करण ने एक जोखिम भरा काम...
ज्ञानेन्द्रपति की तीन कविताएँ
1.
8 दिसंबर, 2020
(नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का बुलाया भारत-बंद)
तुम कहते हो, तुमने
किसानों को आजादी दे दी है
कि वे देश में कहीं...
स्मृतियों के कैमरे में क़ैद रघु रॉय! – श्रवण गर्ग
रघु राय को लेकर मन में कई तरह की स्मृतियाँ हैं। शुरुआत अनुपम मिश्र से करते हैं। साल 1971 में इंदौर छोड़कर प्रभाष जोशीजी...
साप्ताहिकी
मधु लिमये पर धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव की कविता!
अपना बुलबुल
घोषित कर दो
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आम विदेशी जामुन काली
पत्थर को फल घोषित कर दो।
हार गया बंगाल विजेता
दिल्ली का दल घोषित कर दो।
रोज रोज आरोप झेलने
से अच्छा...
पुस्तक का नाम : संस्कृति
— नीरज कुमार पाण्डेय —
मानव अपने जीवन में प्रायः अनेक प्रश्नों तथा समस्याओं से टक राता है और उसका समाधान तलाशता है। यद्यपि इस...



























































































