हलचल
ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करो, SIR रद्द करो के नारे के...
आज शाम यहां बिरसा चौक, साकची गोलचक्कर पर जनांदोलन एकजुटता मंच के बैनर तले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की असंवैधानिक भूमिका के खिलाफ...
विचार
उच्च शिक्षा की दशा और दिशा पर विचारोत्तेजक परिचर्चा
— मनीषा कुमारी —
NEWS LENS INDIA एवं समता मार्ग के तत्वावधान में आयोजित वैचारिक गोष्ठी में उच्च शिक्षा की वर्तमान स्थिति, उसकी गुणवत्ता, समानता...
हिंदुत्व और सामाजिक न्याय की सीमाएं
— अरुण कुमार त्रिपाठी —
उत्तर भारत की राजनीति ने वहां के समाज को त्रिशंकु की तरह अधर में लटका दिया है। यह राजनीति अपने...
वीडियो
बिटिया : अपने आकाश की उड़ान
— परिचय दास —
बिटिया का होना घर में एक फूल का खिलना भर नहीं है। फूल तो डालियों पर भी खिलते हैं, लेकिन बिटिया...
अन्य स्तम्भ
रेणु की विचारधारा व साहित्य – डॉ अवधेश कुमार राय
स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कथाकारों में रेणु ऐसे पहले रचनाकार हैं, जिन्होंने प्रेमचंद की परम्परा को आगे बढ़ाया। उन्होंहे प्रेमचन्द की तरह ही अपनी कथा साहित्य...
संवाद
“दादा धर्माधिकारी के जीवन-दर्शन में भारतीयता का बोध एवं गांधी-दर्शन”
— प्रिया कुमारी —
भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात गांधीवादी चिंतक एवं गांधी-विचार के प्रमुख व्याख्याकार दादा धर्माधिकारी की जयंती के अवसर पर विश्वनिधन...
अन्य लेख पढ़ें
डूबते-प्यासे शहरों की व्यथा
— रोहित कौशिक —
जल संकट ज्यों-ज्यों बढ़ रहा है, त्यों-त्यों जल संकट पर भाषण देने वाले फर्जी बुद्धिजीवियों की भीड़ भी बढ़ती जा...
असम में चुनाव आयोग और भाजपा की जुगलबंदी – योगेंद्र यादव
कभी कभी एक छोटी से हरकत किसी व्यक्ति के चरित्र का पर्दाफाश कर देती है। ऐसा ही चुनाव आयोग के साथ हुआ। इसी २७...
टीके जैसा जरूरी कर दिया जाए ‘कश्मीर फ़ाइल्स’ देखना!
— श्रवण गर्ग —
फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को व्यापक रूप से देखा और दिखाया जाना चाहिए। इसका देखा जाना कोविड के टीके की तरह...
Observation: Sociology, Democracy and Diversity in India
— Prof.B K Nagla —
The four books by Prof. Anand Kumar—India’s Quest for Unity in Diversity, Essays in Political Sociology, Globalisation: An Indian Perspective,...
साप्ताहिकी
शहीदे आज़म भगत सिंह
मुझे यकीन है
कुछ लोगों के जाने के बाद भी
दुनिया में रह जाएगी
अन्याय और
अत्याचार के विरुद्ध
उनकी बुलंद आवाज़
मज़बूत हाथ
तनी हुई मुट्ठियाँ
अदम्य साहस
मानवीय संवेदनाएँ
संघर्ष की कहानियाँ
उम्मीदों...
“यह देश सभी का है” : मधु लिमये
— राजगोपाल सिंह वर्मा —
मधु लिमये भारतीय जनतंत्र के उन गिने-चुने वैचारिक योद्धाओं में थे, जिन्होंने विचारधारा के साथ नीति, और राजनीति के साथ...


























































































