हलचल
लोहिया विचार मंच ने पुण्यतिथि पर आयोजित की विचार गोष्ठी वक्ताओं...
इंदौर। समाजवादी आंदोलन के पुरोधा एवं प्रखर चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया की 59वीं पुण्यतिथि के अवसर पर लोहिया विचार मंच, मध्यप्रदेश द्वारा इंदौर...
विचार
आर्थिक विकास और लोकहित: क्या भारत की अर्थव्यवस्था में आम आदमी...
— मनीषा कुमारी —
1. विकास का वास्तविक पैमाना: मानव कल्याण-
चर्चा की शुरुआत प्रोफेसर आनंद कुमार ने विकास की अवधारणा को व्यापक सामाजिक संदर्भ में...
सामाजिकता के नाम पर इतिहास, दर्शन और साहित्य का एकांगीकरण
— परिचय दास —
1. प्रतिरोध की विचारधारा आलोचना से ऊपर कैसे हो गई?
आधुनिक भारतीय बौद्धिक जीवन की एक विडंबना यह है कि सामाजिकता के...
वीडियो
इजराइल में अरब पार्टियां बनेगी सत्ता की धुरी – राज कुमार...
इजराइल के हालिया आम चुनावों के अंतिम नतीजों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके दक्षिणपंथी गठबंधन को 120 सदस्यीय संसद में 53 सीटें...
अन्य स्तम्भ
एक विस्मृत योद्धा: शेरे बिहार – योगेंद्र शुक्ल
"हिन्द का जिंदा कांप रहा है,गूंज रही है तकबीर
उकताए हैं शायद कुछ कैदी और तोड़ रहे हैं जंजीरें।"
करो या मरो (Do or die),"अंग्रेजों...
संवाद
“दादा धर्माधिकारी के जीवन-दर्शन में भारतीयता का बोध एवं गांधी-दर्शन”
— प्रिया कुमारी —
भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात गांधीवादी चिंतक एवं गांधी-विचार के प्रमुख व्याख्याकार दादा धर्माधिकारी की जयंती के अवसर पर विश्वनिधन...
अन्य लेख पढ़ें
उत्तराखंड में विभिन्न माँगों को लेकर मजदूरों का धरना
27 मई। उत्तराखंड के रुद्रपुर में श्रमिक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर शुक्रवार को जिलाधिकारी कार्यालय के गेट पर औद्योगिक मजदूरों की प्रमुख समस्याओं...
अगले 20 से 40 सालों में भारत में तीन गुना बढ़ जाएगी भूजल में...
— ललित मौर्य —
3 सितंबर। दुनिया भर में बढ़ता तापमान अपने साथ अनगिनत समस्याएं भी साथ ला रहा है, जिनकी जद से भारत भी...
अथातो ज़िन्न जिज्ञासा
— राजेश प्रसाद —
- गुरुदेव, आदमी मरकर भूत बनता है और औरतें मरकर चुड़ैल बनती हैं। ये ज़िन्न कहां से...?
- तुम्हारी जिज्ञासा अत्यंत समीचीन...
Lohia’s realization of a vibrant and active Gandhi
— Prem Singh —
"The greatest revolution of our time is, therefore, a procedural revolution, removal of injustice through a mode of action characterised by...
साप्ताहिकी
आपातकाल से अमृतकाल तक : लोकतंत्र के सवाल!
— Raj Gopal verma —
जयशंकर की पुस्तक पर परिचर्चा में इतिहास, सत्ता, पत्रकारिता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर विमर्श
आपातकाल के पचास वर्ष बाद भारतीय...
शहीदे आज़म भगत सिंह
मुझे यकीन है
कुछ लोगों के जाने के बाद भी
दुनिया में रह जाएगी
अन्याय और
अत्याचार के विरुद्ध
उनकी बुलंद आवाज़
मज़बूत हाथ
तनी हुई मुट्ठियाँ
अदम्य साहस
मानवीय संवेदनाएँ
संघर्ष की कहानियाँ
उम्मीदों...


























































































