हलचल
लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान के पाक्षिक बैठक की रपट
सहचिन्तन शिविर की समीक्षा
बैठक में उपस्थित शिविर के सारे सहभागियों ने सहचिन्तन शिविर के बारे में अपनी राय रखी। सभी साथियों ने सहचिन्तन शिविर...
विचार
नागरिक से अनुयाई बनने की यात्रा – परिचय दास
कभी नागरिक होना एक ठोस अनुभूति थी। उसमें अधिकारों की गर्मी थी, असहमति की धड़कन थी और प्रश्न करने की वह सहज आदत थी...
क्या निहत्थे पैगंबर से डर गए थे कट्टरपंथी? – अरुण कुमार...
चिंतक और लेखक सच्चिदानंद सिन्हा अपनी पुस्तक ‘द अनआर्मड प्राफेट’ ( निहत्था पैगंबर) के आखिरी अध्याय में एक महत्त्वपूर्ण सवाल उठाते हैः—क्या गांधी कामयाब...
वीडियो
वेलेंटाइन डे: भारतीय संदर्भ में एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण
— अम्बेदकर कुमार साहु —
प्रस्तुत आलेख में ‘वेलेंटाइन डे’ का समाजशास्त्रीय नजरिए से विश्लेषण किया गया है। लेख यह तर्क देता है कि वेलेंटाइन...
अन्य स्तम्भ
रामनन्दन मिश्र ग्रन्थावली : क्यों और कैसे
रामनन्दन मिश्र ग्रन्थावली के प्रकाशन की योजना और उसकी प्रासंगिकता पर विचार करने से पहले मुझे एक सैद्धान्तिक और मूलभूत प्रश्न पर विचार करना...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
आपातकाल और साहित्य
— परिचय दास —
आपातकाल की मानसिकता में साहित्य एक ऐसी अंतर्धारा की तरह है, जिसमें समय की भयावहता, अभिव्यक्ति की घुटन, और सत्ता के...
अनूपपुर में शुरू हुआ किसान अधिकार अभियान, पूरे शहडोल संभाग में चलेगा
16 अगस्त। आजादी की सतहत्तरवीं वर्षगांठ पर मप्र के शहडोल संभाग के अनूपपुर विधानसभा क्षेत्र के सिंदूरी गांव से संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा किसान...
Inside the Conscience Network: Prof Anand Kumar
Inside the Conscience Network: Anand Kumar (PhD’86), Defending Democracy in India
by John Mark Hansen
On June 25, 1975, the President of India, Fakhruddin Ali Ahmed,...
साप्ताहिकी
गांधी की ज़रूरत क्या है? – परिचय दास
गांधी की ज़रूरत किसी मूर्ति के लिए नहीं है। न चौराहे के लिए, न साल में दो दिन के पुष्पांजलि-अनुष्ठान के लिए। गांधी की...
मुक्तिबोध की आलोचना दृष्टि और काव्य रचनाएँ – डॉ अवधेशकुमार राय ...
आलोचक का प्रथम कर्तव्य है कि वह किसी भी कलाकृति के अंतर्तत्वों को - उसके प्राण तत्वों की भावना - कल्पना को ग्रहण करें...





























































































