हलचल
लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान के पाक्षिक बैठक की रपट
सहचिन्तन शिविर की समीक्षा
बैठक में उपस्थित शिविर के सारे सहभागियों ने सहचिन्तन शिविर के बारे में अपनी राय रखी। सभी साथियों ने सहचिन्तन शिविर...
विचार
भारत-अमरीका डील से किसानी का संकट और गहरा हो जाएगा –...
इन पंक्तियों का लेखक पिछले कुछ समय से बार-बार यह आगाह करता रहा है कि चाहे मोदी सरकार कुछ भी कहे, ट्रम्प इसमें कामयाब...
नागरिक से अनुयाई बनने की यात्रा – परिचय दास
कभी नागरिक होना एक ठोस अनुभूति थी। उसमें अधिकारों की गर्मी थी, असहमति की धड़कन थी और प्रश्न करने की वह सहज आदत थी...
वीडियो
एपस्टीन फाइल्स यानी पूंजीवाद का घिनौना चेहरा – अरुण कुमार त्रिपाठी
जिन्हें पूंजीवाद से प्रेम है और जो मानवता का भविष्य इसी व्यवस्था में देखते हैं उन्हें एपेस्टीन फाइल्स की रोशनी में अपनी मान्यताओं पर...
अन्य स्तम्भ
विचारधारा के पार खड़ा एक समाजशास्त्री – परिचय दास
दिल्ली विश्वविद्यालय के गलियारों में एक समय ऐसा भी था जब समाजशास्त्र सिर्फ़ अनुशासन नहीं, संयमित विवेक की तरह पढ़ाया जाता था। प्रो. आंद्रे...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
46 साल बाद हुए जल सम्मेलन से क्या मिला?
— जुंबिश —
बढ़ते जल संकट पर चर्चा करने के लिए करीब आधी सदी के बाद दुनिया एक बार फिर इकट्ठा हुई। लेकिन, इस संकट...
विवेकानंद के जन्मदिन पर!
आज विवेकानंद के जन्मदिन पर उन्हें याद करते हुए उनका वो कथन याद आ रहा है जो उन्होंने सन् 1900 के आठ अप्रैल को...
जीवन की मोह नगरी
— इल्मा बदर —
जीवन की मोह नगरी में,
कोई कहीं छूट जाएगा।
कर्तव्य जो सिंचोगे तो,
प्रेम कहीं सूख जाएगा।
सपनों के भारी मेले में,
अपना कोई खो जायेगा।
हँसी...
André Béteille (1934–2026) – B. K. Nagla
André Béteille, one of India’s most distinguished sociologists, passed away on 3 February 2026 in Delhi at the age of 91, following age-related illness....
साप्ताहिकी
गांधी की ज़रूरत क्या है? – परिचय दास
गांधी की ज़रूरत किसी मूर्ति के लिए नहीं है। न चौराहे के लिए, न साल में दो दिन के पुष्पांजलि-अनुष्ठान के लिए। गांधी की...
मुक्तिबोध की आलोचना दृष्टि और काव्य रचनाएँ – डॉ अवधेशकुमार राय ...
आलोचक का प्रथम कर्तव्य है कि वह किसी भी कलाकृति के अंतर्तत्वों को - उसके प्राण तत्वों की भावना - कल्पना को ग्रहण करें...


























































































