हलचल
राज्य सम्मेलन के दूसरे दिन संगठनात्मक मजबूती और जनसंघर्षों को तेज...
लुगू बुरु घंटाबाड़ी धोरोम गढ़, ललपनिया (गोमिया, बोकारो) में 13–14 अप्रैल 2026 को आयोजित झारखंड जनाधिकार महासभा राज्य सम्मेलन के दूसरे दिन के विमर्श...
विचार
डॉ. अंबेडकर: अंधेरे में रोशनी की तलाश
— वेदव्यास —
भारत इस दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है इसीलिए यहां लोक की अपनी अलग कहानी है और तंत्र की अपनी कहानी है।...
क्या महिला आरक्षण में धार्मिक कोटा संभव है? – परिचय दास
भारतीय लोकतंत्र की खासियत यह है कि यहाँ हर नीति अपने साथ एक नई उलझन मुफ्त में लेकर आती है। महिला आरक्षण भी इससे...
वीडियो
बिहार की शिक्षा~ व्यवस्था और राजनीति: सुधार या दिखावा?
— परिचय दास —
बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर लिखना किसी शांत झील का वर्णन करना नहीं है; यह उस जल को पढ़ना है जिसमें...
अन्य स्तम्भ
तोड़ने नहीं जोड़ने के लिए जाने जाएंगे चंद्रशेखर – अरुण कुमार...
चंद्रशेखर(पूर्व प्रधानमंत्री) जब सन 1964 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी छोड़कर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो रहे थे तो इंदिरा गांधी ने उनसे पूछा कि...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
‘राष्ट्र के नाम’ संदेश बनाम ‘राष्ट्र का’ संदेश
— श्रवण गर्ग —
जनता अपने प्रधानमंत्री से यह कहने का साहस नहीं जुटा पा रही है कि उसे उनसे भय लगता है। जनता उनसे...
धर्मान्ध राष्ट्रवाद की काट भारतीय समाजवादियों के सकारात्मक राष्ट्रवाद से ही की जा सकती...
— योगेन्द्र यादव —
मुलायम सिंह यादव का दिवंगत होना एक गहरे सवाल पर सोच-विचार करने का एक मौका है कि : हमारे आज के...
आरएसएस के बारे में देवानूर महादेव की किताब ने मचाई धूम
8 जुलाई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आलोचना करती एक नई कन्नड़ पुस्तक औपचारिक लॉन्च से पहले ही बेंगलुरु में धड़ल्ले से बिक रही है।...
A conversation about secularism, conversion and the nature of religion.
— MOHAN GURUSWAMY —
Modern religions are akin to great commercial enterprises like Coke and Pepsi, or even TCS, constantly seeking greater market share while...
साप्ताहिकी
पुस्तक का नाम : संस्कृति
— नीरज कुमार पाण्डेय —
मानव अपने जीवन में प्रायः अनेक प्रश्नों तथा समस्याओं से टक राता है और उसका समाधान तलाशता है। यद्यपि इस...
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है…
— डॉ. शुभीत कौशिक —
अरुंधति रॉय द्वारा उनकी माँ मैरी रॉय और उनके इर्द-गिर्द फैले हुए जीवन-संसार के बारे में लिखी गई भावपूर्ण पुस्तक...



























































































