हलचल
लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान के पाक्षिक बैठक की रपट
सहचिन्तन शिविर की समीक्षा
बैठक में उपस्थित शिविर के सारे सहभागियों ने सहचिन्तन शिविर के बारे में अपनी राय रखी। सभी साथियों ने सहचिन्तन शिविर...
विचार
क्या निहत्थे पैगंबर से डर गए थे कट्टरपंथी? – अरुण कुमार...
चिंतक और लेखक सच्चिदानंद सिन्हा अपनी पुस्तक ‘द अनआर्मड प्राफेट’ ( निहत्था पैगंबर) के आखिरी अध्याय में एक महत्त्वपूर्ण सवाल उठाते हैः—क्या गांधी कामयाब...
भारत गणराज्य के स्वधर्म का मूल सूत्र है सेकुलरवाद – योगेन्द्र...
भारत गणराज्य की स्थापना छिहत्तर वर्ष पहले हुई थी, लेकिन उसके स्वधर्म की बुनियाद कोई तीन हज़ार साल पहले पड़ चुकी थी। आज का...
वीडियो
आज के लंपट दौर में भूपेंद्र नारायण मंडल के बारे में...
जनतंत्र में अगर कोई पार्टी या व्यक्ति यह समझे कि वही जब तक शासन में रहेगा तब तक संसार में उजाला रहेगा, वह गया...
अन्य स्तम्भ
समाजवादी चिंतक बाबू भूपेंद्र नारायण मंडल – आशीष रंजन
जनतंत्र में कोई शासक या पार्टी जब यह समझे कि जब तक वह शासन में है तब तक उजाला रहेगा, वह गया तो फिर...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
उत्तराखंड की महिलाओं का सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन, किरण नेगी के हत्यारों को...
11 नवम्बर। भारतीय न्यायिक संस्थाओं के बेतुके फैसलों से आहत उत्तराखंड की महिलाओं का आक्रोश किरण नेगी के हत्यारों को बरी किए जाने के...
मेरी ख्वाहिश! – प्रोफेसर राजकुमार जैन
तमाम उम्र मुझे इस बात का फख्र रहा है कि मैंने अपनी वैचारिक आंखें सोशलिस्ट तहरीक में खोली थीं। लड़कपन, स्कूल के तालिबेइल्म...
राष्ट्रीय चिह्न का विकृतिकरण एक दंडनीय अपराध भी है
अशोक स्तंभ का चार शेरों वाला स्तंभ भारत के राष्ट्रीय चिह्न के रूप में विख्यात है। पर जिस राष्ट्रीय चिह्न के नाम पर चार...
Why the Swachh Bharat Abhiyan was Bound to Fail – MOHAN...
Reading out last year’s PMO JS budget Nirmala Sitharaman happily announced that the Swachh Bharat Abhiyan was a complete success and once again announced...
साप्ताहिकी
गांधी की ज़रूरत क्या है? – परिचय दास
गांधी की ज़रूरत किसी मूर्ति के लिए नहीं है। न चौराहे के लिए, न साल में दो दिन के पुष्पांजलि-अनुष्ठान के लिए। गांधी की...
मुक्तिबोध की आलोचना दृष्टि और काव्य रचनाएँ – डॉ अवधेशकुमार राय ...
आलोचक का प्रथम कर्तव्य है कि वह किसी भी कलाकृति के अंतर्तत्वों को - उसके प्राण तत्वों की भावना - कल्पना को ग्रहण करें...



























































































