हलचल
आज देश में बड़ा तमाशा चल रहा है: आखिर थमेगा कहां
वास्तविकता है कि जब से (2014) भाजपा संघ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बनी है तब से देश की पूरी...
विचार
आखिर नक्सली दिमागी क्यों होते हैं – अरुण कुमार त्रिपाठी
नक्सली दिमागदार होते हैं यह धारणा पुलिसिया सोच से उत्पन्न हुई है। इसलिए प्रधानमंत्री जब इस साल पंद्रह अगस्त को लाल किले के प्राचीर...
राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं की विफलता से युवाओं...
— प्रिया कुमारी —
समता मार्ग एवं न्यूज़ लेंस इंडिया के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय गोष्ठी में प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रोफेसर अरुण कुमार, वरिष्ठ पत्रकार प्रोफेसर...
वीडियो
कॉर्पोरेट कर्ज माफी और बैंकों की सेहत!
— प्रिया कुमारी —
सत्र की शुरुआत में कॉरपोरेट ऋण, बैंकों द्वारा बड़े ऋणों के राइट-ऑफ, आर्थिक असमानता, राजनीतिक-कारपोरेट संबंधों और लोकतांत्रिक जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण...
अन्य स्तम्भ
‘कल्पना’ के कृष्णनाथ
यायावर विचारक और बौद्ध दर्शन के अध्येता कृष्णनाथ के यात्रा-वृतांतों का तो मुरीद रहा ही हूँ। पिछले कुछ समय से उनका वैचारिक लेखन भी...
संवाद
“दादा धर्माधिकारी के जीवन-दर्शन में भारतीयता का बोध एवं गांधी-दर्शन”
— प्रिया कुमारी —
भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात गांधीवादी चिंतक एवं गांधी-विचार के प्रमुख व्याख्याकार दादा धर्माधिकारी की जयंती के अवसर पर विश्वनिधन...
अन्य लेख पढ़ें
कलाओं के बीच संवाद
— विमल कुमार —
हिंदी साहित्य की दुनिया में आपसी संवाद का संकट आज भी विद्यमान है। ऐसे में कलाओं की विभिन्न विधाओं के बीच...
कॉप 27 : सूखे से निपटने के लिए शर्म अल-शेख में हुई एक वैश्विक...
आईपीसीसी का अनुमान है कि जलवायु में आते बदलावों के चलते अगले 28 वर्षों में वैश्विक स्तर पर 75 फीसदी लोग सूखे और पानी...
Gen Z Couldn’t Be Crushed
Swatantra Bharadwaj is reportedly booked under the POCSO Act. But another disturbing question deserves an answer. The Indian Express reported that police claimed CCTV...
साप्ताहिकी
राखी की डोरी और मनुष्य की स्वतंत्रता
— परिचय दास —
रक्षाबंधन आते ही घर के भीतर एक बहुत पुरानी ध्वनि लौट आती है। कहीं थाली में रोली सजती है, कहीं अक्षत की...
परंपरा से परे नहीं, समय के भीतर : तुलसी की कविता...
— परिचय दास —
“नाना पुराण निगमागम सम्मतं यद् रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।
स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति॥”
और इसी विनम्र आत्मस्वीकार को तुलसी एक दूसरी जगह और अधिक...



























































































