हलचल
आज देश में बड़ा तमाशा चल रहा है: आखिर थमेगा कहां
वास्तविकता है कि जब से (2014) भाजपा संघ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बनी है तब से देश की पूरी...
विचार
संवाद और संग्राम के बीच हमारी सभ्यता – अरुण कुमार त्रिपाठी
वैसे तो पूरी मानव सभ्यता ही संवाद और संग्राम के बीच उलझी हुई है लेकिन भारत विशेष तौर पर इसका शिकार है। जंतर मंतर...
गालियां मोहब्बत की, गालियां नफरत की और गालियां गुस्से की
— अरुण कुमार त्रिपाठी —
जंतर मंतर प्रदर्शन और अनशन के दौरान जेन-जी के बयानों और पोस्टरों में सरकार और उसके पदाधिकारियों के लिए गालियां...
वीडियो
भारत के राज्य खनिज रॉयल्टी के मामले में केंद्र सरकार के...
— मिथिलेश कुमार दांगी —
भारतीय संविधान के अनुसार भारत राज्यों का संघ है । इसका विश्लेषण करेंगे तो राज्यों को भी अपने लिए कुछ...
अन्य स्तम्भ
तुलसी : एक जीवित पाठ के भीतर प्रवेश
— परिचय दास —
।। एक ।।
समकालीन तुलसी-पाठ में पाठ की बहुस्तरीयता, सत्ता-संरचनाएँ, भाषा, वंचित आवाज़ें, जेंडर, जाति, प्रकृति, कथन-तकनीक, अंतर्पाठीयता, पाठक-समुदाय और बदलते अर्थ-संदर्भ...
संवाद
“दादा धर्माधिकारी के जीवन-दर्शन में भारतीयता का बोध एवं गांधी-दर्शन”
— प्रिया कुमारी —
भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात गांधीवादी चिंतक एवं गांधी-विचार के प्रमुख व्याख्याकार दादा धर्माधिकारी की जयंती के अवसर पर विश्वनिधन...
अन्य लेख पढ़ें
झारखंड में बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए बच्चों और अभिभावकों का प्रदर्शन
14 अप्रैल। झारखंड के लातेहार जिला अंतर्गत गारू प्रखंड के कई गाँवों के बच्चे और उनके माता-पिता बड़ी संख्या में प्रखंड मुख्यालय पर इकट्ठे...
60 करोड़ खून पसीना बहाने वाले कामगारों, मजदूरों, श्रमजीवियों पर जुल्म की इंतहा!
— राजकुमार जैन —
सोशलिस्ट नेता सुरेंद्र मोहन की याद मैं आयोजित आज एक श्रद्धांजलि सभा न रहकर स्टडी सर्किल के रूप में परिवर्तित हो...
परमाणु ऊर्जा में विदेशी निवेश का रास्ता साफ करने में क्यों जुटी है मोदी...
— राजकुमार सिन्हा —
केन्द्र सरकार ‘परमाणु ऊर्जा अधिनियम-1962’ के तहत ‘परमाणु ऊर्जा केन्द्रों’ का विकास और संचालन करती है। इस अधिनियम के तहत फिलहाल...
Jantar Mantar : A Fertile Ground
— Jogi Panghaal —
In the centre of New Delhi stands an unusual institution. It has no vice-chancellor, admissions office, classrooms or examinations, and awards...
साप्ताहिकी
परंपरा से परे नहीं, समय के भीतर : तुलसी की कविता...
— परिचय दास —
“नाना पुराण निगमागम सम्मतं यद् रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।
स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति॥”
और इसी विनम्र आत्मस्वीकार को तुलसी एक दूसरी जगह और अधिक...
चन्द्रशेखर : यादें बेतरतीब (असंपादित किश्त-1)
— अनिल अत्री —
आज चन्द्रशेखर जी का जन्मदिन है. सुबह से मन उदास है. उसके अपने कारण हैं. परसों ही चन्द्रशेखर जी के सचिव...






























































































