हलचल
भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जन्मशताब्दी कार्यक्रम में विचार से जुड़े साथियों का...
— प्रोफेसर राजकुमार जैन —
आम लोगों की निगाह में आज सियासत एक पेशा बनकर रह गई है। विचारधारा और नेता कपड़े बदलने की तरह...
विचार
उच्च शिक्षा की दशा और दिशा पर विचारोत्तेजक परिचर्चा
— मनीषा कुमारी —
NEWS LENS INDIA एवं समता मार्ग के तत्वावधान में आयोजित वैचारिक गोष्ठी में उच्च शिक्षा की वर्तमान स्थिति, उसकी गुणवत्ता, समानता...
हिंदुत्व और सामाजिक न्याय की सीमाएं
— अरुण कुमार त्रिपाठी —
उत्तर भारत की राजनीति ने वहां के समाज को त्रिशंकु की तरह अधर में लटका दिया है। यह राजनीति अपने...
वीडियो
बिटिया : अपने आकाश की उड़ान
— परिचय दास —
बिटिया का होना घर में एक फूल का खिलना भर नहीं है। फूल तो डालियों पर भी खिलते हैं, लेकिन बिटिया...
अन्य स्तम्भ
रेणु की विचारधारा व साहित्य – डॉ अवधेश कुमार राय
स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कथाकारों में रेणु ऐसे पहले रचनाकार हैं, जिन्होंने प्रेमचंद की परम्परा को आगे बढ़ाया। उन्होंहे प्रेमचन्द की तरह ही अपनी कथा साहित्य...
संवाद
“दादा धर्माधिकारी के जीवन-दर्शन में भारतीयता का बोध एवं गांधी-दर्शन”
— प्रिया कुमारी —
भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात गांधीवादी चिंतक एवं गांधी-विचार के प्रमुख व्याख्याकार दादा धर्माधिकारी की जयंती के अवसर पर विश्वनिधन...
अन्य लेख पढ़ें
एमएसपी की कानूनी गारंटी और अन्य मांगों को लेकर शुरू होगा आंदोलन
# संयुक्त किसान मोर्चा 500 जिलों में “वादाखिलाफी विरोधी सभा” आयोजित करेगा
# किसान आंदोलन की लंबित मांगों को लेकर 31 जुलाई को देशभर में...
रचना की तरह आलोचना
— गोपेश्वर सिंह —
अशोक वाजपेयी मूलतः कवि हैं। उनकी कविताएँ अपने समकालीनों में अलग तरह की हैं- ख़ासकर अपनी विषय-वस्तु में। इसके अतिरिक्त उन्होंने...
लाडली, जो लोहिया के दीवाने थे
— मस्तराम कपूर —
चौबीस सितंबर, 1997 रात साढ़े नौ बजे के आसपास लाडली मोहन निगम वेस्टर्न कोर्ट की पहली मंजिल पर टीवी में प्रधानमंत्री...
Observation: Sociology, Democracy and Diversity in India
— Prof.B K Nagla —
The four books by Prof. Anand Kumar—India’s Quest for Unity in Diversity, Essays in Political Sociology, Globalisation: An Indian Perspective,...
साप्ताहिकी
शहीदे आज़म भगत सिंह
मुझे यकीन है
कुछ लोगों के जाने के बाद भी
दुनिया में रह जाएगी
अन्याय और
अत्याचार के विरुद्ध
उनकी बुलंद आवाज़
मज़बूत हाथ
तनी हुई मुट्ठियाँ
अदम्य साहस
मानवीय संवेदनाएँ
संघर्ष की कहानियाँ
उम्मीदों...
“यह देश सभी का है” : मधु लिमये
— राजगोपाल सिंह वर्मा —
मधु लिमये भारतीय जनतंत्र के उन गिने-चुने वैचारिक योद्धाओं में थे, जिन्होंने विचारधारा के साथ नीति, और राजनीति के साथ...


























































































