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अर्थव्यवस्था

विषमता की खाई में विकास की समाधि

— जयराम शुक्ल — लोकभाषा के बडे़ कवि कालिका त्रिपाठी ने कभी रिमही में एक लघुकथा सुनाई थी। कथा कुछ ऐसी थी कि..दशहरे के दिन...

भूख है तो सब्र कर

— जयराम शुक्ल — मुट्ठीभर गोबरी का अन्न लेकर लोकसभा पहुंचे डॉ राममनोहर लोहिया ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरूसे कहा- लीजिए, आप भी खाइए इसे,...

ठेका कर्मचारी होना यानी ठगे जाना : मारुति की मिसाल

— रवींद्र गोयल — भारत में मजदूरों का बहुलांश (94 प्रतिशत) असंगठित क्षेत्र में ही काम  करता है जहाँ  काम की हालत बहुत  खराब है,...

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