— परिचय दास — विश्वविद्यालय की इमारतें दूर से जितनी भव्य दिखती हैं, भीतर से उतनी ही खामोश होती जाती हैं। यह खामोशी किसी ध्यानस्थ...
— बी. के. नागला — जर्मन दार्शनिक और सामाजिक सिद्धांतकार युर्गेन हाबर्मास (Jürgen Habermas) बीसवीं और इक्कीसवीं शताब्दी के सबसे प्रभावशाली विचारकों में से एक...
भारत गणराज्य के स्वधर्म की इस शृंखला के पहले लेख में हमने सर्वधर्मसमभाव यानी सेकुलरवाद की चर्चा की थी। अब हम स्वधर्म के दूसरे...
मैं कोई कवि नहीं हूँ। कवि सम्मेलनों का श्रोता भी नहीं। काव्य की साहित्यिक आलोचना सी मेरा दूर-दराज़ का भी रिश्ता नहीं है। बस...
एक ओर भारत सरकार देश में भारतीय ज्ञान प्रणाली कायम करने का दावा कर रही है तो दूसरी ओर भारतीय विश्वविद्यालयों में विद्वता का...
— परिचय दास — हिंदी कोई एक भाषा नहीं, वह एक चलता हुआ समय है~जिसमें स्मृति है, स्वप्न ; सत्ता और प्रतिरोध भी। वह केवल...
प्रकृति कितनी रहस्यमय है! एक छिपकली है - जीला मान्स्टर। वह साल भर में मात्र एक या दो बार खाती है। वैज्ञानिकों ने उसकी...
— डॉ योगेन्द्र — मेरी आंखों के सामने नरेंद्र मोदी की एक चमकती तस्वीर तैर रही है। लंबे बाल, आत्मविश्वास से भरा चेहरा और आवाज...
राष्ट्रीय प्रेस दिवस भारतीय लोकतांत्रिक चेतना के उस उजले क्षण की याद दिलाता है, जब शब्दों को स्वतंत्रता मिली और समाज को अपनी आवाज़।...
— परिचय दास — बिरसा मुंडा की स्मृति में कोई भी दिन साधारण नहीं रह सकता। जंगलों की नमी, पत्तों की सरसराहट, पहाड़ों की ढलानों...