आज पूरी दुनिया देख रही है कि पूरी दुनिया की भलाई वैज्ञानिक समाजवादी व्यवस्था में ही बसी है। वैज्ञानिक समाजवाद दुनिया से लेता या उसे बांटता नहीं है। यह पूरी जनता को जोड़ता है और देश दुनिया के तमाम मानवीय और प्राकृतिक संसाधनों को एकजुट करता है और उन्हें पूरे समाज और देश की जनता के कल्याण, विकास व उत्थान के लिए प्रयोग करता है। बांटने, तोड़ने और ध्वस्त करने के विचार लुटेरी सामंती और पूंजीवादी व्यवस्था के विचार रहे हैं। पूंजीवादी साम्राज्यवादी व्यवस्था पूरी दुनिया को लूटती है, पूरी दुनिया की जनता पर, दुनिया के सारे संसाधनों पर कब्जा करना चाहती है, उसे अपनी प्रभुत्व में लेना चाहती है और उसका मुख्य मकसद केवल और केवल मुनाफा कमाना, मुनाफा बढ़ाना और अपनी तिजोरियां भरना ही रह गया है, जनकल्याण से उसका कोसों दूर का भी कोई वास्ता नहीं रह गया है।
दुनिया के महानतम क्रांतिकारी विचारक और लेखक मार्क्स और एंगेल्स के वैज्ञानिक समाजवाद के विचारों को आगे बढ़ते हुए, 1917 की रूसी के माध्यम से महान लेनिन के नेतृत्व में किसानों मजदूरों की सरकार ने रूस में मानवीय इतिहास में सबसे पहले धरती पर उतारा और मानव इतिहास में किसानों मजदूरों की सत्ता और सरकार कायम करके पहली दफा उन्हें अपना भाग्यविधाता बनाया। सोवियत यूनियन की वैज्ञानिक समाजवादी व्यवस्था में किसानों मजदूरों की सत्ता और सरकार को राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक संगठन के रूप में धरती पर उतारा गया और इस व्यवस्था के द्वारा तमाम प्राकृतिक संसाधनों का जनता के बीच न्यायपूर्ण बंटवारा किया गया। सारे उत्पादन को सामाजिक जीवन को आगे बढ़ाने और मजबूत करने के लिए किया गया और सोवियत यूनियन की जनता ने मिलकर और एकजूट होकर उत्पादन प्रणाली को विकसित किया।
राजनेता जो बोते हैं, वही काटते हैं। अगर वे जनता में भाईचारा, एकजुटता और सद्भाव बोयेंगे तो वहां अच्छाई उपजेगी। अगर वे विवाद और झगड़े बोयेंगे, तो वहां झंझट और विवाद बढ़ेंगे। वर्तमान में इन दोनों आपसी विरोधी विचारों की व्यवस्थाओं को पूरी दुनिया में देखा जा सकता है। समाजवाद जहां जनता को शिक्षित, संगठित और एकजुट करता है, पूंजीवादी व्यवस्था पूरी दुनिया को, जनता को बांटती है, उसे अलग-थलग करती है, उसे जाति, धर्म, वर्ण, क्षेत्र और नस्ल के आधार पर बांटती है, उसकी आपसी एकता को तोड़ती है।
पूरी वैज्ञानिक समाजवादी व्यवस्था, उसकी सरकार और सत्ता ने दुनिया में एकजुटता का यही काम किया गया है। रूस, चीन, वियतनाम, क्यूबा, कोरिया, ब्राजील, वैनेजुएला और पूर्वी यूरोपियन देशों में उत्पादन, जनता की जरूरतों के हिसाब से किया गया। वहां जनता के अंदर आपसी भाईचारा कायम किया गया, सारी की सारी नीतियां जनता के कल्याण के लिए बनाई गईं। सबको शिक्षा, सबको काम, जमीन सबकी, के नारों को अमलीजामा पहनाकर जमीन पर उतारा गया। सब को भोजन, सबको कपड़ा, सबको घर, सबको काम, जमीन सबकी, सबको अनिवार्य और आधुनिक शिक्षा दी गई, सबको आधुनिक और मुफ्त इलाज दिया गया, सब बुजुर्गों को पेंशन, सारी जनता का सांस्कृतिक स्तर सुधारा गया, सबको लिखना, पढ़ना, नाच गाना और मनोरंजन उपलब्ध कराया गया।
हजारों साल पुराने जुल्मों सितम, गरीबी, अन्याय, शोषण, भ्रष्टाचार, अभाव, वंचना, पिछड़ेपन और अभावग्रस्तता को जड़ से खत्म कर दिया गया। कुछ लोगों की बेहतरी के स्थान पर, पूरे समाज की कल्याण की नीतियां, उत्पादन और वितरण किया गया। इन्हीं महान कार्यों की वजह से समाज दनादन आगे बढ़ते चले गए। अज्ञानता, अंधविश्वास, धर्मांधता और पाखंडों का साम्राज्य धराशाई करके, ज्ञान-विज्ञान, विवेक, खोज, अन्वेषण और विवेक का जीता जागता साम्राज्य कायम किया गया और देखते ही देखते वैज्ञानिक समाजवादी व्यवस्था के देशों और उसकी आंखें खोलने वाली उपलब्धियां, पूरी दुनिया की सिरमोर बन बैठीं।
वैज्ञानिक समाजवाद की अद्भुत और महान उपलब्धियों के बाद, पूंजीवादी लुटेरी व्यवस्था पूरी तरह से बौखला गई है। उसके वैश्विक लूट, वैश्विक प्रभुत्व, आतंकवादी, युध्दोन्मादी और पूरी दुनिया को कब्जाने की नीतियों और सोच की नींव हिल गई है। आज उन्होंने वैज्ञानिक समाजवादी व्यवस्था को अपना सबसे बड़ा जानी दुश्मन मान लिया और वैज्ञानिक समाजवाद की कार्यप्रणालियों में खलल डालना शुरू कर दिया और समाजवादी दुनिया के खिलाफ, इन साम्राज्यवादी पूंजीवादी लुटेरों ने दुनिया की तमाम लुटेरी पूंजीवादी, साम्प्रदायिक और फासीवादी ताकतों को एकजुट करना शुरू कर दिया और अब वे एक-एक करके, जनता के दुश्मन निजामों का समर्थन करने लगे हैं और उन्हें पुनर्स्थापित करने में पूरी तरह से जुट गए हैं।
वैज्ञानिक समाजवादी देशों के खिलाफ, अमेरिका और यूरोप के लुटेरे, साम्राज्यवादी और जनविरोधी निजामों को एकजुट करके, अमेरिका ने नाटो को बरकरार रखा। सारी संधियों और नैतिकता को तोड़ मरोड़ कर, नाटो के तमाम देश रूस के संसाधनों को लूटने और रूस को तोड़ने और उसके टुकड़े-टुकड़े करने के लिए एकजुट हो रहे हैं और अब रूस यूक्रेन युद्ध में तमाम नाटो के देश, यूक्रेन की आर्थिक और सैन्य मदद कर रहे हैं।
उधर एशिया में इन साम्राज्यवादी लुटेरी ताकतों द्वारा, समाजवादी नीतियों को लागू करने वाले चीन को घेरने की तमाम चालें चली जा रही हैं। अमेरिका चीन के विरोधियों को उकसाने की पूरी कोशिश कर रहा है। उसके खिलाफ लामबंदी कर रहा है, तरह-तरह के गुट बना रहा है, उसके खिलाफ लोगों को भड़काया जा रहा है। ये लुटेरे चीन की उपलब्धियों और महाशक्ति बनने से लगातार परेशान हो रहे हैं। आज हालात इतने खराब हो गए हैं कु पूरी दुनिया में इनका भेद खुलने के बाद भी, ये तमाम ताकतें पीछे हटने और यूक्रेन का साथ छोड़ने को बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं।
इस प्रकार आज हम देख रहे हैं कि लुटेरी पूंजीवादी साम्राज्यवादी व्यवस्था के पास दुनिया को देने के लिए कुछ भी नहीं है। जन विकास, चुनाव, डेमोक्रेसी, स्वतंत्रता, जन कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य की जन कल्याण की नीतियों को उन्होंने छोड़ दिया है। अब वह सिर्फ पूंजीपतियों के हितों को आगे बढ़ाने में लगी हुई है। उनके लिए पूरी दुनिया से मुनाफा कमाना और पूरी दुनिया के संसाधनों को लूटना और उन्हें अपने कब्जे में करना है और दूसरे देशों में हस्तक्षेप करके वहां की सरकारों को अस्थिर करना और उन देशों पर अपना कब्जा करना ही, इनका एक मात्र काम और उद्देश्य रह गया है। अब इन सब मामलों को लेकर वे सब पूरी दुनिया के सामने नंगे हो गए हैं और उनकी लुटेरी नीतियों ने, पूरी दुनिया की जनता के सामने, उनकी पोल खोल दी है। अब तो यह हकीकत भी सामने आ रही है कि उनकी पोल खुलने के कारण, दुनिया की तमाम लुटेरी साम्राज्यवादी ताकतें बौखला गई हैं।
वैज्ञानिक समाजवादी व्यवस्था को प्रत्येक देश और काल की परिस्थितियों के अनुसार लागू किया जा सकता है, ढाला जा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में वैज्ञानिक समाजवाद, उसकी सरकार और सत्ता के निर्माण में और उसकी नीतियों को लागू करने में जो खामियां और कमियां आ गई थीं, उन्हें अब दुनिया की सारी वैज्ञानिक समाजवादी ताकतें मिलकर दूर करने की कोशिश कर रही हैं। आज वैज्ञानिक समाजवादी व्यवस्था के मिशन को आगे बढ़ाना ही सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है। आज पूरी दुनिया के किसान मजदूर छात्र नौजवान और तमाम मेहनतकश देख रहे हैं और समझ रहे हैं कि वैज्ञानिक समाजवादी व्यवस्था, किसानों मजदूरों की सरकार और सत्ता, संस्कृति, सोच और शासन प्रशासन से ही दुनिया की जनता की तमाम समस्याओं और परेशानियों को खत्म किया जा सकता है।
आज वैज्ञानिक समाजवादी व्यवस्था और किसानों मजदूरों की सत्ता और सरकार ही दुनिया और मानवता का भविष्य और आशा और विश्वास बन रह गई है। आज पूरी दुनिया की जनता देख रही है कि दुनिया में बरसों बरस से चली आ रही गरीबी, भुखमरी, शोषण, जुल्म, अन्याय, आर्थिक सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक असमानता, सांप्रदायिकता, जातिवाद, क्षेत्रियतावाद, शोषणकारी पूंजीवादी साम्राज्यवादी व्यवस्था और सोच का मुकाबला और खत्मा केवल किसानों मजदूरों की सरकार और सत्ता ही कर सकती है। वैज्ञानिक समाजवादी व्यवस्था और किसानों मजदूरों की सरकार और सत्ता ही दुनिया की जनता को न्याय, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सुरक्षा, विकास, समता, समानता, शांति अमनचैन और भाईचारा प्रदान कर सकती है। आओ, दुनिया के भविष्य यानी वैज्ञानिक समाजवाद और किसानों मजदूरों की सरकार और सत्ता की राजनीति और व्यवस्था को ही अपनी कथनी और करनी बनाएं। समाजवाद ही दुनिया की आशा और मानवता का भविष्य है।
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