बिहार की अस्मिता के शिल्पकार : डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा

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— परिचय दास — इतिहास का एक अद्भुत स्वभाव है। वह कभी–कभी ऐसे व्यक्तियों को जन्म देता है, जिनकी उपस्थिति किसी प्रदेश की नियति को...

संस्थानों की दीवारों में छिपी ईर्ष्या – परिचय दास

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संस्थानों की दीवारें केवल ईंट और पत्थर से नहीं बनी होतीं; वे महत्त्वाकांक्षाओं, आशंकाओं और अनकहे प्रतिस्पर्धात्मक भावों से भी निर्मित होती हैं। जहाँ...

डॉ. रामचंद्र प्रधान का अनंत में महाप्रस्थान – प्रोफेसर राजकुमार जैन

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तकरीबन साठ वर्षों तक प्रधान जी से मेरे आत्मीय संबंध बने रहे। समाजवादी विचारधारा में गहरी आस्था रखने वाले डॉ. प्रधान ताउम्र समाजवादी तवारीख...

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस : जेंडर और नस्ल के सवाल

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— डॉ. शुभनीत कौशिक — एआई आधारित सॉफ्टवेयर और एल्गोरिद्म में अंतर्निहित जेंडर और नस्ल सम्बन्धी पूर्वाग्रह की विस्तृत पड़ताल करते हुए टिमनिट गेब्रू और...

भारत की लोकसंस्कृति में शिव — राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी

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भारत की लोकसंस्कृति शिवमय है। पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक प्रत्येक जनपद में शिव की कीर्ति है। प्रत्येक जनजाति के गीतों...

कला-साहित्य के बहुवचन : शिव

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— परिचय दास — शिव के रहस्य में वसंत है, मुस्कान में कलाएं । भंगिमा में लीला है तो संपूर्ण जीवन प्रसादमय। हम भारत के...

शिव : एक सुगंध

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— परिचय दास — शिव, वह नाम जिसे लेते ही एक अद्भुत शीतलता और ऊर्जस्विता का अनुभव होता है। उनकी उपस्थिति से ही एक अलौकिक सुगंध...

साथी नानक चंद नहीं रहे! – राजकुमार जैन

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50 सालों से भी अधिक ‌ समय के साथी नानक ‌ को आज यमुना किनारे बने हुए निगमबोध घाट ‌ पर बड़ी तादाद में...

नेहरू और निराला : रामचंद्र गुहा

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कई सालों पहले, समाजशास्त्री त्रिलोकी नारायण पाण्डेय ने मुझसे एक घटना का ज़िक्र किया था, जो जवाहरलाल नेहरू और हिंदी के प्रसिद्ध कवि सूर्यकांत...

वेलेंटाइन डे: भारतीय संदर्भ में एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण

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— अम्बेदकर कुमार साहु — प्रस्तुत आलेख में ‘वेलेंटाइन डे’ का समाजशास्त्रीय नजरिए से विश्लेषण किया गया है। लेख यह तर्क देता है कि वेलेंटाइन...