कला-साहित्य के बहुवचन : शिव
— परिचय दास —
शिव के रहस्य में वसंत है, मुस्कान में कलाएं । भंगिमा में लीला है तो संपूर्ण जीवन प्रसादमय। हम भारत के...
शिव : एक सुगंध
— परिचय दास —
शिव, वह नाम जिसे लेते ही एक अद्भुत शीतलता और ऊर्जस्विता का अनुभव होता है। उनकी उपस्थिति से ही एक अलौकिक सुगंध...
साथी नानक चंद नहीं रहे! – राजकुमार जैन
50 सालों से भी अधिक समय के साथी नानक को आज यमुना किनारे बने हुए निगमबोध घाट पर बड़ी तादाद में...
नेहरू और निराला : रामचंद्र गुहा
कई सालों पहले, समाजशास्त्री त्रिलोकी नारायण पाण्डेय ने मुझसे एक घटना का ज़िक्र किया था, जो जवाहरलाल नेहरू और हिंदी के प्रसिद्ध कवि सूर्यकांत...
वेलेंटाइन डे: भारतीय संदर्भ में एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण
— अम्बेदकर कुमार साहु —
प्रस्तुत आलेख में ‘वेलेंटाइन डे’ का समाजशास्त्रीय नजरिए से विश्लेषण किया गया है। लेख यह तर्क देता है कि वेलेंटाइन...
श्रद्धांजलि : समाजशास्त्री आंद्रे बेते की याद में
— डॉ. शुभनीत कौशिक —
भारत में सामाजिक विषमता और जातिगत संरचना का गहन अध्ययन करने वाले समाजशास्त्री आंद्रे बेते का आज 91 वर्ष की...
आज के लंपट दौर में भूपेंद्र नारायण मंडल के बारे में...
जनतंत्र में अगर कोई पार्टी या व्यक्ति यह समझे कि वही जब तक शासन में रहेगा तब तक संसार में उजाला रहेगा, वह गया...
गुरु रैदास और उनका बेगमपुरा – प्रेमकुमार मणि
बैशाख, जेठ और माघ पूर्णिमा भारत के तीन संतों के जन्मदिन हैं. बैशाख और जेठ की पूर्णिमा बुद्ध और कबीर के तथा माघ-पूर्णिमा रैदास...
प्रेमचंद और ईश्वर – जगदीश्वर चतुर्वेदी
हमारे कई फेसबुक मित्रों ने कहा है कि प्रेमचंद तो ईश्वर को मानते थे। हम विनम्रतापूर्वक कहना चाहते हैं कि वे ईश्वर या ऐसे...
विचारों से नेताजी सुभाष चंद्र बोस समाजवादी थे
— उदय प्रताप सिंह —
नेताजी स्वतंत्रता सेनानी थे, लेकिन हजारों स्वतंत्रता सेनानियों में वह एकमात्र ऐसे आजादी के पुरोधा थे, जो हर देशभक्त हिंदुस्तानी...
















