18 फरवरी। दलितों और आदिवासियों पर अत्याचार की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के तिलमापुर गाँव का है जहाँ आदिवासी समुदाय के दर्जन भर परिवारों के घरों पर दबंगों ने बुलडोजर चलवा दिया। पीड़ितों ने इसको लेकर सारनाथ थाने में गुहार लगाई। मौके पर पहुँची पुलिस ने पीड़ितों का साथ देने के बजाय बुलडोजर चलाने वालों का साथ दिया। पुलिस दबंगों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने के बजाय उजाड़े गए लोगों को ही खरी-खोटी सुनाकर लौट गई। आदिवासियों के सामने चिंता और चुनौती दोनों ही एक साथ आ गयी है।
इसी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली सरोज ने न्यूज क्लिक के हवाले से बताया, कि इलाके भर के भूमाफिया हमारी जमीनों पर नजर गड़ाए हुए हैं। प्रतिबंध के बावजूद आसपास तमाम इमारतें खड़ी हो गई हैं। भूमाफिया और इलाके के दबंग हम सभी को खदेड़कर भगा देना चाहते हैं। इस जमीन पर ‘मालिकाना दावा’ करने के हमारे पास जो कागजात हैं, वह सरकार की नजर में मान्य नहीं हैं। पुलिस भी दबंगों और भूमाफिया के पक्ष में खड़ी नजर आती है। हम लोगों के पक्ष में कोई खड़ा नजर नहीं आ रहा है।
दशकों से दलितों, आदिवासियों के उत्थान के लिए काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता डा. लेनिन रघुवंशी ने मीडिया के हवाले से बताया कि जमींदारी उन्मूलन अधिनियम की धारा 144(बी)/4(एफ) में इस बात का प्रावधान किया गया है कि साल 2013 से पहले कोई भी दलित अथवा आदिवासी समुदाय का व्यक्ति जिस स्थान पर रह रहा है, वहाँ से उसे नहीं हटाया जा सकेगा। वह असंक्रमणीय भूमिधर हो जाता है। इसलिए इस बस्ती पर बुल्डोजर चलवाने वालों पर एक्शन होना चाहिए। उन्होंने आगे बताया कि इस जुल्म-ज्यादती की शिकायत अनुसूचित जाति आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से भी की जाएगी।
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