हलचल
उच्च शिक्षा का हाल- बेहाल – डॉ योगेन्द्र
केंद्र सरकार को सपना आया कि अगर राजभवन को लोकभवन कर दिया जाये तो क्रांति हो जायेगी।लोकभवन सत्य पर सवार हो जायेगा और सभी...
विचार
राष्ट्र प्रेरणा स्थल और हमारा राष्ट्रीय चरित्र – अरुण कुमार त्रिपाठी
लखनऊ के लोगों ने उद्घाटन के दिन ही राष्ट्र प्रेरणा स्थल से 7000 गमले चुरा कर यह साबित कर दिया कि राष्ट्रीय चरित्र न...
बांग्लादेश की समकालीन राजनीति का विश्लेषण!
— परिचय दास —
।। एक ।।
खालिदा ज़िया के बेटे तारिक़ रहमान की 17 साल बाद बांग्लादेश~वापसी केवल एक व्यक्ति की भौगोलिक वापसी नहीं है...
वीडियो
विश्वगुरु बनने के नुस्खे – डॉ योगेन्द्र
विश्वगुरु बनने के लिए पहला अनिवार्य काम यह है कि बलात्कारियों की जाति की पहचान करो। अगर आपकी जाति के बलात्कारी हैं तो उनके...
अन्य स्तम्भ
समाजवादी बाबू राजनारायण जी
सिद्धान्तों के लिए मर मिटने वाली, संघर्ष प्रिय, निर्भीक, समाज के सजग प्रहरी, भारतीय राजनीति के कबीर कहे जाने वाले जुझारू जनप्रिय नेता लोकबंधु...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
जेएनयू में विभिन्न माँगों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन
26 अप्रैल। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में विभिन्न माँगों को लेकर तमाम छात्र आंदोलनरत हैं। जहाँ एक तरफ कुछ छात्र छात्रावास आवंटित न होने से...
जनता के पैसे से जनता की ही जासूसी?
— श्रवण गर्ग —
प्रसिद्ध अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के इस सनसनीखेज खुलासे पर प्रधानमंत्री, उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों और सत्तारूढ़ दल के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं ने...
‘उन्नीसवीं बारिश’ पढ़ते हुए
— संजय गौतम —
उन्नीसवीं बारिश सुपरिचित कथाकार शर्मिला जालान का दूसरा उपन्यास है। उनका पहला उपन्यास प्रकाशित हुआ करीब बीस वर्ष पहले ‘शादी से पेश्तर’।...
ADIVASI AGITATION FOR IMPLEMENTATION OF CONSTITUTION
Amit Shah has vowed to end armed and violent naxalism by March 31 2026. Ue might well do so. Killing is easy because implementation...
साप्ताहिकी
धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव की कविता!
खुशियों से भर दे
भूखे को रोटी दे,
बेघर को घर दे।
माँ दुर्गे ! नया वर्ष
खुशियों से भर दे।
गीतों को, छंदों को,
नतमस्तक वन्दों को,
नन्हे परिंदों को,
एक...
रमेश चंद शर्मा की कविता
तिब्बत, जी हां तिब्बत,
मैं तिब्बत ही तो कह रहा हूं,
बार बार कह रहा हूं,
दर्द सह रहा हूं, दर्द कह रहा हूं,
आपने क्यों नहीं सुना,
आप...



























































































