विचार बंधु रामबाबू अग्रवाल : लोहिया समाजवादी विचार परंपरा के प्रचारक

0
Rambabu Agarwal

Randhir K Gautam

— रणधीर गौतम —

म जीवन में तीन तरह के बंधु बनाते हैं—एक प्रेम बंधु, दूसरा भाव बंधु और तीसरा विचार बंधु। जयप्रकाश नारायण कहा करते थे कि समाजवाद आचरण में होता है। जब भी कोई व्यक्ति अपने आपको समाजवादी कहता है, तो मैं उसके भीतर तीन बातों को देखता हूँ। पहली—उसके भीतर अनासक्ति कितनी है। दूसरी—वह समाजवादी विचार से क्यों जुड़ा है। और तीसरी—वह अपनी संपत्ति का कितना हिस्सा समाज में विचार निर्माण के लिए लगाता है।

रामबाबू अग्रवाल जी सच्चे मायनों में समाजवादी होने का गौरव रखने वाले व्यक्ति हैं। पिछले महीने समाजवादी समागम की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के शिविर में उनसे मुलाकात करने का अवसर मिला। इस अवसर पर समाजवादी समागम की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने रामबाबू अग्रवाल जी को सम्मानित समाजवादी नेता श्री गोपाल सिंह जी के साथ संगठन का उपाध्यक्ष चुना।

उनसे बातचीत करते हुए ऐसा लगा मानो आज़ादी के बाद के भारतीय समाजवादी विचार और नेताओं के अनेक संस्मरण सामने जीवंत हो उठे हों। डॉ. लोहिया के प्रति उनकी दीवानगी साफ़ दिखाई देती है। उन्होंने दर्जनों युवाओं को प्रेरित किया है और आर्थिक सहयोग देकर लोहिया के विचारों के प्रचार-प्रसार के कार्य से जोड़ा है।

अक्सर देखा जाता है कि जब कोई समाजवादी अपनी पहचान बताता है, तो वह यह कहकर शुरू करता है कि वह कभी संगठन में मंत्री रहा है या किसी बड़े पद पर रहा है और आजकल खाली बैठा है। लेकिन रामबाबू अग्रवाल इससे बिल्कुल अलग हैं। वे बड़े गर्व से कहते हैं कि वे डॉ. लोहिया की विचार परंपरा से जुड़े हैं और लोहिया–गांधी विचार मंच के माध्यम से इस परंपरा के प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं।

मध्य प्रदेश में इंदौर को केंद्र में रखकर उन्होंने लोहिया–गांधी विचार मंच के माध्यम से अनेक जनसभाएँ और सैकड़ों कार्यक्रम आयोजित किए हैं। जॉर्ज फर्नांडीज से लेकर प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी तक के साथ उन्हें काम करने का अवसर मिला और इन नेताओं का स्नेह भी प्राप्त हुआ। चंद्रशेखर जी के प्रधानमंत्रित्व काल में रामबाबू अग्रवाल जी के समर्पण को देखते हुए उन्हें पेट्रोलियम विभाग में कार्य करने का अवसर दिया गया, जिसे उन्होंने पूरी ईमानदारी से निभाया।

रामबाबू अग्रवाल जैसे विचार की राजनीति करने वाले लोग अपनी राजनीतिक पूंजी को विचार निर्माण में लगाते हैं। यही कारण है कि ऐसे लोग जीवन में प्रतिष्ठा और सम्मान दोनों प्राप्त करते हैं।

प्रोफेसर राजकुमार जैन के साथ उनकी मित्रता लगभग पचास वर्षों पुरानी है। उन्होंने कई संस्मरण साझा किए, जिनसे 1970 और 1980 के दशक में समाजवादी युवजन सभा के प्रयासों और उस दौर के समाजवादी राजनीतिक आंदोलन की धारा को समझा जा सकता है। एक विचार किस प्रकार व्यक्ति को सामाजिक रूप से सक्रिय बनाता है और उसे देश-निर्माण की भावना से जोड़ देता है—इसकी अभिव्यक्ति रामबाबू अग्रवाल जी के जीवन और कार्यों में स्पष्ट दिखाई देती है।

1975 के आपातकाल के दौरान उन्होंने जन आंदोलन में भाग लिया और महीनों तक जेल में रहे। आज भी वे उस समय के संस्मरण बड़े गौरव के साथ सुनाते हैं। वे राज नारायण की कार्यकर्ता-केन्द्रित नेतृत्व शैली से बहुत प्रभावित हैं। शायद यही कारण है कि वे आज भी अपने साथ काम करने वाले कार्यकर्ताओं को किसी प्रकार की कमी महसूस नहीं होने देते और हर संभव सहयोग करते हैं। यही वजह है कि इंदौर से लेकर पूरे मध्य प्रदेश में उनके प्रेरित किए हुए अनेक कार्यकर्ता आज भी समाजवादी विचार के लिए सक्रिय हैं।

समाजवादी समागम में जिस प्रकार राष्ट्रीय स्तर पर विचार निर्माण का कार्य हुआ है—जननायक कर्पूरी ठाकुर से लेकर मधु लिमये ,मधु दंडवते, चंद्रशेखर, रवि राय और समाजवादी नेता सुरेंद्र मोहन जी की जन्मशतियों को मनाने में उनका उत्साह साफ़ दिखाई देता है। आज भी वे ऐसे संगठनों की मदद करते हैं जो समाजवादी विचार परंपरा पर काम कर रहे हैं।

रामबाबू अग्रवाल जी के भीतर राष्ट्र-निर्माण की संकल्पना बचपन में ही विकसित हो गई थी। उनके हायर सेकेंडरी स्कूल के अध्ययन काल में उनके प्रधानाचार्य ओमप्रकाश रावल थे, जो चुपचाप समाजवादी आंदोलन से जुड़े हुए थे और उसके लिए काम किया करते थे। उन्हीं से प्रेरणा लेते हुए रामबाबू अग्रवाल का भी समाजवादी आंदोलन में प्रवेश हुआ।

हालाँकि, जब समाजवादी आंदोलन से जुड़े उनके कार्यों की जानकारी ऊपर के अधिकारियों को हुई, तो ओमप्रकाश रावल जी को निलंबित कर दिया गया। उस समय रामबाबू अग्रवाल जी कॉलेज में छात्रसंघ के अध्यक्ष थे। उन्होंने अपने प्रधानाचार्य के निलंबन के विरोध में हड़ताल का नेतृत्व किया। मात्र 16 वर्ष की आयु में वे मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री के कार्यालय तक विरोध दर्ज कराने पहुँच गए। हड़ताल और संघर्ष के उन शुरुआती अनुभवों ने रामबाबू अग्रवाल को हमेशा के लिए समाजवादी आंदोलन से जोड़ दिया।

इंदौर में जब वरिष्ठ समाजवादी नेताओं द्वारा किसान सम्मेलन आयोजित किया गया, तो वहाँ दिए गए डॉ. राममनोहर लोहिया के भाषण ने रामबाबू अग्रवाल को गहराई से प्रभावित किया और वे पूरी तरह समर्पित विचारधारा वाले कार्यकर्ता बन गए। बाद में आरिफ बेग के चुनाव लड़ने की प्रक्रिया में भी रामबाबू अग्रवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देखते-देखते वे चुनाव संचालक के रूप में सक्रिय हो गए।

इमरजेंसी के दौरान जेल में रहने के दौरान ही उन्होंने एम.कॉम. की परीक्षा दी और उसमें सफल हुए। उनके भीतर सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन से जुड़े हर विमर्श को समझने की गहरी जिज्ञासा है। साथ ही सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का विवेचन करने की भी क्षमता है।

यहाँ तक कि इंदौर के विपरीत विचारधारा वाले नेता और कार्यकर्ता भी रामबाबू अग्रवाल का बहुत सम्मान करते हैं। ऐसे लोग वास्तव में सिद्धांत की राजनीति करते हैं और अपने आचरण से नेतृत्व की परंपरा को जीवित रखते हैं।

अपने संस्मरणों में वे बताते हैं कि एक बार वे जननायक कर्पूरी ठाकुर के साथ लोकदल से जुड़ने के सिलसिले में यात्रा कर रहे थे उसे समय उनके सत्यनिष्ठा और स्पष्ट विचारों से वे और अधिक प्रभावित हुए। महान नेताओं को उनके कार्यकर्ताओं के संस्मरणों से भी समझा जा सकता है।

नई दिल्ली में एक बार जब मैं उनके साथ हरिजन सेवक संघ के आश्रम में सुबह की सैर कर रहा था, तो ऐसा लगा मानो पूरा इतिहास आँखों के सामने से गुजर रहा हो। वे बहुत ध्यान से सुनते भी हैं। जब मैंने रामनंदन मिश्र के समाजवाद, अध्यात्म और गांधी से जुड़े संस्मरण सुनाए, तथा विनोबा विचार परंपरा में दादा धर्माधिकारी के बारे में रामचंद्र प्रधान जी से सुनी हुई बातें साझा कीं, तो उन्होंने लगभग एक घंटे तक बड़े ध्यान से सुना। इससे स्पष्ट होता है कि उनके भीतर विचार को समझने और आगे बढ़ाने की भूख कितनी गहरी है।

इसके साथ ही रामबाबू अग्रवाल गौशाला के माध्यम से गायों की सेवा करते हैं, बुज़ुर्गों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं और अपनी संस्था के माध्यम से अनेक सामाजिक कार्य भी करते हैं।  डॉ. लोहिया के संस्कृति-बोध को समझते हुए भारतीयता की पहचान करना और फिर राजनीतिक शक्ति के निर्माण के माध्यम से न्यायपूर्ण व्यवस्था की स्थापना करना—ये दो महत्वपूर्ण दृष्टियाँ रामबाबू अग्रवाल को हमेशा प्रेरित करती हैं।

रामबाबू अग्रवाल जी ने सप्त क्रांति पर अनेक महत्वपूर्ण आयोजन किए हैं। इन आयोजनों के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया गया कि साइंस ऑफ सोशल चेंज और डॉ. लोहिया के विचार किस प्रकार सामाजिक परिवर्तन में भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विभिन्न विचारकों को आमंत्रित किया और यहाँ तक कि संतों को भी बुलाकर सप्त क्रांति के भीतर निहित आध्यात्मिक तत्व को समझने की कोशिश की। देवास में रामायण मेला आयोजित कार्यक्रमों में रामबाबू अग्रवाल जी की विशेष भूमिका रही।

इसके साथ-साथ रामबाबू अग्रवाल जी ने अनेक साथियों के साथ मिलकर समाजवादी विचारधारा के अनेक नेताओं से संपर्क स्थापित किया और कई कार्यक्रमों का आयोजन किया। बाबा बालेश्वर जी के विचार भी उन्हें गहराई से प्रभावित करते हैं।

पुरानी कहावत है कि किसी भी व्यक्ति को सही अर्थों में समझने के लिए उसके साथ यात्रा करनी चाहिए। यात्रा के दौरान उसके मानवीय और संवेदनशील व्यवहार का वास्तविक स्वरूप सामने आता है। दिल्ली में आयोजित समाजवादी समागम के राष्ट्रीय शिविर के दौरान हमारे तीन विद्यार्थी जब भी उनके साथ यात्रा करते, तो वे उनका हाल-चाल पूछते, उन्हें अपनेपन का एहसास कराते, कभी जूस पिलाते और उनसे लंबे समय तक बातचीत करते।

इन विद्यार्थियों ने रामबाबू अग्रवाल जी के इस व्यवहार को देखकर बहुत प्रसन्नता व्यक्त की। एक विद्यार्थी ने मुझसे कहा—“अगली बार जब भी सर दिल्ली आएँ, तो मुझे उनके साथ कुछ समय बिताने का अवसर अवश्य दीजिए।”
रामबाबू अग्रवाल जी से जुड़े कुछ और संस्मरण मैं आगे के लेख में लिखूँगा,,,,,,


Discover more from समता मार्ग

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Comment