लोहिया, हुसैन और रामायण चित्र कथा – मणिमाला

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Lohia, Husain, and the Ramayana Picture Story

चित्रकार एमएफ हुसैन ने लोहिया के कहने पर पौराणिक कथा रामायण पर चित्र श्रृंखला बनाई थी। लोहिया चाहते थे कि हुसैन रामायण और महाभारत दोनों पौराणिक कथाओं पर चित्र श्रृंखला बनाएं।  अपने संस्मरण *एमएफ हुसैन की कहानी, आपणी जुबानी* में हुसैन ने लिखा है कि कैसे लोहिया ने एक बार उन्हें बिड़ला और टाटा के ड्राइंग रूम में लटकाए गए पेंटिंग से आगे निकलने के लिए उकसाया था। साथ ही रामायण को चित्रित करने को कहा था। रामकथा को लोहिया भारत की सबसे दिलचस्प कथा मानते थे।

इससे हुसैन इतने प्रभावित हुए कि 1967 में लोहिया की मृत्यु के कुछ दिनों बाद रामायण श्रृंखला पर काम करना शुरू कर दिया। हुसैन को हैदराबाद में लोहिया के दोस्त बद्रीविशाल पिट्टी के घर में एक कमरा दिया गया और सोशलिस्ट पार्टी की पत्रिका ‘मैनकाइंड’ के संपादकीय बोर्ड का सदस्य बनाया गया।

हर दिन एक पुजारी आते और रामायण पढ़ते। वे पढ़ते जाते और हुसैन चित्र बनाते जाते। इस कलाकार ने सभी 150 चित्र मुफ्त में बनाए।एक पैसा नहीं लिया।

हुसैन ने लिखा, “लोहिया के मुंह से जो निकला, उसका मैंने सम्मान किया।”

दो दिनों बाद रामनवमी का त्योहार है। न लोहिया रहे न हुसैन। लेकिन लोहिया के कहने पर हुसैन द्वारा बनाई गई रामायण चित्र श्रृंखला आज भी मौजूद है।

ताउम्र राम, कृष्ण और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं के चित्र उकेरता रहा यह चित्रकार। फिर भी जब अंत समय आया तो मुसलमान होना उसके लिए गाली हो गये।

परेशान होकर 2006 में देश छोड़ गया। कतर की नागरिकता ली और लंदन में रहने लगे। वहीं 9 जून 2011 दुनिया छोड़ दी।
लेकिन लोहिया के कहने पर बनाई रामायण चित्र श्रृंखला यहीं हिंदुस्तान के हैदराबाद में ही छोड़ गए।
“…दो गज़ ज़मीन भी न मिली कू-ए-यार में।”


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