प्रकृति और संस्कृति के समन्वय की समझ ही वास्तविक साक्षरता का आधार है – जलपुरुष राजेन्द्र सिंह

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An understanding of the harmony between nature and culture is the foundation of true literacy.

8 सितंबर 2026 को डॉक्टर हरिसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय, सागर के जीवनपर्यंत शिक्षा विभाग द्वारा 60वें अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर ’’“भूमंडलीय समृद्धि के लिए लोक साक्षरता”’’ विषय पर अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का आयोजन अभिमंच सभागार में व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर जलपुरुष राजेन्द्र सिंह जी उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता ’’जलपुरुष और विश्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. राजेन्द्र सिंह’’ ने भूमंडलीय समृद्धि के लिए लोक साक्षरता विषय पर अपने बीज वक्तव्य में बताया कि पढ़ने-लिखने की योग्यता अर्जन संबंधी साक्षरता की संकल्पना विद्यार्थियों का व्यक्तित्व रचने, उनके जीवन को सुधारने और संवारने के बजाय उन्हें स्वार्थ, रोजगार प्राप्ति और स्वप्रगति करने के उद्देश्यों तक सीमित बना रही है। इसलिए प्रकृति और संस्कृति के समन्वय की समझ ही वास्तविक साक्षरता का आधार है। साक्षरता केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को अपने व्यक्तित्व, समाज और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की समझ विकसित करनी होगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोण् यशवंत सिंह ठाकुर ने कहा कि आज आवश्यकता है कि साक्षरता की पुरातन और आधुनिक अवधारणाओं को नए अर्थ एवं संदर्भों में समझा जाए। शिक्षा तभी सार्थक होगीए जब वह व्यक्ति को संवेदनशीलए जिम्मेदार और समाज के प्रति जागरूक बनाए। प्रो संजय शर्मा ने कहा कि डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय पुरुषार्थ टीम द्वारा चलाए जा रहे निःशुल्क पुरुषार्थ लाइब्रेरी निर्माण के प्रयास के साथ है और शिक्षा के इस सामाजिक अभियान को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग की भावना रखता है।

कार्यक्रम के आरम्भ में जीवनपर्यंत शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष ’’प्रो. अनिल कुमार जैन’’ ने बताया कि उच्च शिक्षा संस्थानों का मूल मकसद सिर्फ किताबी ज्ञान का प्रचार-प्रसार और हस्तांतरण करना ही नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी से अवगत कराना और उन्हें इस जिम्मेदारी का निर्वहन करने योग्य बनाना भी है।

कार्यक्रम में अंत में पुरुषार्थ टीम द्वारा संचालित ‘पुरुषार्थ लाइब्रेरी अभियान’ की प्रगति, परियोजना और उसके सामाजिक प्रभाव पर आधारित ‘पुरुषार्थ लाइब्रेरी अभियान’ स्मारिका का विमोचन किया।

पुरुषार्थ टीम के संस्थापक पारस प्रताप सिंह‘पुरुषार्थ’ ने राजस्थानी साफा पहनाकर जलपुरुष राजेंद्र सिंह का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह अवसर केवल उनके लिए नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए ऐतिहासिक है, जो शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन को अपना दायित्व मानते हैं। उन्होंने कहा कि आज मेरे पास शब्दों का आभाव है। हम उस पावन धरती पर एकत्रित हैं, जिसे डॉ. हरिसिंह गौर जैसे महान व्यक्तित्व ने अपने पुरुषार्थ से सींचा। उसी धरती पर अपने प्रेरणास्रोत और जल संरक्षण के पुरुषार्थ से विश्व को पानीदार बनाने में लगे आ. जलपुरुष राजेंद्र सिंह बापू जी का अभिनंदन और ‘पुरुषार्थ लाइब्रेरी अभियान’ की स्मारिका का विमोचन होना अपने आप में बहुत ही प्रेरणादायी क्षण है।

कार्यक्रम में ’’डॉ. आर. टी. बेदरे, डॉ. अनिल कुमार तिवारी, डॉ. संजय शर्मा, डॉ. देवेंद्र कुमार, डॉ. रानी दुबे, डॉ. संजय नैनवाल, डॉ. अरविन्द, डॉ. रामकुमार वर्मा, डॉ. नवीन सिंह’’, जिला साक्षरता अधिकारी ’’श्री उमा शंकर’’ सहित बड़ी संख्या में केन्द्रीय विद्यालय एवं विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, शोधार्थी, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।


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