Tag: डॉ. योगेन्द्र
युग के अँधेरे में कसमसाते युवा – डॉ योगेन्द्र
पिछले दस- बारह वर्षों से ‘ संविदा ‘ और ‘अतिथि शिक्षक’ जैसी शब्दावली बहुप्रचारित हो गई है । कंपनियों द्वारा कर्मचारियों की सप्लाई का...
कंधे पर बहन की हड्डियां और फ़ुटबॉल के ठहाके – डॉ...
सुबह- सुबह बूँदों से लदे बादल आकाश में मँडरा रहे हैं । हवा में फ़िलहाल ठंडक बस गयी है । अप्रैल का आख़िरी समय...
डॉ अम्बेडकर को याद करते हुए – डॉ योगेन्द्र
आज डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती है। वे लोग जो मन ही मन डॉ अम्बेडकर से नफ़रत करते हैं, वे भी उन्हें पुष्प अर्पित...
जाति के दड़वों की घुटन – डॉ योगेन्द्र
डॉ अम्बेडकर के नेतृत्व में चवदार तालाब आंदोलन ( महाड़ सत्याग्रह) हुआ 20 मार्च 1927 को।इस महान आंदोलन को पूरे सौ वर्ष होने वाले...
जीने की कला में छेद – डॉ योगेन्द्र
निराला ने एक कविता लिखी है- ‘स्नेह निर्झर बह गया है।’ उस कविता की कुछ पंक्तियां हैं -
‘स्नेह-निर्झर बह गया है !
रेत ज्यों तन...
विश्वगुरु बनने के नुस्खे – डॉ योगेन्द्र
विश्वगुरु बनने के लिए पहला अनिवार्य काम यह है कि बलात्कारियों की जाति की पहचान करो। अगर आपकी जाति के बलात्कारी हैं तो उनके...
उच्च शिक्षा का हाल- बेहाल – डॉ योगेन्द्र
केंद्र सरकार को सपना आया कि अगर राजभवन को लोकभवन कर दिया जाये तो क्रांति हो जायेगी।लोकभवन सत्य पर सवार हो जायेगा और सभी...
आप कहां हैं अरावली के शेरो! – डॉ योगेन्द्र
पता नहीं आदमी अपने आप को क्या समझता है? सत्ता में पहुंचते ही ऐंठ जाता है। आंखों पर मोटी पट्टी और दिमाग में गोबर।...
रिश्तों की मृत्यु कहीं आदमी की मृत्यु तो नहीं! – डॉ...
जापान में एक कंपनी है - फैमिली रोमांस। यह कंपनी लोगों को पिता, पति, दोस्त और अन्य रिश्तेदार उपलब्ध करवाती है। ऐसी कई पेशेवर...
तर्क, ज्ञान और अंधश्रद्धा – डॉ योगेन्द्र
धूप खिली है। ठंड है भी और नहीं भी। सुबह ठंड रहती है। धूप उगते ही ठंड अपनी दुनिया समेट लेती है। दिसंबर के...




















