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दुष्यंत कुमार ने हिंदी ग़ज़ल को नया अर्थ का और रूप...
— प्रेम सिंह —
कहां तो तय था चिराग़ां हरेक घर के लिए/कहां चिराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए।/यहां दरख्तों के साये में धूप लगती...
‘दुष्यंतनामा’ दुष्यंत कुमार की 50वीं पुण्यतिथि पर आयोजित विशेष कार्यक्रम
दुष्यंत की साहित्य चेतना का निर्माण इलाहाबाद के परिवेश में हुआ - ‘प्रो विनोद तिवारी’
गत 29/01/2026 को दिल्ली ITO स्थित राजेन्द्र प्रसाद भवन में...












