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पीरो के गांधी: राम इकबाल वरसी और उनका अनूठा व्यक्तित्व….
— शिवानंद तिवारी —
सन् 1955-56 की बात होगी। डॉ. राममनोहर लोहिया ने अपनी पत्रिका “जन" में राम इकबाल वरसी को “पीरो का गांधी” कहा...
विचार की टकसाल के सिक्के!
— प्रोफेसर राजकुमार जैन —
"शक्ति-विहीन सिद्धांत बाझं होता है, उसी तरह विचारहीन शक्ति राक्षस बन जाती है।"
यह सूक्ति डॉक्टर लोहिया ने कही थी। बदकिस्मती...












