Tag: हिमांशु जोशी
असमानता अब व्यवस्था की संरचना बन चुकी है’ पी साईनाथ –...
दून लाइब्रेरी में हुए व्याख्यान में वरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ ने मौजूदा व्यवस्था और पत्रकारिता की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए.
अपनी अब तक...
गीता गैरोला की ‘ये मन बंजारा रे’
— हिमांशु जोशी —
‘ये मन बंजारा रे’ केवल एक यात्रा वृत्तांत नहीं, बल्कि सामाजिक ढांचे, पर्यावरण, लैंगिक असमानता और सांस्कृतिक विरासत पर गहरे विचारों...
भूतगांव: पलायन, जातिवाद और पहाड़ी समाज का विलुप्त होता सच
— हिमांशु जोशी —
नवीन जोशी का उपन्यास 'भूतगांव' एक पहाड़ी गांव के बहाने पूरे उत्तराखंड के सामाजिक-सांस्कृतिक विघटन की त्रासदी है। यह न केवल...













