भारत यायावर की कविता

0
पेंटिंग : प्रयाग शुक्ल
भारत यायावर (29 नवंबर 1954 – 22 अक्टूबर 2021)

आदमी कहाँ-कहाँ पीड़ित नहीं है

 

यह बार-बार, हर बार, हर बात

क्यों टिक जाती है

सिर्फ रोटी पर?

या बार-बार, हर बार, हर रोटी

फैलकर क्यों हो जाती है

एक व्यवस्था?

यह बार-बार, हर बार, हर व्यवस्था

क्यों हो जाती है एक राक्षस?

क्यों लील जाती है

लोगों की सुख सुविधाएं?

क्यों लगा दिया जाता है

किसी नए सूरज के उगने पर प्रतिबंध?

आदमी

कहाँ-कहाँ पीड़ित नहीं है?

अपने होने से

नहीं होने के बीच

आदमी कहाँ-कहाँ पीड़ित नहीं है?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here