इस खुदकुशी के गुनहगार कौन हैं?

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— शिवानंद तिवारी —

देश की गंभीर और चिंताजनक स्थिति के प्रति भाजपा असंवेदनशील तथा बेपरवाह है। नवादा में में पूरे परिवार ने एकसाथ आत्महत्या कर ली। छह लोगों ने जान दे दी। कर्ज चुकाने के दबाव की वजह से उन लोगों ने सामूहिक निर्णय लेकर आत्महत्या कर ली।

विपक्ष विशेष रूप से भाजपा इसके लिए बिहार सरकार को कठघरे में खड़ा करने की औपचारिकता निभाएगी। दो दिन बाद फिर सबकुछ पूर्ववत हो जाएगा।

अगर यह या इस तरह की घटना सिर्फ बिहार में होती तो बिहार की सरकार को कठघरे में खड़ा किया जाना जायज माना जा सकता था। लेकिन देश भर में ऐसी घटनाएं हो रही हैं। कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश से इसी तरह की खबर छपी थी।

देश गंभीर चिंताजनक दौर से गुजर रहा है। लोगों के पास काम नहीं है। ऊपर से महंगाई जान खा रही है। यह स्थिति सिर्फ कोविड की वजह से नहीं है बल्कि उसके पहले ही नोटबंदी के बाद हमारी अर्थव्यवस्था पटरी से उतर गई थी। करोड़ों की संख्या में सड़कों के किनारे फुटपाथ पर छोटी छोटी नगदी पूँजी के सहारे परिवार पालने वालों का भविष्य अंधकारमय हो गया। नोटबंदी का घोषित मकसद तो हासिल करने की बात तो दूर है, आज उसका दुष्परिणाम और भी विकृत रूप में हमारे सामने खड़ा है।

जिस तरह और जिस बड़ी संख्या में आज काला धन निकल रहा है, वह आश्चर्यजनक है। काले धनवानों की सुविधा के लिए दो हजार रुपये के नोट का प्रवधान कर दिया गया। आश्चर्य तो यह है कि दो हजार का वह नोट भी बाजार से गायब है।

खबरों के मुताबिक 2020 में सामूहिक आत्महत्या के 121 मामले सामने आए थे। इनमें मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार सहित इन सामूहिक आत्महत्या की घटनाओं में 272 लोग मरे थे। यह संख्या 2019 की तुलना में 58 फीसद ज्यादा थी। मृतकों की संख्या भी 51 प्रतिशत ज्यादा थी।

भारत सरकार के गृह मंत्रालय का राष्ट्रीय अपराध रेकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) भी बता रहा है कि युवाओं में भी आत्महत्याओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। भविष्य के प्रति हताश और निराश युवा बड़ी संख्या में डिप्रेशन में हैं और नई उम्र में आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं। नवादा की घटना या उसके पूर्व समस्तीपुर की घटना से बिहार भाजपा के नेता सचमुच चिंतित हैं तो उन्हें अपनी चिंता से प्रधानमंत्री जी और वित्त मंत्री जी को अवगत कराना चाहिए। सिर्फ नीतीश सरकार को कोसकर विरोध की औपचारिकता निभा देने का अर्थ होगा कि भाजपा देश की गंभीर और चिंताजनक हालत के प्रति बेपरवाह तथा असंवेदनशील है। इसको भाजपा का देशविरोधी चरित्र ही माना जाएगा।

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