टोंक जिले की निवाई तहसील के ग्राम करेड़ा बुजुर्ग में कंबल वितरण कार्यक्रम के दौरान पूर्व टोंक सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया के द्वारा गरीब मुस्लिम महिलाओं के साथ धर्म के आधार पर भेदभावपूर्ण एवं अमानवीय व्यवहार करने पर हम कड़ी निंदा करते हैं।
पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने कंबल देते समय उनसे उनका नाम पूछा और यह ज्ञात होने पर कि वे मुस्लिम समुदाय से है,उनसे यह कहते हुए कंबल वापस ले लिया कि “जो मोदी को गाली देता है उसका कोई हक नहीं है” व उन्हें अलग बैठने को बोला।इससे साफ जाहिर होता है कि उन्होंने कंबल बांटते हुए जरूरत को नहीं बल्कि धर्म को आधार बनाया। जनप्रतिनिधि द्वारा किया गया यह अपमानजनक व्यवहार मानवीय गरिमा पर एक वार है और भारत की आत्मा पर सीधा प्रहार है।
जब ग्रामीणों ने इस व्यवहार का विरोध किया तो उन्हें धमकी दी । यह प्रकरण आलोचना के प्रति असहिष्णुता दर्शाता है और मानवीय सहायता को राजनीतिक विचारों से जोड़ने की गंभीर चिंता पैदा करता है। लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि का आलोचना के प्रति खुलापन न रखना कतई लोकतांत्रिक नहीं है।
हालांकि यह कंबल वितरण कार्यक्रम किसी सरकारी योजना के अंतर्गत नहीं बल्कि व्यक्तिगत रूप से आयोजित बताया गया, लेकिन इससे उनकी जिम्मेदारी कम नहीं हो जाती। जो व्यक्ति लगभग दस वर्षों तक सांसद रहा हो, उससे अपेक्षा की जाती है कि वह संविधान के मूल्यों, विशेषकर धर्मनिरपेक्षता और समानता का पालन करे।
हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ बढ़ते भेदभाव को लेकर चिंता व्यक्त की जाती रही है। इस प्रकार की घटनाएं समाज में भय और असुरक्षा की भावना को और बढ़ाती हैं तथा सामाजिक सौहार्द को कमजोर करती हैं।
पीयूसीएल उन स्थानीय नागरिकों की प्रशंसा करती है जिन्होंने जौनपुरिया के धार्मिक भेदभाव का विरोध जताया और उनके द्वारा दिए कम्बल लौटा कर साझा संस्कृति की रक्षा का संकल्प लिया है।
पीयूसीएल की मांग है कि सुखबीर सिंह जौनपुरिया सार्वजनिक रूप से माफी मांगे तथा राज्य सरकार इस घटना का प्रसंज्ञान लेकर ऐसे व्यवहार करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कदम उठाए।
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