
महाराष्ट्र में 3 लाख गैर महाराष्ट्रीयन ऑटो चालक टेंपो टैक्सी वाले लोग हैं .।अब इनके लिए मराठी पढ़ना और उसका प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य कर दिया गया है जबकि यह लोग कई दशकों से वहां रह रहे हैं। और इन्हें इतनी मराठी जो बोलचाल के लायक है आती है। भाजपा सरकार कि यह नीति एक प्रकार से शिवसेना वाली पुरानी गुंडई नीति का ही दुह राव है और एक प्रकार से गैर मराठी लोगों के लिए भागने को बाध्य किया जा रहा है ।उनके लाइसेंस रद्द किये जा रहे हैं, उनके साथ मारपीट की जा रही है ।उनको जुर्माना लगाया जा रहा है ।
लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी इसकी तीव्र निंदा करती है और भारत सरकार से कहना चाहती है कि यह भाषायी साम्राज्यवाद ला दने का प्रयास ना करें वर्ना इससे देश की एकता के ऊपर असर पड़ेगा ।
यह तो हिंदी वासी क्षेत्र के लोगों की कमजोरी है कि वह पि टकर भी चुप रहते हैं वरना अभी तक सारा उत्तर प्रदेश बिहार और मध्य प्रदेश बंद हो जाता और महाराष्ट्र सरकार को इसका उत्तर मिल जाता।
मैं क्षेत्रवाद प्रांतवाद और भाषावाद के पक्ष में नहीं हूं।मैं मानता हूं की सारी भारतीय भाषाएं बहने हैं ।मैं मराठी भी जानता हूं कुछ बोलता भी हूं कुछ पढ़ता भी हूं ।हिंदी भी जानता हूं परंतु किसी मराठी भाषी के प्रति मेरे मन में कभी कोई नफरत या घृणा नहीं होती। बल्कि कितने ही मराठी भाषी समाजवादी आंदोलन के नेता रहे हैं। साने गुरु जी ,मधु लिमए, एस एम जोशी, मधु दंडवते, मृणाल गोरे, नाथ पे जैसे कितने नाम हैं। आचार्य विनोबा भावे लोकमान्य तिलक ज्योति बा फुले बाबा साहेब अंबेडकर पहले भारतीय थे फिर मराठी।
आज महाराष्ट्र में हिंदी भाषियों के प्रति फैलाई जा रही है। यहां तक कि महाराष्ट्र सरकार ने मिडिल स्कूल हाई स्कूल में से जो तीसरी भाषा के रूप में हिंदी पढ़ने का एक विकल्प था उसे भी हटा दिया है और वहां तीसरी भाषा के रूप में भी व ऐच्छिक विषयके रूप में भी बच्चे हिंदी नहीं पढ़ सकते । अब वह विकल्प भी मौजूद नहीं है ।
भारतीय जनता पार्टी एक तरफ हिंदी, हिंदू और हिंदुस्तान की बात करती है और दूसरी तरफ जहां उनका संघ का मुख्यालय है जहां उनकी सरकार है उनका ही मुख्यमंत्री है वहां हिंदी बोलने वालों को मारपीट हो रही है ,अप मानित किया जा रहा है, ज़लील किया जा रहा है और छोड़कर भागने को लाचार किया जा रहा है। इसके ऊपर भाजपा सरकार रोक लगा ये वरना इसकी प्रती क्रिया भी संभावित है और वह राष्ट्रीय एकता के लिए नुकसान दायक होगी।
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