आज साझा नागरिक मंच जमशेदपुर द्वारा केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफा की केन्द्रीय मांग पर आहूत संसद मार्च की एकजुटता में एक धरना और सभा की गयी। यह सभा बिरसा चौक , साकची गोलचक्कर पर आयोजित हुआ। इस कारो में उपस्थित होने और सम्बोधित करने वाले मुख्य साथियों में सियाशरण शर्मा, सुजय राय, सुमित राय, रामकवीन्द्र सिंह, मंथन, अशोक शुभदर्शी, सुखचन्द्र झा, काशीनाथ प्रजापति, देवाशीष मुखर्जी, जगनारायण जगत, वरुण प्रभात, तौहीद्दुल हसन, मो.शाहिद, जसवंत सिंह, हीरा सिंह, निधि, राजश्री, चिन्मयी मंडल, भाषाण मानमी, उषा देवगम, गौतम बोस, अनिमा बोस,ब्रेरना कंडुलना, शीला, रिम्सा मित्रा, केशोवती नायक, पुरुषोत्तम विश्वनाथ, उदय प्रकाश हयात, चन्दना बनर्जी, उरूषा, दीपक रंजीत आदि शामिल रहे।
गौरतलब है कि घनघोर नजरअंदाजी, सोनम की हिरासत, रोक और दमन की तमाम कोशिशों के बाद भी दिल्ली में युवाओं का जनसैलाब उमड़ आया। इस जनसैलाब ने यह बता दिया है कि आज का भारतीय युवा शिक्षा, परीक्षा, नतीजा, नियुक्ति की शर्त भ्रष्ट, माफियाई और लूटेरी पद्धति से कितना आहत और बैचैन है। बढ़ती बेरोजगारी से कितने गुस्से में है। सरकार की बेशर्मी उदासीनता और संवेदनहीनता के प्रति पल रहा विरोध सड़कों पर उमड़ आया है।
पहले तो दिल्ली पुलिस ने आमरण अनशन पर बैठे देश के जाने-माने विज्ञानी और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को जंतर मंतर के धरना स्थल से जबरन उठा लिया। वे पेपर लीक के खिलाफ और इसके लिए जिम्मेदार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आहूत धरना के समर्थन में यहां बैठे थे और यह उनकी भूख हड़ताल का अठारहवां दिन था। किसी
शांतिपूर्ण आंदोलन पर यह निंदनीय पुलिसिया हमला युवाओं को ज्यादा दृढ़ निश्चय से भर गया।
सरकार में अपनी जिम्मेदारी का अहसास नहीं है। वह भयभीत है। ज्यादा भयभीत इसलिए भी है कि सभी विपक्षी दल इस आंदोलन का समर्थन कर चुके हैं और उसका जनसमर्थन बढ़ता जा रहा है। आंदोलन का समर्थन पूरे देश में उमड़ आये जुलूसों और दिल्ली के राजपथ पर युवजनों की धमक और गूंज से दुनिया भर में जगजाहिर हो चुका है।
पेपर लीक भाजपा राज की शिक्षा नीति पर कलंक का बड़ा धब्बा बन गया है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा प्रभाव गरीब और साधनविहीन छात्रों पर पड़ रहा है। अमीर परिवारों के साधनसम्पन्न छात्र या तो विदेश की ओर रुख कर रहे हैं या इस इस भ्रष्ट नीति से फायदा उठाने की कोशिश। इससे साफ है कि आंदोलन में मुख्यतः देश के मध्यमवर्गीय लोगों के हित छुपे हैं और मोदी सरकार को उनकी कोई चिंता नहीं है।
साझा नगारिक मंच, जमशेदपुर इस आंदोलन की मांगों का समर्थन करते हुए पुलिस दमन की घोर निंदा करता है और सरकार को आगाह करता है कि वे आंदोलन को बदनाम करने से बाज आयें। छात्रों नौजवानों से अपील करता है कि वे इस आन्दोलन को भिन्न रूपों में जारी रखें और पूरे देश में फैलायें। देश के सचेत नागरिक उस आंदोलन के साथ रहेंगे।
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