वंदे मातरम् के सवाल पर भारतीय जनता पार्टी! – शिवानन्द
वंदे मातरम् के सवाल पर भारतीय जनता पार्टी आज जिस तरह गदर मचा रही है, उसके पीछे असली कहानी कुछ और है। इसे मुस्लिम...
वन्दे मातरम् – प्रेमकुमार मणि
वंदे मातरम् गीत विस्तार को लेकर यदि देश में सर्वानुमति नहीं बन पा रही है तो इसे समझा जाना चाहिए। इस गीत पर सर्वानुमति...
नेताजी, जनगणमन और जर्मनी – अरुण कुमार त्रिपाठी
जब राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राष्ट्रीय स्तर पर विवाद उठ खड़ा हुआ है तब इस बात की आशंका...
लोकतंत्र का संकट और समाज
— अनिल अत्रि —
डॉ. राममनोहर लोहिया का मानना था कि लोकतंत्र की असली ताक़त केवल संसद में नहीं, बल्कि समाज की जागरूकता, नागरिक भागीदारी...
कॉकरोच आंदोलन में गांधी–अंबेडकर की मौजूदगी! – प्रोफेसर राजकुमार जैन
हालाँकि इस आंदोलन की शुरुआत नीट पेपर की गोपनीयता भंग होने के सवाल पर हुई थी, परंतु जाने-अनजाने इसमें जाति का विमर्श भी उभरकर...
वेंटिलेटर पर लोकतंत्र और युवाओं का भविष्य
जिन लोगों ने 18 मार्च 1974 को पटना का छात्र आन्दोलन देखा था, वे अनायास 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर हुए युवा आंदोलन...
भारतीय जनता के नाम एक पत्र
प्रिय देशवासियों,
हर नागरिक को यह अधिकार है कि वह स्वतंत्रतापूर्वक किसी भी राजनीतिक विचारधारा को अपना सकता है। आपके परिवार में, आपके पड़ोस में...
जब दिल्ली की सड़कों पर जवानी ने अंगड़ाई ली – दीपक...
आज दिल्ली जवान हो गई थी। सुबह घर से प्रोटेस्ट के स्थल जंतर मंतर जाने के लिए निकला तब अंदाज़ा नहीं था कि क्या...
क्या गांधी का रास्ता बेअसर हो गया है? सोनम वांगचुक का...
— राम दत्त त्रिपाठी —
क्या भारत में महात्मा गांधी के शांतिपूर्ण सत्याग्रह और अहिंसक विरोध का रास्ता अब बेअसर हो गया है? यह सवाल...
‘नागरिकों’ को ‘शरणार्थियों’ में बदलने का षड्यंत्र तो नहीं है? –...
बात कोलकाता के प्रसिद्ध सत्ता-विरोधी अंग्रेज़ी दैनिक ‘द टेलीग्राफ’ के पूर्व संपादक-पत्रकार आर राजगोपाल की पीड़ा से शुरू करते हैं।राजगोपाल की पीड़ा हालाँकि काफ़ी...














