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जब गांधी ने अपनी ही जाति से कहा – “इन बाड़ों...

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24 जनवरी, 1928: मोरबी की वह ऐतिहासिक घटना, जिसने जाति-व्यवस्था की जड़ों को हिला दिया। आज जब हम सामाजिक समरसता और जातिवाद पर बहस...

फटे पुराने कागज के टुकड़ों पर गांधी ने लिखा विभाजन का...

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भारत के अंतिम वायसराय के रूप में जब लॉर्ड माउंटबेटन विभाजन का अंतिम खाका लेकर दिल्ली उतरे, तो उनके मन में एक गहरा द्वंद्व...

जब तक हम गांधी को याद करते रहेंगे, भारत में इन्सानियत...

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"तुमने मेरा सर ऊँचा कर दिया है" — सैयद अजीज़ हसन 'बकाई' — बक़ाई साहब दिल्ली से प्रकाशित उर्दू साप्ताहिक 'हुर्रियत' के सम्पादक थे, और हिन्दू-मुस्लिम...

गांधी: मानवता के महानायक

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जर्मन नाटककार बर्टोल्ट ब्रेख़्त ने 'गैलिलियो' के जीवन पर टिप्पणी करते हुए एक कालजयी पंक्ति लिखी थी— “दुर्भाग्यशाली है वह देश, जिसे नायकों की...

सन 1919 जब गांधी ने अमृतसर अधिवेश में आत्मनिदा का प्रस्ताव...

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इतिहास के पन्नों में दर्ज एक कड़वी, लेकिन ज़रूरी सच्चाई 1919 के कांग्रेस के अमृतसर अधिवेशन से निकलकर हमारे सामने आती है अमृतसर —...

राममनोहर लोहिया — एक कुजात-गांधीवादी: स्मृति और संदेश

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कभी-कभी कोई व्यक्ति समय के विरुद्ध खड़ा दिखाई देता है। वह अपने युग की सुविधाओं, सत्ता की रीतियों और परंपरा की ठसक के सामने...

क्या गांधी ने नेहरू को प्रधानमंत्री नियुक्त कर भारत पर थोप...

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— सुशोभित — बहुत वर्षों से यह आरोप लगाया जा रहा है। समय आ गया है कि इस आक्षेप की भी हम तथ्यपूर्ण और मननशील...

गांधी समाधि से आचार्य नरेन्द्रदेव मूर्तिस्थल तक सोशलिस्टों का पैदल मार्च।

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— प्रो. राजकुमार जैन — 1942 से लेकर अभी तक दिल्ली के सोशलिस्ट बड़ी शिद्दत के साथ 9 अगस्त के क्रांति दिवस को मनाते चले...

राम से शुरू हुए राणा तक आ गए !

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— चंचल — संघ अपना एजेंडा चलाने में सफल रहा है। वह विषयांतर का माहिर है। सरकार में आने के लिए उसने “अतीत“ का सहारा...

सप्त धातुओं की मूर्ति

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— आचार्य दादा धर्माधिकारी — डॉ. लोहिया को अपना मित्र मानने में मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता हूं । 1933-34 में जर्मनी से स्वदेश...

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