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गाँधी या गोडसे: हरिशंकर परसाई

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यह चिट्ठी महात्मा मोहनदास करमचंद गाँधी को पहुंचे. महात्माजी, मैं न संसद-सदस्य हूँ, न विधायक, न मंत्री, न नेता. इनमें से कोई कलंक मेरे...

गांधी की ज़रूरत क्या है? – परिचय दास

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गांधी की ज़रूरत किसी मूर्ति के लिए नहीं है। न चौराहे के लिए, न साल में दो दिन के पुष्पांजलि-अनुष्ठान के लिए। गांधी की...

गांधी निंदा अभियान को चुनौती है यह पुस्तक : अशोक वाजपेयी

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— प्रसून लतांत — राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली ने महात्मा गांधी जी के विचारों पर केंद्रित और मौजूदा समय में देश की पहचान को बचाने...

गांधी में अहिंसा-आस्था का पल्लवन कैसे हुआ? — आनंद कुमार

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मैत्री और करुणा, परोपकार और परमार्थ, वीरता और क्षमा, प्रेम और सहिष्णुता—इन्हीं मूल्यों और आदर्शों के बीच सर्वत्र अहिंसा अंकुरित होती है। विश्व के...

जब गांधी ने अपनी ही जाति से कहा – “इन बाड़ों...

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24 जनवरी, 1928: मोरबी की वह ऐतिहासिक घटना, जिसने जाति-व्यवस्था की जड़ों को हिला दिया। आज जब हम सामाजिक समरसता और जातिवाद पर बहस...

फटे पुराने कागज के टुकड़ों पर गांधी ने लिखा विभाजन का...

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भारत के अंतिम वायसराय के रूप में जब लॉर्ड माउंटबेटन विभाजन का अंतिम खाका लेकर दिल्ली उतरे, तो उनके मन में एक गहरा द्वंद्व...

जब तक हम गांधी को याद करते रहेंगे, भारत में इन्सानियत...

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"तुमने मेरा सर ऊँचा कर दिया है" — सैयद अजीज़ हसन 'बकाई' — बक़ाई साहब दिल्ली से प्रकाशित उर्दू साप्ताहिक 'हुर्रियत' के सम्पादक थे, और हिन्दू-मुस्लिम...

गांधी: मानवता के महानायक

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जर्मन नाटककार बर्टोल्ट ब्रेख़्त ने 'गैलिलियो' के जीवन पर टिप्पणी करते हुए एक कालजयी पंक्ति लिखी थी— “दुर्भाग्यशाली है वह देश, जिसे नायकों की...

सन 1919 जब गांधी ने अमृतसर अधिवेश में आत्मनिदा का प्रस्ताव...

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इतिहास के पन्नों में दर्ज एक कड़वी, लेकिन ज़रूरी सच्चाई 1919 के कांग्रेस के अमृतसर अधिवेशन से निकलकर हमारे सामने आती है अमृतसर —...

राममनोहर लोहिया — एक कुजात-गांधीवादी: स्मृति और संदेश

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कभी-कभी कोई व्यक्ति समय के विरुद्ध खड़ा दिखाई देता है। वह अपने युग की सुविधाओं, सत्ता की रीतियों और परंपरा की ठसक के सामने...

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