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सिनेमाई चश्मा और सामाजिक यथार्थ: ‘दो दीवाने शहर में’ और जातिगत...
— अम्बेदकर कुमार साहु —
यह लेख फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ (पात्र: ईशान/शशांक और रौशनी/मृणाल ठाकुर) का एक आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। भारतीय...











