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इंसानियत को ताक पर रखती तकनीक  

by Samta Marg
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इंसानियत को ताक पर रखती तकनीक  

 प्रेरणा

प्रेरणा

मौजूदा समय ऐसी तकनीक का है जो इंसानों की तरह खुद-ब-खुद सोच-समझकर, निर्णय लेगी और उस परअमल करेगी, लेकिन क्या इसमें कोई इंसानियत भी बची होगी? तकनीक के इस अत्याधुनिक स्वरूप के
मालिक अकूत पूंजी बनाने के अलावा किसी तरह की मानवीयता को भी अहमियत देंगे? ये और ऐसे ही कुछ सवालों पर अपने इस लेख में प्रकाश डाल रही हैं, प्रेरणा।- संपादक

पिछले सप्ताह एक दुर्घटना हुई – सुदूर अमरीका में ! आपने ‘चैट जीपीटी’ के बारे में सुना है न ! किसी
समय कम्प्यूटर ने जैसे हमारे जीवन में क्रांति ला दी थी या फिर अब फेसबुक, इंस्टा या यू-ट्यूब ने हमारे
सोचने-समझने की दुनिया ही बदल दी है, उसी तरह ‘चैट जीपीटी’ एक ऐसी खोज है जो आने वाले समय में
मानव सभ्यता को बदलने की क्षमता रखती है। इसे बनाया है ‘ओपन एआई’ नामक एक अमेरिकन ग़ैर-लाभकारी रिसर्च कम्पनी ने।


‘चैट जीपीटी’ एक लाभकारी सॉफ्टवेयर है। यह एक विशाल भाषा मॉडल है। मतलब एक ऐसा कम्प्यूटर
मॉडल जो ऑनलाइन उपलब्ध हर तरह की भाषा और जानकारी को ‘पढ़ता’ है, उससे ‘सीखता’ है और उस आधार पर आपके हर सवाल का ‘जवाब’ देता है। इसे हम आज ‘एआई’ या ‘आर्टिफीशियल इंटेलिजेन्स’ कहते हैं।


मतलब उस कृत्रिम प्रज्ञा से है जो मानवीय प्रज्ञा से अलग मशीन पर आधारित है और मशीन से ही सीखती है। यह सॉफ्टवेयर बाज़ार में लांच हुआ नवम्बर 2022 में और साल भर के भीतर ही 18 करोड़ से ज्यादा
लोगों ने इसे डाउनलोड कर लिया। हर महीने लगभग 150 सौ करोड़ बार इसका इस्तेमाल होता है। इसने रिकार्ड तेज़ी से बाजार में अपनी जगह बनायी है। 18 नवम्बर 2023 से पहले तक इस सॉफ्टवेयर की
क़ीमत 9000 करोड़ तक आंकी गयी थी।


अमेरिका की मशहूर सॉफ्टवेयर कम्पनी ‘माइक्रोसॉफ्ट’ का एक बड़ा निवेश इस ‘ओपन एआई’ कम्पनी में
है। ‘माइक्रोसॉफ्ट’ वही कंपनी है जिसके संस्थापक बिल गेट्स थे और जिसे आज भारतीय मूल के सत्य नारायण नडेला उर्फ सत्य नडेला सीईओ बनकर चलाते हैं। ‘ओपन एआई’ के संस्थापक और सीईओ का नाम है, सैम ऑल्ट्मन। इन सैम साहब को उनकी अपनी कम्पनी के बोर्ड ने 18 नवम्बर 2023 को सीईओ के पद से अचानक ही हटा दिया। सैम साहब ने जब यह बात मीडिया को बताई तो पूंजी-बाजार में बवाल मच गया।


कम्पनी के भीतर और बाहर सबने इस बात की निंदा की कि बगैर कोई कारण बताए सैम ऑल्ट्मन को
कैसे हटा दिया गया। रातों-रात ‘माइक्रोसॉफ्ट’ के शेयर के दाम गिर गए, तो सत्य नडेला की भी नींद हराम
हुई। 

‘ओपन एआई’ के बोर्ड से बात के बाद भी जब मामला संभलता नजर नहीं आया तो सत्य नडेला ने नहले पर दहला दे मारा। उन्होंने घोषणा कर दी कि वे सैम साहब को ‘माइक्रोसॉफ्ट’ में नौकरी दे रहे हैं जहां वे एआई पर आधारित भाषा ई-सॉफ्टवेयर बनायेंगे और इसके लिए अपनी टीम खड़ी करेंगे।


इधर यह घोषणा हुई और उधर ‘माइक्रोसॉफ्ट’ के शेयर के दाम पलटकर नये रिकोर्ड पर पहुंच गए। सैम
ने ‘एक्स’ पर ही (जो पहले ‘ट्विटर’ कहलाता था) लोगों को मानो नौकरियां बांटनी शुरू कर दीं।

 ‘ओपनएआई’ के कर्मचारी भाग-भागकर सैम साहब की नई कंपनी पहुंचने लगे। अब नींद उड़ने की बारी ‘ओपन एआई’ के बोर्ड की थी। ‘ओपन एआई’ कंपनी की कीमत बैठे-बिठाए कौड़ी भर नहीं रही।

अरबों-अरब की कंपनियों का यह पूरा खेल कुल एक सप्ताह से भी कम चला ! मछली का कांटा सबके
गले में अटक गया – न निगलते बने, न उगलते ! ‘माइक्रोसॉफ्ट’ के गले में सैम साहब का कांटा जा फंसा !
एआई या नकली प्रज्ञा की तकनीक इतनी विस्फोटक, किंतु अस्थिर है कि वह दुनिया में विनाश करने का माद्दा रखती है। 

‘माइक्रोसॉफ्ट’ ऐसी खतरनाक अस्थिर कम्पनी को अपने पेट में रखना नहीं चाहती थी। वह चाह तो रही थी कि किसी तरह सैम साहब से पीछा छूटे, लेकिन ‘ओपन एआई’ में निवेश किया अपना अरबों का धन भी उसे छोड़ना नहीं था। इधर कुआं, उधर खाई में फंसी थी ‘माइक्रोसॉफ्ट’ ! सैम के दोनों हाथ में लड्डू थे, पर वे उसे खा नहीं पा रहे थे। ऊंट किसी करवट बैठे, तभी तो वे खाने बैठें !


अब घटनाएं पूरा 380 डिग्री घूम चुकी हैं। सैम ऑल्ट्मन को ‘ओपन एआई’ ने फिर से अपना सीईओ बना
लिया है। ‘माइक्रोसॉफ्ट’ के सत्य नडेला बहुत खुश हैं कि अब उन्हें ‘ओपन एआई’ को ढोना नहीं पड़ेगा, लेकिन उनका अकूत धन ‘ओपन एआई’ में सुरक्षित रहेगा। बस, यही होना था।

अथाह पैसों का खेल अथाह गहरा होता है। एक ही साल में शून्य से अरबपति बनी कंपनी का आवारा पैसा जहां जाएगा, गदर तो मचाएगा ही ! अब सब आपसी समझौते पर आ जाएंगे और अपने-अपने पैसे, जो मूल से बढ़कर दानव हो चुके हैं, लेकर अपने-अपने घर चले जाएंगे।


सवाल है कि हमारे हाथ में क्या रह जाएगा? क्या टेक्नॉलॉजी की कोई नैतिकता होती है? क्या नैतिकता
के बिना कोई मानवीय समाज बन व टिक सकता है? ‘ओपन एआई’ जैसी टेक्नॉलॉजी हमारे सर मूडने में लगी है, वह एक नई चीज लेकर आई है- ‘डीपफेक’ !

यह टेक्नॉलॉजी आपको वैसा बना सकती है जैसे आप कभी नहीं रहे ! अभी अभिनेत्री रश्मिका मंधाना का एक ‘डीपफेक’ वीडिओ देखा गया जिस पर रश्मिका ने कड़ा एतराज किया हैः ‘मैं न ऐसी हूं, न मैंने ऐसा कभी किया ही है !’ 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि उनका गरबा नाचते जो वीडियो ‘वायरल’ किया गया है, वह सच्चा नहीं, ‘डीपफेक’ से बनाया गया है। मतलब ये दोनों ही नकली विडिओ हैं।


यही वह नैतिक सवाल है जिसकी चर्चा ‘ओपन एआई’ के बोर्ड में हो रही थी। बोर्ड को यह शिकायत थी
कि उनका सीईओ जो कर रहा है उसकी जानकारी बोर्ड को नहीं दे रहा। 

‘ओपन एआई’ हो या ‘माइक्रोसॉफ्ट’ या ऐसा ही काम करने वाली दूसरी कंपनियां, ये हमें भी जानकारी नहीं दे रही हैं कि वे कैसी टेक्नोलॉजी का विकास कर रही हैं। दुनिया भर के समझदार लोग कह रहे हैं कि जो टेक्नॉलॉजी सही-गलत का भेद मिटा दे, गलत काम करने के असीमित रास्ते खोल दे, नयी पीढ़ी की सोचने-समझने की ताकत छीन ले, सोशल मीडिया में नशे का जहर भर दे, क्या उस टेक्नॉलॉजी को स्वीकार करना चाहिए?


हर पीढ़ी का एक यक्ष प्रश्न होता है जिसे वह अगली पीढ़ी के लिए विरासत-सा छोड़ जाती है। इस
टेक्नॉलॉजी की विरासत है, दम तोड़ता मनुष्य का मन, ह्दय और आत्मा ! आवारा पैसा बेताल की तरह हर
तरफ हाथ मार रहा है। खुद को संभालिए कि कहीं आप भी उसकी लपेट में न आ जाएं। हमें समाजद्रोही
टेक्नॉलॉजी का सामना करना होगा और उसे अस्वीकार करना होगा। (सप्रेस)


 सुश्री प्रेरणा सामाजिक कार्यकर्त्ता और गांधीवादी-अर्थशास्त्र की अध्येता हैं।

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