पंजाब में स्थायी मोर्चों का एक साल पूरा, राज्य में सौ से ज्यादा पक्के मोर्चे

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30 सितंबर। पंजाब में स्थायी मोर्चा स्थापित किए हुए आज किसान आंदोलन को एक साल पूरा हो गया है। “पिछले 12 महीनों में, तीन किसान-विरोधी कानूनों, बिजली संशोधन विधेयक, और दिल्ली वायु प्रदूषण से संबंधित कानून के खिलाफ किसानों के विरोध से बढ़ते हुए, किसान आंदोलन आज एक ऐतिहासिक आंदोलन बन गया है, जिसे समाज के सभी वर्गों से, यहां तक ​​कि दुनिया भर से, समर्थन और एकजुटता प्राप्त हुई है।

एक साल पहले पंजाब में स्थायी मोर्चा के साथ शुरू हुए इस आंदोलन ने देश भर के किसानों को एक साझा उद्देश्य की खातिर लड़ने के लिए एकजुट किया है। आज पंजाब में सौ से अधिक सक्रिय पक्के मोर्चे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि आंदोलन लगातार मजबूत होता जा रहा है, अपनी मांगें पूरी होने तक चलता रहेगा।

भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेताओं को कई राज्यों में विरोध का सामना करना पड़ रहा है। करनाल में भाजपा को अपना कार्यक्रम रद्द करना पड़ा, जिसमें उसके जिलाध्यक्ष योगेंद्र राणा और पूर्व विधायक बख्शीश सिंह विर्क शामिल होनेवाले थे, किसानों ने मौके पर पहुंचकर विरोध शुरू कर दिया था। किसानों ने मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर और बख्शीश सिंह विर्क का पुतला फूंका। एसकेएम ने पहले घोषणा की थी कि वह भाजपा और उसके सहयोगी दलों के सभी कार्यक्रमों का विरोध करेगा।

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