12 अक्टूबर को शहीद किसान दिवस

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8 अक्टूबर। संयुक्त किसान मोर्चा ने उत्तर प्रदेश के और अन्य राज्यों के किसानों से भी अपील की है कि वे 12 अक्टूबर को लखीमपुर के शहीद किसानों के अंतिम अरदास में शामिल हों और उस दिन शहीद किसान दिवस मनाएं। उस दिन संयुक्त किसान मोर्चा पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की खातिर योगी और मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए कई कार्यक्रमों की घोषणा करेगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने लोगों से अपील की है कि 12 अक्टूबर को गुरुद्वारों, मंदिरों, मसजिदों, गिरजाघरों में या चाहें तो अन्य सार्वजनिक स्थल पर प्रार्थना सभा या श्रद्धांजलि सभा आयोजित करें। सभी शांतिप्रेमी नागरिक उस दिन मोमबत्ती जुलूस निकालें या पाँच शहीद किसानों को श्रद्धांजलि-स्वरूप अपने घर के बाहर पाँच मोमबत्ती जलाएं। आंदोलन में शिरकत कर रहे और समर्थन दे रहे सभी लोग इस दिन यह संकल्प दोहराएंगे कि संघर्ष तब तक जारी रखेंगे जब तक सभी माँगें पूरी नहीं हो जातीं। पीड़ित परिवारों के प्रति न्याय सुनिश्चित करने के लिए उस दिन संयुक्त किसान मोर्चा कई कार्यक्रमों की घोषणा करेगा। अगर 11 अक्टूबर तक आरोपियों की गिरफ्तारी और मंत्री की बर्खास्तगी नहीं होती है तो 18 अक्टूबर को देशभर में सुबह 10 बजे से अपराह्न 4 बजे तक रेल रोको किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश सरकार का रवैया चिंताजनक

संयुक्त किसान मोर्चा ने उप्र सरकार के रवैये पर चिंता जताते हुए कहा है कि सुमित जायसवाल और अंकित दास जैसे अन्य आरोपी भी अभी तक पकड़े नहीं गये हैं। यह पहले से ही अंदेशा था कि अगर सबकुछ उत्तर प्रदेश सरकार की मर्जी पर छोड़ दिया जाता है और अजय मिश्रा टेनी मंत्रिपरिषद में बने रहते हैं तो न्याय नहीं मिल पाएगा। इस अंदेशे की पुष्टि हो रही है। मंत्री के बेटे को शुक्रवार सुबह क्राइम ब्रांच के सामने पेश होना था पर वह हाजिर नहीं हुआ। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि सामान्य परिस्थितियों में अगर धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज होता है तो पुलिस जाती है और सीधे आरोपी को गिरफ्तार करती है। उप्र सरकार को सर्वोच्च अदालत को आश्वस्त किया कि अगले दिन आशीष मिश्रा से पूछताछ की जाएगी। यह इसी बात की ओर इशारा करता है कि उप्र सरकार को पता होगा कि आशीष मिश्रा कहां छुपा हुआ है। अब कहा जा रहा है कि आशीष मिश्रा तबीयत ठीक न होने के कारण पेश नहीं हुआ!

संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बार फिर अपनी यह मांग दोहरायी है कि अजय मिश्रा टेनी को मंत्रिपरिषद से बरखास्त किया जाए, क्योंकि वह न सिर्फ सांप्रदायिक वैमनस्य और घृणा फैलाने के दोषी हैं बल्कि हत्या के लिए उकसाया भी है। मंत्रिपरिषद में उनके बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। उन्हें बर्खास्त और गिरफ्तार किया जाना चाहिए। यह बेहद शर्मनाक है कि सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के बावजूद मोदी ने अजय मिश्रा टेनी को अभी तक मंत्रिपरिषद में बनाये रखा है।

इस हत्याकांड के तार जिन-जिन व्यक्तियों से जुड़े हुए हैं उसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में न तो स्थानीय जांच और न ही सीबीआई जांच से समाधान होगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने अदालत की इस टिप्पणी से सहमति जताते हुए कहा है कि जांच के लिए ऐसी विशेष जांच टीम गठित की जानी चाहिए जो सीधे सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट करे। लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा ने इसपर निराशा भी जाहिर की है कि मामले की सुनवाई अब 20 अक्टूबर को होगी, जबकि मामले के लंबित मुद्दों में से एक का भी समाधान अभी तक नहीं हुआ है। साथ ही मोर्चा ने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश का स्वागत किया है जिसमें पुलिस को सारे सबूत सुरक्षित रखने को कहा गया है।

खट्टर ने बयान वापस लिया

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पिछले रविवार को दिये अपने उस बयान के लिए, जिसमें उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को किसानों के खिलाफ लट्ठ उठाने को प्रोत्साहित किया था, माफी माँगते हुए उसे वापस ले लिया है। इसी के साथ खट्टर ने किसानों के विरोध-प्रदर्शन के एलान को देखते हुए कैथल का अपना दौरा रद्द कर दिया। संयुक्त किसान मोर्चा ने इसे किसानों की जीत बताते हुए कहा है कि खट्टर के बयान से बीजेपी की यह मानसिकता जाहिर होती है कि पहले हिंसा के हालात पैदा करो और फिर हिंसा का हवाला देते हुए आंदोलन को कुचल दो। चूंकि आंदोलन को खत्म करने की दूसरी तरकीबें सफल नहीं हो पायीं, तो अब आरएसएस-बीजेपी सीधे हिंसा के जरिए आंदोलन को कुचल देना चाहते हैं। किसान आंदोलन इन घिनौने हथकंडों से पूरी तरह सावधान है और लोकतांत्रिक तथा शांतिपूर्ण तरीकों से अपना संघर्ष जारी रखेगा, जब तक कि उसकी सभी माँगें पूरी नहीं हो जातीं।

लोकनीति सत्याग्रह पदयात्रा

2 अक्टूबर को चंपारण से शुरू हुई लोकनीति सत्याग्रह पदयात्रा गुरुवार को छपरा जिले में भगवानपुर हाट से 28 किमी चलकर रात में जलालपुर पहुंची। अपराह्न में पदयात्री बनियापुर पहुंचे, जहां बनियापुर इंटर कॉलेज में किसानों के साथ मीटिंग हुई। अठारह दिवसीय यह पदयात्रा शुक्रवार को 28 किमी चलकर छपरा जिले में माझी घाट पहुंची। यह पदयात्रा अब तक 140 किमी का सफर तय कर चुकी है और लोगों को गांधी के चंपारण सत्याग्रह की याद दिलाते हुए किसान आंदोलन के मुद्दों से अवगत करा रही है। पदयात्री शनिवार को जेपी के गांव सिताबदियारा पहुंचेंगे। पदयात्रा में शामिल लोग रोजाना प्रधानमंत्री से एक सवाल पूछते हैं। शुक्रवार का सवाल था- कोरोना महामारी के दौरान हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था की नाकामी के लिए कौन जिम्मेदार है?

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