राष्ट्रनिर्माण संवाद में समाजकर्मियों ने कहा, देश में मोहभंग व भय का माहौल है

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14 अगस्त। वाराणसी के सर्व सेवा संघ परिसर में राष्ट्रनिर्माण संवाद में देश भर से सर्वोदयी, समाजवादी और जनसंगठनों से जुड़े कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी इकट्ठा हुए। इससे पहले दिल्ली में कांस्टीट्यूशन क्लब में इसी तरह का सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस पहल में समाजवादी समागम के डॉ आनंद कुमार, जनतंत्र समाज के रामशरण शर्मा, सर्वोदय के रामधीरज जैसे जाने माने समाजकर्मियों की पहल रही है। राष्ट्र निर्माण संवाद या समागम का मकसद फासिस्ट, सांप्रदायिक शक्तियों से देश को और देश के गणतंत्र को बचाना तथा स्वराज के विभिन्न समूहों को एकजुट करना है।

राष्ट्र निर्माण संवाद में बीज वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए प्रख्यात न्यायविद प्रशांत भूषण ने आह्वान किया कि नौजवानों के साथ हो रहे अन्याय को समाप्त करने के लिए संविधान में रोजगार के अधिकार को शामिल किया जाए। बेरोजगारी को नयी पीढ़ी और देश की प्रगति के लिए सबसे गंभीर चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में इसके बारे में एक संविधान संशोधन आंदोलन के बारे में तैयार होना चाहिए।

छात्र युवा संघर्ष वाहिनी समन्वय समिति द्वारा 13-14 अगस्त को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उदघाटन सत्र में सर्वोदयी चिंतक अमरनाथ भाई ने कहा कि देश में मोहभंग और भय का माहौल है। इसलिए जनता से सीधे संवाद के लिए जनजागरण यात्राएँ आयोजित करनी चाहिए।

गांधी स्मारक निधि के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र राही के अनुसार देश पर सांप्रदायिक और फासिस्ट ताकतों की जकड़ बढ़ाने की कोशिश के खिलाफ चौतरफा असंतोष है। इस समय गांधी-विनोबा-जयप्रकाश की बनायी राह पर चलना ही युगधर्म है। वरिष्ठ समाजवादी नेता विजय नारायण ने स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में शहीदों की बजाय अंग्रेजी राज की सहायता करनेवालों की स्मृति में सरकारी धन से विशेषांक निकालना शर्मनाक है। उन्होंने आजादी के अमृत उत्सव के दौरान अमर शहीद राजेंद्र लाहिड़ी का बीएचयू में स्मारक बनाने की अपील की, क्योंकि वह यहीं के विद्यार्थी थे और उनकी कुर्बानी भुलायी जा रही है।

झारखंड की सामाजिक कार्यकर्ता किरण ने चुनाव व्यवस्था में बढ़ रहे दोषों को स्वराज के लिए कलंक बताते हुए सुझाव दिया कि भारतीय लोकतंत्र को स्वस्थ बनाने की पहल की जाए। हम विवशता में एकता की बजाय विवेकपूर्ण लोक एकता के लिए प्रयास करें। ओड़िशा के लोकसेवक कुमार चंद्रमणि ने कहा कि देश के 80 करोड़ नागरिकों का सरकारी अन्न पर निर्भर रहना हमारी राजनीतिक व्यवस्था की असफलता का परिणाम है। बिना ग्राम स्वराज का सपना पूरा किये कोई भी उत्सव अधूरा रहेगा। मज़हर भाई (तेलंगाना) ने धर्मों को राजनीतिक हथियारों में बदलने की बीमारी और शिक्षा की दिशाहीनता को आजादी के सात दशकों बाद के दो बड़े प्रश्न बताया। किसान-मजदूर नेता अखिलेंद्र प्रताप के अनुसार देश की मौजूदा सत्ता अंतरराष्ट्रीय धन और हिंदू धर्म के गठबंधन पर आधारित है। इसके संरक्षण में मुट्ठीभर अरबपतियों और धर्म को धंधा बनानेवाले ही पनपते रहेंगे। चुनाव सुधार विशेषज्ञ अमित जिवानी (गुजरात) ने मौजूदा चुनाव व्यवस्था को लोकहित विरोधी मानते हुए इसको राष्ट्रीय एकता में अवरोधक बताया। इसमें मतदाताओं को जातियों, धर्मों और भाषाओं के आधार पर बाँटनेवाली प्रवृत्ति है। इसमें सुधार देश की एकता का तकाजा है।

सत्र के अध्यक्ष समाजशास्त्री आनंद कुमार ने कहा कि आज यह बताना जरूरी है कि देश बचाओ के लिए सत्ता परिवर्तन क्यों जरूरी हो चुका है और यह बदलाव कैसे हो सकता है। इसमें किसानों और नौजवानों के प्रतिरोध आंदोलन अवश्य आशाजनक साबित हो रहे हैं।

महात्मा गांधी और जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ राष्ट्र निर्माण समागम का समापन हुआ।

राष्ट्र निर्माण समागम में आम सहमति से यह तय हुआ कि देश भर की सभी जनतांत्रिक शक्तियों को एकजुट करने का माहौल बनाया जाएगा।

समागम में कई सकारात्मक निर्णय लिये गए जो निम्न हैं –

1. इसी तरह का समागम सभी राज्यों में आयोजित किया जाय। बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, ओड़िशा के साथियों ने आगे बढ़कर समागम आयोजन का निर्णय लिया।

2. गांधी जयंती 2 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक बेरोजगारी, महंगाई आदि को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

3. मार्च 2023 में दिल्ली चलो का नारा गूंजेगा। दिल्ली में एक बड़ा कार्यक्रम किया जाएगा।

4. सम्मेलन में 20 सदस्यीय नई राष्ट्रीय आयोजन समिति का गठन किया गया जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान महाराष्ट्र, ओड़िशा आदि राज्यों के साथी शामिल हैं।

5. समागम ने यह निर्णय लिया कि देशभर में चल रहे जनतांत्रिक प्रयासों के बीच एकजुटता का माहौल बनाने में अपना योगदान करेगा।

सभा का संचालन राम धीरज, पुतुल,आलोक, फिरोज मीठीबोरवाला, मंथन, प्रभात कुमार, हिमांशु तिवारी आदि ने किया।

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