देश के मुसलमानों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक पिछड़ेपन की हालत जानने के लिए कांग्रेस नेतृत्व वाली संप्रग सरकार ने न्यायमूर्ति राजिंदर सच्चर के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया था । इसे सच्चर कमेटी का नाम दिया दिया गया । सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया था कि देश में मुसलमानों की हालत दलितों से भी बदतर है ।
बता दें कि 9 मार्च, 2005 को मानवाधिकारों के जाने-माने समर्थक न्यायमूर्ति राजिंदर सच्चर के नेतृत्व में जिस कमेटी का गठन हुआ उसमें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति सैयद हामिद, सामाजिक कार्यकर्ता ज़फर महमूद और अर्थशास्त्री एवं नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च के सांख्यिकीविद् डॉ. अबुसलेह शरीफ भी थे ।
403 पेज की सच्चर कमेटी की रिपोर्ट 30 नवंबर, 2006 को लोकसभा में पेश की गई थी । स्वतंत्र भारत में यह पहला मौक़ा था, जब देश के मुसलमानों के सामाजिक और आर्थिक हालात पर किसी सरकारी कमेटी द्वारा तैयार रिपोर्ट संसद में पेश की गई थी । सच्चर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट की शुरुआत में ही कहा है – भारत में मुसलमानों के बीच वंचित होने की भावना काफी आम है।
देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति के विश्लेषण के लिए आज़ादी के बाद से किसी तरह की ठोस पहल नहीं की गई है । सरकारी नौकरियों में उनका प्रतिनिधित्व सिर्फ़ 4.9 प्रतिशत बताया गया था । कहा गया कि मुसलमानों की साक्षरता दर का राष्ट्रीय औसत भी बाकी समुदाय से कम है ।
न्यायमूर्ति राजिन्दर सच्चर द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट ‘ भारत के मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति ‘ की 10 प्रमुख सिफारिशें इस प्रकार हैं —
1- 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराना, मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में सरकारी स्कूल खोलना, स्कॉलरशिप देना, मदरसों का आधुनिकीकरण करना आदि ।
2 – रोजगार में मुसलमानों का हिस्सा बढ़ाना, मदरसों को हायर सेकंडरी स्कूल बोर्ड से जोड़ने की व्यवस्था बनाना ।
3 – प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के मुसलमानों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराना और प्रोत्साहन देना, मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में बैंक शाखाएं खोलना, महिलाओं के लिए सूक्ष्म वित्त को प्रोत्साहित करना आदि ।
4. – मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में कौशल विकास के लिए आइटीआइ और पॉलिटेक्निक संस्थान खोलना ।
5 – गांवों/शहरों/बस्तियों में मुसलमानों सहित सभी गरीबों को बुनियादी सुविधाएं, बेहतर सरकारी स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना ।
6 . चुनाव क्षेत्र के परिसीमन प्रक्रिया में इस बात का ध्यान रखना कि अल्पसंख्यक बहुल इलाकों को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित न किया जाए ।
7 – इक्वल अपॉर्च्युनिटी कमीशन, नेशनल डेटा बैंक असेसमेंट और मॉनिटरी अथॉरिटी का गठन।
8 -. मदरसों की डिग्री को डिफेंस, सिविल और बैंकिंग एग्जाम के लिए मान्य करने की व्यवस्था करना ।
हो सकता है नव उदारीकरण के दौर में विस्तार पाए नव मध्यवर्ग के प्रतिनिधि किसी रिटायर्ड हर्ट , घूसखोर एडिशनल डिस्ट्रिक जज को इससे असहमति हो । जो रामनवमी के जुलूस में नारे लगाता आगे – आगे चलता रहा है ।
न्यायमूर्ति सच्चर का जन्म 22 दिसंबर 1923 को हुआ था । उनकी पढ़ाई लाहौर से हुई थी । उन्होंने लाहौर के डीएवी हाईस्कूल, गवर्नमेंट कॉलेज और लॉ कॉलेज से पढ़ाई की । 22 अप्रैल 1962 को उन्होंने शिमला से वकालत की शुरुआत की । उन्होंने 8 दिसंबर 1960 से सुप्रीम कोर्ट में वकालत शुरू की ।
उन्हें 12 फरवरी 1970 को दो साल के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त का गया था । उसके बाद 5 जुलाई 1972 को दिल्ली हाईकोर्ट का स्थाई जज बनाया गया । सच्चर 16 मई 1975 से 10 मई 1976 तक सिक्किम हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस रहे । इसके बाद उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया । दिल्ली हाईकोर्ट के अलावा जस्टिस सच्चर सिक्किम, राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस भी रहे ।इमरजेंसी के दौरान सच्चर का तबादला राजस्थान हाईकोर्ट कर दिया गया था ।
इमरजेंसी के बाद 9 जुलाई 1977 को सच्चर का तबादला फिर से दिल्ली हाईकोर्ट हो गया । इस दौरान उन्होंने कई अहम मामलों की सुनवाई की और कई समितियों के सदस्य भी रहे । 22 दिसंबर 1985 से 22 अगस्त 1985 को सेवानिवृत्त होने तक जस्टिस सच्चर दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे ।
जस्टिस सच्चर देश में मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल के साथ लंबे समय से जुड़े थे । इसके अलावा वह मानवाधिकारों के प्रसार पर संयुक्त राष्ट्र के उपायोग के सदस्य भी रहे । इस देश को उनका सबसे बडा योगदान मुसलमानों के सामाजिक, शैक्षणिक आर्थिक हालात पर पेश उनकी रिपोर्ट थी, जिसमें उन्होंने इस समुदाय की वास्तविक स्थिति से दुनिया को अवगत कराया था ।
वरिष्ठ पत्रकार , भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी ) नेता स्व. सीताराम येचुरी की पत्नी सीमा चिश्ती ने कहा था — ‘ न्यायमूर्ति सच्चर दृढनिश्चयी ( man of strong conviction ) थे जो सही के लिए लडने से कभी पीछे नहीं हटे ।
सीमा चिश्ती ने सेंट स्टीफन कॉलेज, दिल्ली से स्नातक और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री प्राप्त की है । 1994 से 1996 तक लंदन में एचटीवी और बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में काम किया, उसके बाद वे बीबीसी इंडिया में चली गईं । वह 2006 से ‘ द इंडियन एक्सप्रेस ‘ में दिल्ली में रेजिडेंट एडिटर रहीं । वह डिजिटल समाचार पोर्टल द वायर की संपादक हैं ।
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