मधु लिमये की रोमांचक जीवन यात्रा – प्रोफेसर आनंद कुमार

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Madhu Limaye

anand kumar

श्री मधु लिमये की रोमांचक जीवन यात्रा के अनेक आकर्षक आयाम थे। वे प्रखर स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन और गोवा मुक्ति आंदोलन में लंबी सज़ा काटी। वे समाजवादी आंदोलन के सिद्धांतकार और संगठनकर्ता थे। श्रेष्ठ सांसद के रूप में संसदीय व्यवस्था के नायक बने। लोकतंत्र के शिल्पी थे। स्वच्छ सार्वजनिक जीवन का प्रतिमान स्थापित किया। अपनी जिंदगी को वोट + फावड़ा + जेल के माध्यम से संतुलित करके हजारों लोगों के मार्गदर्शक बने।

श्री मधु लिमये ने अपना सार्वजनिक जीवन राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के सत्याग्रही के रूप में शुरू किया। पढ़ाई छोड़कर वे कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में योगदान दिया। भारत की आज़ादी से मिली सफलता को 450 वर्षों से पुर्तगाली उपनिवेश बने गोवा की मुक्ति का आधार बनाने का साहस दिखाया। पुर्तगाली साम्राज्यवादी शासकों ने मधु लिमये को 12 वर्ष की कैद की सज़ा दी।

गोवा की कैद से मुक्त होने के बाद मधु लिमये ने डॉ. लोहिया के साथ सोशलिस्ट पार्टी के निर्माण में योगदान दिया। नेहरू शासन द्वारा पूंजीवादी व्यवस्था तथा जाति और लिंगभेद आधारित विषमताओं को दिए जा रहे संरक्षण के विरुद्ध जनमत निर्माण और सविनय अवज्ञा आंदोलनों में जुटे रहे। 1964 में लोकसभा में प्रवेश हुआ और संसद को देश का आईना बनाने में डॉ. लोहिया के सहयोगी बने। 1975 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के समर्थन में शामिल हुए और 1977 की अग्निपरीक्षा में लोकतांत्रिक शक्तियों के सफल नेतृत्व में भूमिका निभाई। बाद में सत्ता प्रतिष्ठान में सांप्रदायिक ताकतों के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देते हुए सर्वधर्म समभाव की राह अपनाई। जनहित और सामाजिक एकता के लिए 1947 में पहली बार और 1979 में दूसरी बार सत्ता को ठुकराया। इसके कारण पहले कांग्रेसी और बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आलोचनाओं का सामना किया।

निजी जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उन्होंने ‘जाति तोड़ो’ का कठिन मार्ग अपनाया। श्री मधु लिमये बिहार से 1964 से 1977 तक चार बार लोकसभा चुनाव में विजयी हुए। उन्होंने श्री रामसुंदर दास और श्री भोला पासवान शास्त्री के मुख्यमंत्री बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में श्री रबी राय लोकसभा अध्यक्ष बने, श्री जॉर्ज फर्नांडिस सोशलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष बने, तथा श्री पुरुषोत्तम कौशिक, श्री भगीरथ भंवर और श्री आरिफ बेग 1977 की जनता पार्टी सरकार में केंद्रीय मंत्री बने। श्री शरद यादव युवा जनता के अध्यक्ष बने।

बिहार के लोकप्रिय जननेता श्री रामानंद तिवारी को केंद्रीय सरकार में मंत्री बनाए जाने के प्रयास का विरोध करके उन्होंने ब्राह्मण समाज का विरोध झेला। शिक्षा और सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को आरक्षण का समर्थन करके सवर्ण जातियों का विरोध सहा।

श्री मधु लिमये ने समाजवादी नवनिर्माण में डॉ. आंबेडकर के विचारों और आंदोलनों के योगदान का नया मूल्यांकन किया तथा समाजवादी आंदोलन की जाति-नीति में गांधी-लोहिया धारा के समांतर उसे महत्वपूर्ण सिद्ध किया। उन्होंने दिखाया कि हर समाजवादी को डॉ. आंबेडकर के विचारों को अपनाना चाहिए। बिना आंबेडकर विचार के समाजवादी सपना अधूरा रहेगा।

इस प्रकार श्री मधु लिमये ने समाजवादी सपनों के लिए अपना जीवन समर्पित कर लोकतांत्रिक भारत के निर्माताओं में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उन्हें जातिवादी और सांप्रदायिक ताकतों से जोड़कर देखना केवल अज्ञान का परिचायक है।


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