— Randhir Gautam —
भारतीय संस्कृति में धर्म और आध्यात्मिकता की एक समृद्ध परंपरा रही है। इस परंपरा में ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ से लेकर ‘अप्प दीपो भवः’ तक की सनातन आध्यात्मिक यात्रा के केंद्र में प्रकाश, उजास और मुक्ति का मूर्त प्रतीक दीपक ही रहा है।
दीपावली के दीप में जिस प्रकार प्रकाश की अभिव्यक्ति होती है, उसी प्रकार आध्यात्मिक दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की ऊर्जा का उद्देश्य भी अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने की आकांक्षा होना चाहिए।
मुक्ति के मार्ग में ज्योति की खोज, दृष्टि, दर्शन और दिव्यता की खोज के समान है। ज्योति की यह खोज गुरु और शिष्य, दोनों के लिए समान रूप से प्रासंगिक है।
ज्योति विचार में भी होती है और उसके प्रवाह तथा प्रभाव में भी। मेरे मित्र सुशोभित ने लिखा है कि दीपक ज्ञान, आलोक, बलिदान, प्रतिज्ञा और कल्याण का श्रेष्ठतम प्रतीक है। वह भारतीयता का केंद्रीय बिंब है। उसमें भोग नहीं, त्याग; ऐश्वर्य नहीं, उपरति; स्वार्थ नहीं, कल्याण और प्रदर्शन नहीं, दर्शन की भावना निहित है। हर दीपक बुझने से पहले अपना यह संदेश मनुष्य के हृदय तक पहुँचा दे, यही दीपावली की सच्ची प्रार्थना है।
आइए, मन को प्रसन्न रखने के साथ-साथ इस दीपावली पर हम अपने जीवन से गरीबी, ईर्ष्या, द्वेष, लालच, नफरत और अमानवीय भावनाओं को दूर कर प्रेम का दीप जलाएँ और समृद्धि का उजियारा फैलाएँ।
ठीक उसी तरह, जैसे भगवान राम ने चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटने पर सत्य और मर्यादा का दीप जलाया था; भगवान कृष्ण ने प्रेम का दीप जलाया था; महात्मा बुद्ध ने अहिंसा, भगवान महावीर ने अनासक्ति और श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने स्वतंत्रता एवं दूसरों की मुक्ति का दीप जलाया था। भारतीय परंपरा की अनेक धाराओं में यह दीप मानव मुक्ति, करुणा और कल्याण का प्रतीक रहा है।
अहिंसा पर आधारित यह पवित्र पर्व आज हिंसा के प्रतीक बारूद और पटाखों की गगनभेदी आवाजों में अपनी मूल भावना खोता जा रहा है। बाजार की मिठाइयों के स्वाद के बीच इस पावन पर्व का असली स्वाद, जो आत्मिक शुद्धता, सत्य और आनंद की अनुभूति में निहित है, प्रायः खोता जा रहा है।
आइए, इस दीपावली पर हम जरूरतमंद लोगों का सहयोग करें और उनके घरों तक भी दीपावली का प्रकाश पहुँचाएँ। हमारी खुशियाँ तभी सार्थक होंगी, जब हम दूसरों के जीवन का भी अंधकार कुछ कम कर सके। हम सब मिलकर प्रेम, करुणा, अहिंसा, स्वतंत्रता और मानव कल्याण का दीप जलाएँ।
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