आंदोलन पहले जैसा ही मजबूत है, मुगालता न पाले सरकार – किसान मोर्चा

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24 अक्टूबर। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने मध्यप्रदेश के सतना में, जहां उन्हें स्थानीय किसानों द्वारा काले झंडे के विरोध का सामना करना पड़ा, कहा कि किसान आंदोलन को कुछ संगठनों ने छोड़ दिया है और यह जल्द ही समाप्त हो जाएगा। मंत्री महोदय की यह इच्छा ठीक उसी रणनीति का हिस्सा है जो मोदी सरकार द्वारा आंदोलन के संबंध में अपनायी जा रही है, 22 जनवरी 2021 के बाद से, जब औपचारिक वार्ता बंद की गयी थी। तोमर के उपर्युक्त बयान के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को चेतावनी दी है कि ऐसा सोचने से उसे कोई फायदा नहीं होगा बल्कि ऐसा सोचना उसे महंगा साबित हो सकता है। दिल्ली की सरहदों पर 11 महीने पूरे करने जा रहा किसानों का आंदोलन पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और व्यापक हुआ है। एसकेएम ने कृषिमंत्री और मोदी सरकार के अन्य नेताओं को चेतावनी दी है कि उनका आत्मसंतोष उन्हें ही नुकसान करेगा। लोकतंत्र में कोई भी चुनी हुई सरकार सबसे अधिक संख्या वाले किसानों-श्रमिकों और नागरिकों की एकजुट आवाज और मांगों को नजरअंदाज नहीं कर सकती है, खासकर तब जबकि मांगें सही हों और आजीविका को हो रही अपूरणीय क्षति के सबूत पर आधारित हों।

करनाल लाठीचार्ज की जांच

संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने ताजा बयान में करनाल में हुए लाठीचार्ज की जांच का मसला भी उठाया है। हरियाणा के अधिकारी आयुष सिन्हा का वायरल वीडियो, जिसमें उन्हें मुख्यमंत्री की करनाल यात्रा के विरोध कर रहे किसानों के सिर तोड़ने के लिए पुलिस को निर्देश देते हुए सुना गया था, ने पूरे देश को शर्मसार और झकझोर कर रख दिया था। उस दिन बस्तर टोल प्लाजा पर पुलिस द्वारा किए गए क्रूर लाठीचार्ज के बाद एक किसान सुशील काजल बुरी तरह घायल हो गए और बाद में शहीद हो गए। राज्य सरकार द्वारा की गई करनाल हिंसा में, न्याय के लिए, और आयुष सिन्हा के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के लिए, किसानों द्वारा शुरू किए गए तीव्र आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन अग्रवाल की अध्यक्षता में एक व्यक्ति न्यायिक आयोग का गठन किया था। आयोग ने अब 3 महीने और समय सीमा बढ़ाने की मांग की है। आयोग ने गवाहों को सुनना भी शुरू नहीं किया है, और तो और, उसने आयुष सिन्हा के पुलिस को हिंसक निर्देशों का वीडियो भी नहीं देखा है, जो राज्य सरकार के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के समर्थन के साथ दिया गया था। लाठीचार्ज, आयुष सिन्हा के बयानों और पुलिस हिंसा की जांच के लिए किसानों द्वारा मांगी गयी न्यायिक जांच का दायरा, ऐसा लगता है, अब बदला जा रहा है, आयोग अब अन्य मुद्दों पर विचार कर रहा है जैसे कि किसानों का विरोध कैसे शुरू हुआ आदि। यह स्पष्ट है कि हरियाणा सरकार न्यायमूर्ति एसएन अग्रवाल आयोग को करनाल कांड में किसानों को न्याय दिलाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी हेराफेरी का हथियार बनाने की इच्छुक है। एसकेएम इसकी निंदा करता है और मांग करता है कि आयोग इस बात पर ध्यान केंद्रित करे कि पुलिस हिंसा और तत्कालीन एसडीएम के निर्देशों पर ध्यान देने के लिए क्या सहमति हुई थी? आयोग निर्धारित समय में अपना काम पूरा करे, और आयुष सिन्हा निलंबित रहें।

26 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन

संयुक्त किसान मोर्चा ने सभी सदस्य संगठनों से अपील की है कि 26 अक्टूबर को अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त करने और गिरफ्तारी के लिए दबाव बनाने के लिए पूरे भारत में तहसील और जिला मुख्यालयों पर सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक धरना-प्रदर्शन आयोजित करें। यह वह दिन भी है जिस दिन आंदोलन ने दिल्ली की सीमाओं पर शांतिपूर्ण और निरंतर विरोध के ग्यारह महीने पूरे कर लिये होंगे।

हरियाणा में भाजपा नेताओं का विरोध जारी

हरियाणा के भिवानी में राज्य मंत्री जेपी दलाल को किसानों के आक्रोश और काले झंडे के विरोध का सामना करना पड़ा। 50 से अधिक किसानों को हिरासत में लिया गया है। एसकेएम ने उनकी तत्काल बिना शर्त रिहाई की मांग की है। इस बीच, हरियाणा प्रशासन ने ऐलनाबाद में दो अलग-अलग प्राथमिकी में 200 से अधिक किसानों पर मामले दर्ज किये हैं, जब किसानों ने हरियाणा भाजपा और जजपा के मंत्रियों और नेताओं, जो अपने उम्मीदवारों का प्रचार कर रहे थे, का विरोध किया था। इन भाजपा और जजपा नेताओं को प्रचार के लिए निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के दौरान किसानों द्वारा काले झंडे दिखाये गये।

अस्थिकलश यात्राएं

विभिन्न जिलों और राज्यों में कई शहीद किसान अस्थिकलश यात्राएं चल रही हैं, और ये बड़ी संख्या में समर्थकों को आकर्षित कर रही हैं, जो लखीमपुर खीरी किसान नरसंहार के पांच शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए आगे आ रहे हैं। तमिलनाडु में, यात्रा कल्लाकुरिची जिले के उलुदुरपेट से होकर गुजरी और फिर पेरम्बलुर में प्रवेश किया। 26 तारीख को वेदारण्यम में बंगाल की खाड़ी में अस्थियां विसर्जित करने से पहले यह यात्रा 22 जिलों को कवर करेगी। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में रविवार दोपहर शहीदों की अस्थियां संगम में विसर्जित की गयीं। एक यात्रा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और कुशीनगर जिलों से होकर गुजरी। एक अन्य यात्रा हरियाणा के झज्जर जिले के कई गांवों और टोल प्लाजा धरने से होकर गुजरी। यह यात्रा दीघल टोल प्लाजा और ढांसा टोल प्लाजा को कवर करती हुई टिकरी बार्डर मोर्चा पहुंचने से पहले कल रोहड़ टोल प्लाजा तक जाएगी। यात्रा उत्तराखंड के विकासनगर के कई गांवों में गयी, जबकि मथुरा और उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में यात्रा चल रही है। हिमाचल प्रदेश में यमुना घाट पर पोंटा साहिब में शहीदों की अस्थियां विसर्जित की गयीं। यात्रा पंजाब के विभिन्न स्थानों से मालवा, माझा और दोआबा के सभी तीन क्षेत्रों में जा रही है। यात्रा को भारी जनसमर्थन मिल रहा है और न्याय की मांग भी जोरों से आगे बढ़ रही है।

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