कॉप-26 : जी 20 देशों के 70 फीसद किशोरों ने जलवायु परिवर्तन पर चिंता जतायी

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29 अक्टूबर। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने जलवायु परिवर्तन पर एक बड़ा जनमत (वोटिंग) सर्वेक्षण कराया और इसकी रिपोर्ट प्रकाशित की है।

इस जनमत सर्वेक्षण को ‘जी20 पीपुल्स क्लाइमेट वोट’ कहा जाता है। इस जनमत में 689,000 से अधिक लोगों में हिस्सा लिया। इनमें 18 वर्ष से कम आयु के 302,000 से अधिक किशोर शामिल थे।

यह जनमत इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि 31 अक्टूबर से ग्लासगो में कॉप-26 शुरू हो रहा है। कॉप-26 जलवायु परिवर्तन पर जी-20 देशों का शिखर सम्मेलन है।

इस रिपोर्ट से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि किशोरों में जलवायु परिवर्तन एक चिंताजनक विषय बन गया है और वे भविष्य में ठोस नीतियों की जरूरत महसूस कर रहे हैं।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि ज्यादातर देशों में मतदान के लिए कम से कम उम्र 18 साल है और जिन किशोरों ने इस जनमत सर्वेक्षण में हिस्सा लिया है, वे आने वाले दिनों में मतदान करके अपने देशों में सरकारें चुनेंगे। यही किशोर आने वाले सालों में अलग-अलग क्षेत्रों में नौकरियां करेंगे और प्रभावशाली पदों पर चले जाते हैं।

सर्वेक्षण में शामिल सभी जी20 देशों के अधिकांश 18 साल से कम उम्र के किशोरों का मानना ​​​​है कि जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक आपातकाल है। इनमें अर्जेंटीना और सऊदी अरब के 63 प्रतिशत और इटली और यूके के 86 प्रतिशत किशोर शामिल थे।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में जी20 देशों की हिस्सेदारी का 80 प्रतिशत है जबकि वैश्विक उत्सर्जन में 75 फीसदी हिस्सेदारी है। इन देशों में कड़े से कड़े कदम उठाए बिना 2015 के पेरिस समझौते के अनुसार वैश्विक ताप को 1.5 सेल्सियस तक रखना असंभव होगा।

यूएनडीपी के प्रशासक अचिम स्टेनर कहते हैं, “यह नया पीपुल्स क्लाइमेट वोट दिखाता है कि जी20 देशों में औसतन 70 प्रतिशत युवा मानते हैं कि हम वैश्विक जलवायु आपातकाल में हैं।”

वह कहते हैं कि इस जनमत सर्वेक्षण से यह स्पष्ट है कि किशोरों को यह जलवायु परिवर्तन विरासत में मिलेगा और उन्हें इसका अंदाजा है, इसलिए वे वैश्विक नेताओं को संदेश दे रहे हैं कि अब ठोस जलवायु कार्रवाई की जरूरत है। दुनिया को अब उम्मीद है कि जी20 देश ग्लासगो में कॉप26 में साहसिक, ऐतिहासिक निर्णय लेने के लिए एक साथ आएंगे, जो सचमुच भविष्य को बदल देगा।

इस सर्वेक्षण में सबसे अधिक (59 प्रतिशत) किशोरों ने वन और भूमि संरक्षण की नीतियों में बदलाव को सबसे जरूरी बताया। इसके बाद 57 फीसदी किशोरों ने सौर, पवन और नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करना और जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों का उपयोग करने की नीति को जलवायु परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण बताया।

रिपोर्ट में किशोरों और वयस्कों के बीच का मतों का अंतर भी बताया गया है। यह अंतर अच्छी व किफायती बीमा तक पहुंच बढ़ाने जैसी नीतियों पर सबसे बड़ा था। गौरतलब है कि मौसम की चरम घटनाओं के प्रभावित लोगों के लिए किफायती बीमा काफी महत्व रखता है। इसके अलावा स्वच्छ इलेक्ट्रिक कारों और साइकिलों का उपयोग को लेकर भी किशोरों और व्यस्कों के बीच अंतर देखने को मिला।

(डाउन टु अर्थ हिंदी से साभार)

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